पाक हाईकोर्ट व विशेष अदालत ने मुशर्रफ को कई बार तलब किया। वे हर बार बीमारी का बहाना बनाकर देश लौटने से इनकार करते रहे। हाल में उन्हाेंने अस्पताल से एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें बिस्तर पर लेटे-लेटे कहा, ‘देशद्रोह का केस बेबुनियाद है। गद्दारी छोड़िए, मैंने तो इस मुल्क की कई बार खिदमत की है। कई बार जंग लड़ी। 10 साल तक सेवा की। आज मेरी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मेरे खिलाफ जांच के लिए कमीशन बनाया गया। बेशक बनाइए। लेकिन, कमीशन यहां आकर मेरी तबियत देखें और बयान दर्ज करें। इसके बाद कोई कार्रवाई करे।’
सजा से बचने को हाईकोर्ट में पहले से याचिका
दुबई के अस्पताल में भर्ती परवेज मुशर्रफ को पहले से ऐसी सजा के आभास के चलते उन्होंने पिछले हफ्ते अपने वकीलों के जरिए लाहौर हाईकोर्ट में अपील दर्ज कराई। इसमें उन्होंने हाईकोर्ट से विशेष अदालत में चल रही सुनवाई को रुकवाने की मांग की। मुशर्रफ का कहना था कि उन्होंने हाईकोर्ट में पहले ही विशेष अदालत के गठन के खिलाफ याचिका दी है, जिसमें मुकदमे की मंशा पर सवाल उठाया है।
पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ को पेशावर की विशेष अदालत ने मंगलवार को देशद्रोह के मामले में फांसी की सजा सुनाई। भारत के साथ 1999 के कारगिल युद्ध की योजना बनाने वाले मुशर्रफ पाकिस्तान के इतिहास में मौत की सजा पाने वाले पहले सैन्य शासक और दूसरे शीर्ष अधिकारी हैं। उनसे पहले जुल्फिकार अली भुट्टो को 1977 में प्रधानमंत्री पद से हटाकर फांसी पर चढ़ा दिया गया था।
मुशर्रफ पर 2007 में निर्वाचित सरकार का तख्तापलट करने के बाद आपातकाल घोषित करने के लिए देशद्रोह का आरोप था। इस आरोप की सुनवाई पेशावर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस वकार अहमद सेठ की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ कर रही थी। मंगलवार को पीठ ने इसे अपराध मानते हुए मुशर्रफ के खिलाफ 2-1 के मत से फैसला सुनाया। मुशर्रफ के खिलाफ 2014 में यह मामला शुरू हुआ था।
इसके बाद मुशर्रफ मार्च 2016 में इलाज कराने के नाम पर दुबई चले गए और फिर सुरक्षा, स्वास्थ्य का हवाला देते हुए वह कभी वापस नहीं लौटे। जस्टिस सेठ, जस्टिस नजर अकबर और जस्टिस शाहिद करीम की पीठ ने इस मामले में अपना फैसला 19 नवंबर को सुरक्षित रखा था। इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने 27 नवंबर को इस फैसले को सुनाने पर रोक लगाते हुए सरकार को 5 दिसंबर तक नई अभियोजन टीम बनाने का भी निर्देश दिया था।
सरकार द्वारा गठित नई टीम पांच दिसंबर को विशेष अदालत के समक्ष पेश हुई, इसके बाद विशेष अदालत ने फैसला सुनाने के लिए 17 दिसंबर की तारीख तय की थी।
सरकार की ओर से नई अभियोजन टीम 5 दिसंबर को विशेष अदालत में पेश हुई जिसके बाद विशेष अदालत ने 17 दिसंबर को फैसले की तारीख तय की। सुनवाई शुरू होते ही सरकारी वकीलों ने नई याचिकाएं पेश कीं। एक याचिका में पूर्व पीएम शौकत अजीज, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अब्दुल हमीद डोगर और पूर्व कानून मंत्री जाहिद हामिद को संदिग्ध बनाने को कहा गया। इस पर जस्टिस करीम ने कहा था कि सरकार के पास सही इरादे नहीं हैं। मुशर्रफ के वकील रजा बशीर ने कहा था कि पूर्व राष्ट्रपति को बचाव का अधिकार मिलना चाहिए, क्योंकि वे बुरी सेहत के कारण अदालत में पेश नहीं हो सकते हैं।
शरीफ सरकार ने चलाया मुकदमा
देशद्रोह का यह मुकदमा तीन नवंबर 2007 को आपातकाल लगाने पर दर्ज हुआ था। नवाज शरीफ के 2013 में सत्ता में लौटने पर दिसंबर में मुशर्रफ के खिलाफ देशद्रोह का मामला फिर से शुरू किया गया। 31 मार्च 2014 को मुशर्रफ आरोपी करार दिए गए और उसी साल सितंबर में अभियोजन ने सारे साक्ष्य विशेष अदालत के सामने रखे। इसके खिलाफ दायर अपीलों के कारण मुकदमे में देरी हुई। सुप्रीम कोर्ट से मिली मंजूरी के बाद मुशर्रफ मार्च 2016 में पाकिस्तान से बाहर चले गए थे।