अमेरिका के बाद इस्राइल ने भी संयुक्त राष्ट्र के कई संगठनों से हटने का एलान कर दिया है। इस्राइली विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर इस फैसले की वजह भी बताई। इस्राइल के इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।
अमेरिका के बाद इस्राइल ने भी खुद को संयुक्त राष्ट्र की कई एजेंसियों से अलग कर लिया है। इस्राइल ने अपने इस कदम की वजह बताते हुए कहा कि ये एजेंसियां लगातार उसके प्रति पक्षपात कर रहीं थीं और राजनीति कर रहीं थीं। बीते हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संधियों से अमेरिका को अलग कर लिया था। इनमें से आधे संगठन संयुक्त राष्ट्र के थे। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ये एजेंसियां अमेरिका के हितों के खिलाफ काम कर रही हैं।
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इस्राइली विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर क्या कहा?
इस्राइल के विदेश विभाग ने एक बयान जारी कर कहा, 'अमेरिका के संयुक्त राष्ट्र के कई संगठनों से हटने के बाद हमने भी समीक्षा की। जिसके बाद इस्राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने तय किया कि इस्राइल तुरंत प्रभाव से संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अपने नाते तोड़ रहा है। साथ ही विदेश मंत्री ने मंत्रालय को निर्देश दिया है कि अन्य एजेंसियों के साथ ही संबंधों की समीक्षा की जा रही है और विचार-विमर्श के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा।'
इन संगठनों से इस्राइल ने तोड़ा नाता
इस्राइल ने यूएन के जिन संगठनों से नाता तोड़ा है, उनमें चिल्ड्रन एंड आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट ऑफिस, यूएन वुमन, यूएन कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलेपमेंट, यूएन इकॉनोमिक एंड सोशल कमीशन फॉर वेस्टर्न एशिया, यूएन अलायंस ऑफ सिविलाइजेशन, यूएन एनर्जी और माइग्रेशन एंड डेवलेपमेंट ग्लोबल फोरम जैसे संगठन शामिल हैं।
इस्राइल सरकार ने बताया कि चिल्ड्रन एंड आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट ने इस्राइली सेना को, हमास, फलस्तीन के साथ काली सूची में डाला हुआ है। ऐसे में इस्राइल ने इस संगठन से हटने का फैसला किया है। इस्राइल ने जून 2024 में इस संगठन से रिश्ते तोड़े हुए थे और अब आधिकारिक रूप से इस संगठन से हटने का एलान कर दिया है। यूएन वुमन संगठन द्वारा इस्राइली महिलाओं के साथ हमास द्वारा किए गए यौन शोषण को नजरअंदाज करने के चलते इस्राइल की सरकार ने इस संगठन से हटने का तय किया है।