मेजर जनरल सामी तुर्गेमान ने आईडीएफ के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर को इस सप्ताह की शुरुआत में एक रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 7 अक्तूबर को हुए नरसंहार से जुड़ी घटनाओं की जांच कैसे की गई और उससे क्या सबक सीखे जा सकते हैं। लेकिन अभी सेना का ध्यान गाजा में चल रहे अभियान पर है। इसी वजह से सेना प्रमुख ने रिपोर्ट पर पूर्ण विचार-विमर्श को बाद की तारीख तक स्थगित करने का निर्णय लिया।
मेजर जनरल सामी तुर्गेमान ने इस सप्ताह की शुरुआत में इस्राइल रक्षा बल (आईडीएफ) के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर को एक रिपोर्ट दी। लेकिन सेना प्रमुख ने रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा करने और उसे जारी करने का फैसला बाद में करने का निर्णय लिया। इसके अलावा, इयाल जमीर ने संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) की कार्यकारी निदेशक सिंडी मैक्केन से मुलाकात की और गाजा में भुखमरी को लेकर चर्चा की।
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तुर्गेमान द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि 7 अक्तूबर को हुए नरसंहार से जुड़ी घटनाओं की जांच कैसे की गई और उससे क्या सबक सीखे जा सकते हैं। लेकिन अभी सेना का ध्यान गाजा में चल रहे अभियान पर है। इसी वजह से सेना प्रमुख ने रिपोर्ट पर पूर्ण विचार-विमर्श को बाद की तारीख तक स्थगित करने का निर्णय लिया। जब हालात सही होंगे, तब यह रिपोर्ट जनरल स्टाफ फोरम के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी और उसमें दिए गए सुझावों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
UN अफसर से मानवीय सहायता पहुंचाने के प्रयासों पर चर्चा
इसके अलावा, आईडीएफ के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल जमीर ने बुधवार (स्थानीय समयानुसार) को संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की कार्यकारी निदेशक सिंडी मैक्केन से मुलाकात की। इस बैठक में क्षेत्रीय गतिविधियों के समन्वयक मेजर जनरल रसन अलियान भी शामिल थे। इसमें गाजा पट्टी में लोगों तक मानवीय सहायता पहुंचाने के प्रयासों पर चर्चा हुई।
आईडीएफ का लक्ष्य भुखमरी रोकना: इयाल जमीर
बैठक में आईडीएफ ने बताया कि गाजा में लोगों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए वे कौन-कौन से कदम उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जमीन पर जो काम हो रहा है, उसका असर हमास द्वारा फैलाए जा रहे झूठे प्रचार से अलग है। आगे की योजनाओं पर भी विस्तार से बात हुई। इस दौरान चीफ ऑफ स्टाफ जमीर ने स्पष्ट किया कि आईडीएफ का लक्ष्य भुखमरी रोकना है और मदद सीधे गाजा की जनता तक पहुंचाना है, न कि हमास के हाथों में जाने देना।