इस्राइली नौसेना ने गाजा की ओर जा रहे 'ग्लोबल सुमूद फ्लोटिला' को रोक लिया और उसमें सवार कई देशों के कार्यकर्ताओं व नेताओं को हिरासत में ले लिया। आयोजकों के मुताबिक, लगभग 40 नौकाओं में से 39 या तो रोकी जा चुकी हैं या फिर उनका संपर्क टूट गया है। केवल एक नाव गाजा के तट के करीब तक पहुंची थी, लेकिन गुरुवार सुबह उसका भी संपर्क खो गया। कार्यकर्ताओं का कहना था कि चूंकि नावों की संख्या अधिक है, इस्राइल के लिए सबको रोकना मुश्किल होगा। बेड़े में 500 से ज्यादा कार्यकर्ता शामिल थे और नावों पर प्रतीकात्मक रूप से मानवीय सहायता सामग्री भी रखी गई थी। सभी नावों से लाइव स्ट्रीमिंग की जा रही थी, लेकिन बुधवार रात से जब इस्राइली नौसेना कार्रवाई शुरू हुई तो सभी नावों का एक-एक कर संपर्क टूटता गया।
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हिरासत में लिए गए सभी कार्यकर्ता और नेता
इस्राइल ने जिन कार्यकर्ताओं को पकड़ा है, उनमें प्रमुख नाम हैं- जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग, बार्सिलोना की पूर्व मेयर एडा कोलाउ, यूरोपीय संसद की सदस्य रीमा हसन और कई अन्य। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो जारी कर कहा कि सभी कार्यकर्ता 'सुरक्षित और स्वस्थ' हैं और उन्हें यूरोप वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
कैसे हुई कार्रवाई?
आधी रात से शुरू हुई इस कार्रवाई में इस्राइली नौसैनिक जहाजों ने कार्यकर्ताओं की नावों पर पानी की तोपें चलाईं और तेज रोशनी डाली। उसके बाद सैनिक नावों पर चढ़ गए। कार्यकर्ताओं ने पहले से तैयारी कर रखी थी- वे लाइफ जैकेट पहनकर गोल घेरे में बैठ गए और हाथ ऊपर उठा दिए। कुछ ने मोबाइल से लाइव प्रसारण किया और फिर अपने फोन समुद्र में फेंक दिए ताकि जब्त न किए जा सकें। सुबह तक ज्यादातर नावें कब्जे में ली जा चुकी थीं। इस दौरान टकराव या हिंसा की बड़ी घटनाएं सामने नहीं आईं।
दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन
फ्लोटिला की नावों को रोके जाने के बाद कई देशों में प्रदर्शन हुए, इस कड़ी में रोम, नेपल्स, इस्तांबुल, एथेंस और ब्यूनस आयर्स की सड़कों पर लोग उतरे और गाजा नाकेबंदी के खिलाफ नारेबाजी की। इटली के सबसे बड़े मजदूर संगठन ने शुक्रवार को एक दिन की हड़ताल की घोषणा भी कर दी है।
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इस्राइली कार्रवाई पर अन्य देशों की प्रतिक्रिया
तुर्की ने इसे 'आतंकवादी कार्रवाई' और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेत्रो ने इस्राइल के राजनयिकों को निष्कासित करने और मुक्त व्यापार समझौते को खत्म करने का एलान किया। वहीं पाकिस्तान ने कहा कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और नागरिकों की जान को खतरा है। मलयेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने कहा कि इस्राइल का रवैया 'दुनिया की अंतरात्मा का अपमान' है।
इटली और फ्रांस ने हालांकि अपने नागरिकों को पहले ही चेतावनी दी थी कि वे इस यात्रा में हिस्सा न लें। दोनों देशों ने कहा है कि वे इस्राइल से अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने पर काम कर रहे हैं। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अपने ही देश की मजदूर यूनियनों पर निशाना साधते हुए कहा कि हड़ताल से फलस्तीनी जनता को तो कोई लाभ नहीं होगा, लेकिन इटली के आम नागरिकों को बहुत दिक्कत झेलनी पड़ेगी।
गाजा में इस्राइली हमले, 41 की मौत
गाजा पट्टी में इस्राइल की सेना ने बुधवार रात और गुरुवार को कई हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 41 फलस्तीनी मारे गए। अस्पतालों ने बताया कि दक्षिणी गाजा में 27, मध्य गाजा में 13 और गाजा सिटी में एक व्यक्ति की मौत हुई। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध खत्म करने के लिए शांति प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि हमास अपने कब्जे में बचे बंधकों को छोड़े, हथियार डाल दे और सत्ता छोड़ दे। इसके बदले इस्राइल युद्ध रोक देगा और फलस्तीनी कैदियों की रिहाई होगी। हालांकि इसमें स्वतंत्र फलस्तीनी राज्य का कोई जिक्र नहीं है। हमास ने कहा है कि कुछ बिंदु स्वीकार्य नहीं हैं और इस पर चर्चा जरूरी है। अब तक इस युद्ध में 66 हजार से ज्यादा फलस्तीनी मारे जा चुके हैं।