इस्राइली हमले की गुप्त योजना
अमेरिकी रक्षा अधिकारी के अनुसार, इस्राइली जेट्स ने लगभग 1700 किलोमीटर दूर से हमला किया। करीब 10 विमान मिशन में शामिल थे और 10 मिसाइलें दागी गईं। यह हमला उस समय किया गया जब हमास नेता गाजा युद्धविराम प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे थे। अमेरिका ने दावा किया कि जैसे ही उसे हमले की जानकारी मिली, उसने कतर को चेतावनी दी, लेकिन कतर का कहना है कि चेतावनी मिसाइलें गिरने के बाद ही आई।
क्षेत्रीय राजनीति पर असर
खाड़ी देशों की एयर डिफेंस आमतौर पर ईरान से आने वाले हमलों या यमन के हूती विद्रोहियों से निपटने के लिए तैयार रहती है। मिसाइलें पश्चिम से पूर्व की ओर आईं, जिससे कतर और अमेरिका के निगरानी सिस्टम उन्हें पहचान ही नहीं पाए। इस हमले के बाद अन्य खाड़ी देशों को डर है कि भविष्य में उनके शहर भी निशाना बन सकते हैं। खास बात यह है कि यह हमला सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र से होकर नहीं गया, जिससे इस्राइल और सऊदी के संबंध सामान्य करने की संभावनाएं प्रभावित नहीं हुईं।
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मिसाइलों की ताकत और रहस्य
इस्राइल के पास कई प्रकार की एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। इनमें गोल्डन होराइजन और आईएस02 रॉक शामिल हैं। मिसाइल विशेषज्ञों का अनुमान है कि दोहा पर गिराई गई मिसाइल गोल्डन होराइजन या स्पैरो हो सकती है। स्पैरो मिसाइल में विस्फोटक रहित सिरा लगाने का विकल्प होता है। यही वजह हो सकती है कि पास में मौजूद पेट्रोल पंप फटा नहीं, जबकि हमला घातक था। इसकी मारक दूरी 2,000 किलोमीटर तक बताई जाती है। विशेषज्ञ जेफ्री लुईस के अनुसार, 'भले ही वॉरहेड विस्फोटक न हो, उसकी टक्कर इतनी जोरदार होती है कि वह सैकड़ों किलो टीएनटी के बराबर विनाश कर सकता है।'
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युद्ध का बदलता स्वरूप
रूस ने यूक्रेन युद्ध में इसी तरह की मिसाइलों का उपयोग किया है, जिससे उसके विमान सुरक्षित रहते हैं। चीन ने हाल ही में अपने विक्ट्री डे परेड में परमाणु क्षमता वाली एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल का प्रदर्शन किया। इस्राइल ने भी जून 2025 में ईरान पर 12 दिन का युद्ध छेड़ा था, जिसमें इसी प्रकार के 'स्टैंडऑफ वेपन्स' का इस्तेमाल हुआ था।
हमले के बाद इन देशों ने साधी चुप्पी
इस्राइल, कतर और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने इस हमले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। व्हाइट हाउस ने भी टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि इस पर सवाल इस्राइल से पूछे जाएं।