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US-Iran Deal: इस्राइल के बेरूत हमले से टली अमेरिका-ईरान शांति डील, ट्रंप बोले- कुछ घंटों के लिए रुका समझौता

Mon, 15 Jun 2026 01:17 AM IST
शिवम गर्ग वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

क्या पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लग गया है? अमेरिका और ईरान के बीच जिस समझौते को संघर्ष खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा था, वह इस्राइल के बेरूत हमले के बाद कुछ घंटों के लिए टल गया। डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस देरी की पुष्टि की है, जबकि क्षेत्र में तनाव और अनिश्चितता अभी भी बरकरार है।

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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव को खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते पर हस्ताक्षर कुछ घंटों के लिए टल गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि बेरूत में हिजबुल्ला के ठिकानों पर इस्राइल की ओर से किए गए हमलों के कारण इस प्रक्रिया में देरी हुई।

स्थानीय मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि जब उन्हें बेरूत में इस्राइल की सैन्य कार्रवाई की जानकारी मिली तो वह हैरान रह गए। उन्होंने बताया कि समझौते पर हस्ताक्षर पहले तत्काल होने वाले थे, लेकिन हमले के बाद इसे कुछ घंटों के लिए स्थगित करना पड़ा। ट्रंप के अनुसार, अब इस समझौते पर अगले कुछ घंटों में हस्ताक्षर किए जाने की योजना है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ शांति समझौते पर रविवार को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हस्ताक्षर होंगे, जबकि आमने-सामने की औपचारिक प्रक्रिया एक सप्ताह बाद यूरोप में पूरी की जाएगी।

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ट्रंप ने जताई नाराजगी, नेतन्याहू से की बात
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि वह ईरान के संपर्क सूत्रों से भी बातचीत कर रहे हैं ताकि बेरूत में हुए इस्राइली हमलों के जवाब में ईरान किसी सैन्य प्रतिक्रिया से बचे। ट्रंप ने संकेत दिया कि उन्होंने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ भी इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर की। इससे पहले ट्रंप ने इस्राइल और ईरान दोनों से आगे किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई से बचने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए समझौता बेहद करीब है और ऐसे समय में किसी भी कदम से पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

यह भी पढ़ें:- Explainer: अमेरिका-ईरान के समझौते की शर्तें तय, ट्रंप-मोजतबा में कौन झुक रहा, भारत को कितना फायदा-क्या नुकसान?
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परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दे अभी भी बाकी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने कहा कि क्षेत्र में शांति लाने वाला समझौता लगभग तैयार है और इसे किसी भी हाल में पटरी से नहीं उतरना चाहिए। यह अपील ऐसे समय में आई जब ईरान की ओर से सैन्य प्रतिक्रिया की आशंका जताई जा रही थी। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित समझौता अमेरिका और ईरान के बीच मौजूद सभी विवादों का समाधान नहीं करता। विशेष रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके अरबों डॉलर की फ्रीज हुई संपत्तियों जैसे मुद्दे इसमें शामिल नहीं हैं। हालांकि, यह समझौता तकनीकी स्तर की वार्ताओं के लिए 60 दिनों का एक ढांचा प्रदान करता है, जिसके तहत आगे की बातचीत जारी रह सकेगी।

शांति समझौते में कहां फंस सकता है पेच?
वार्ता से जुड़े विभिन्न पक्षों के सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित समझौता ज्ञापन में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने का प्रावधान है। इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत होगी, जिसे ट्रंप ने युद्ध शुरू करने का मुख्य कारण बताया था। अमेरिकी अधिकारी ने कहा, "ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना होगा, यह एक अनिवार्य शर्त है। यह बिना टोल के भी खुल सकता है। जैसे ही वे ऐसा करेंगे, हम अपनी नाकाबंदी हटा लेंगे।" उन्होंने कहा, "यह प्रक्रिया साथ-साथ चलेगी और इसके अगले चरण में जलडमरूमध्य में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने का काम होगा। इसमें जी-7 देशों की भी भूमिका हो सकती है।"
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ईरान ने रखी समझौते में कौन सी शर्तें?

  • कई सूत्रों द्वारा रॉयटर्स को बताई गई मसौदा शर्तों के अनुसार, अमेरिका ईरान की फ्रीज हुई अरबों डॉलर की संपत्तियों को जारी करना शुरू करेगा और उसके तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील देगा। इसके बदले ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलेगा।
  • ईरान की फार्स समाचार एजेंसी ने बघाई के हवाले से कहा कि ईरान की जब्त की गई संपत्तियों को वापस करना समझौते का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रदान की जाने वाली सेवाओं के लिए शुल्क लेना होगा।
  • फार्स ने यह भी कहा कि बघाई के अनुसार क्षेत्र में विदेशी सैन्य अड्डों का अस्तित्व समाप्त होना चाहिए, हालांकि उन्होंने इस बारे में अधिक विवरण नहीं दिया।
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