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US: ट्रंप ने न्यूक्लियर डील के बदले रखी अब्राहम समझौते की शर्त, सऊदी पर क्यों दबाव बना रहे अमेरिकी राष्ट्रपति?

Sat, 25 Jul 2026 09:31 AM IST
निर्मल कांत एएनआई, वाशिंगटन।

सार

US: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नागरिक परमाणु समझौते के लिए सऊदी अरब के सामने अब्राहम समझौते में शामिल होने की शर्त रखी है। ट्रंप ने कहा कि ईरान का खतरा अब पहले जैसा नहीं रहा। जानिए इस समझौते से जुड़ी पूरी कहानी।
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डोनाल्ड ट्रंप, मोहम्मद बिन सलमान - फोटो : डोनाल्ड ट्रंप, मोहम्मद बिन सलमान
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विस्तार
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक बार फिर कहा कि नागरिक परमाणु समझौते को अंतिम रूप देने के लिए सऊदी अरब को अब्राहम समझौते में शामिल होना होगा। उन्होंने कहा कि यह शर्त पूरी करना जरूरी है। ट्रंप ने कहा कि अब रियाद के पास ईरान जैसी क्षेत्रीय ताकत के दबदबे का खतरा नहीं है, इसलिए अब पीछे हटने की कोई वजह नहीं है। 
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अब्राहम समझौते क्या हैं?
अब्राहम समझौते साल 2020 में अमेरिका की पहल पर हुए कई कूटनीतिक समझौतों का समूह है। इसके तहत इस्राइल और कई अरब देशों के बीच औपचारिक राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध स्थापित हुए थे। इनमें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बहरीन, मोरक्को और सूडान शामिल हैं।

अमेरिकी परमाणु क्षेत्र में नए विकास पर अपने संबोधन में ट्रंप ने प्रस्तावित ऊर्जा साझेदारी के केंद्र में अब्राहम समझौते को रखा। उन्होंने कहा कि इस्राइल के साथ क्षेत्रीय संबंध सामान्य करने वाले इस समझौते में शामिल होना 'पश्चिम एशिया के भविष्य के लिए बहुत अहम' है।
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राष्ट्रपति ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने कहा, इसे पूरा करने के लिए उन्हें अब्राहम समझौते का सदस्य बनना होगा। अब समय आ गया है कि वे ऐसा करें। उन्होंने कहा, वे और अन्य देश ऐसा नहीं करना चाहते थे क्योंकि उन्हें ईरान से समस्या थी। अब वह समस्या नहीं है। अब वहां कोई बड़ी ताकत नहीं है। वे पश्चिम एशिया के दबंग थे। अब वे इतने बड़े दबंग नहीं रहेंगे। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, किसी न किसी समय वे इसमें शामिल होंगे। 

ट्रंप ने एक दिन पहले ट्रुथ सोशल पर कहा था कि ऊर्जा समझौता केवल गैर-सैन्य परमाणु इस्तेमाल तक सीमित रहेगा और सऊदी अरब में घरेलू स्तर पर यूरेनियम संवर्धन की अनुमति नहीं होगी। ट्रंप ने गुरुवार को लिखा था, नागरिक परमाणु समझौते को मंजूरी दी जाएगी। लेकिन यह पूरी तरह से सऊदी अरब के अब्राहम समझौते में शामिल होने पर निर्भर है। अमेरिका नागरिक (बिना संवर्धित) परमाणु सुविधाओं का विरोध नहीं करता।  

नागरिक परमाणु समझौते पर किए हस्ताक्षर
ट्रंप की यह स्पष्ट शर्त अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान के बीच हुए अहम नागरिक परमाणु ऊर्जा समझौते पर हस्ताक्षर के बाद आई है। इस समझौते को अमेरिका की संसद में समीक्षा के लिए भेजा गया है। इन दोनों मुद्दों को जोड़कर ट्रंप ने नागरिक ऊर्जा साझेदारी को पश्चिम एशिया की कूटनीति में लंबे समय से चले आ रहे विवाद के साथ जोड़ दिया है।

दूसरी ओर, सऊदी अरब लगातार कहता रहा है कि इस्राइल को औपचारिक रूप से मान्यता देने का फैसला एक स्वतंत्र फलस्तीनी राज्य की स्थापना के लिए स्पष्ट और भरोसेमंद रास्ते पर निर्भर करेगा। वाशिंगटन और रियाद के बीच नागरिक परमाणु समझौते को लेकर बातचीत कई अमेरिकी सरकारों के दौरान चलती रही है। हालांकि, पहले की कोशिशें परमाणु प्रसार रोकने से जुड़ी शर्तों को लेकर अटक गई थीं।

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में चर्चा किए गए पुराने समझौतों के विपरीत, मौजूदा मसौदे में सऊदी अरब को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अतिरिक्त प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य नहीं किया गया है। यह प्रोटोकॉल निरीक्षकों को बिना पहले सूचना दिए उन जगहों तक पहुंच देता है, जिन्हें घोषित नहीं किया गया है। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह समझौता पूरी तरह अमेरिकी परमाणु ऊर्जा कानून का पालन करता है और इसमें परमाणु प्रसार रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय शामिल हैं। 
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सऊदी अधिकारियों ने भी कहा है कि यह समझौता देश में ऊर्जा के स्रोतों को अलग-अलग करने की योजना को तेज करेगा और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों को बनाए रखेगा। यह द्विपक्षीय समझौता '123 समझौते' के रूप में तैयार किया गया है। इसका मकसद अमेरिका की तकनीक से सऊदी अरब में एपी1000 परमाणु रिएक्टरों के निर्माण का रास्ता तैयार करना है।
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