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Iran Crisis: 'हमारा निशाना होगा, चाहे जो भी बने सुप्रीम लीडर', मोजतबा खामेनेई को इस्राइली मंत्री की खुली धमकी

Wed, 04 Mar 2026 12:56 PM IST
अमन तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई

सार

ईरान ने मोजतबा खामेनेई को अपना नया सर्वोच्च नेता चुना है। इस पर इस्राइल के रक्षा मंत्री ने कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि इस्राइल को धमकाने वाला कोई भी नया नेता उनके निशाने पर होगा। मोजतबा की नियुक्ति को लेकर ईरान में वंशवाद पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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मोजतबा खामेनेई इस्राइल के निशाने पर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इस्राइल के रक्षा मंत्री ने ईरान की ओर से देश के अगले सर्वोच्च नेता के रूप में चुने जाने वाले किसी भी शख्स को धमकी देते हुए कहा कि वह जो भी हो, हमारा निशाना होगा। रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने बुधवार के एक्स पर एक पोस्ट में यह बयान दिया।
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इस्राइल काट्ज ने क्या कहा?
इस्राइल काट्ज ने लिखा, 'ईरान के आतंकी शासन की ओर से इस्राइल को नष्ट करने, अमेरिका, आजाद दुनिया, क्षेत्र के देशों को धमकाने और ईरानी लोगों को दबाने की योजना को जारी रखने और उसका नेतृत्व करने के लिए नियुक्त किया गया हर नेता हमारा निशाना बनेगा।'

मोजतबा ईरान के नए सुप्रीम लीडर
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अस्थिरता के बीच ईरान की सत्ता को लेकर अहम घटनाक्रम सामने आया है। तेहरान स्थित असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुने जाने की घोषणा की है। मोजतबा, दिवंगत पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बड़े बेटे हैं।
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हाल में अमेरिका और इस्राइल के हमलों में अली खामेनेई की मौत के बाद से नए नेतृत्व को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। कहा जा रहा है कि मोजतबा को ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का समर्थन हासिल था, जिसने उनकी दावेदारी को मजबूत किया, हालांकि वे किसी प्रमुख धार्मिक पद पर नहीं रहे हैं।

आईआरजीसी के प्रभाव में हुआ चयन
मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि उनका चयन आईआरजीसी के प्रभाव में हुआ। मोजतबा की नियुक्ति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने लंबे समय से वंशवाद की आलोचना की है और खुद को एक सिद्धांत आधारित व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत किया है।
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यह भी सामने आया है कि बीते वर्ष अली खामेनेई ने संभावित उत्तराधिकारियों की सूची में मोजतबा का नाम शामिल नहीं किया था। वहीं, शिया धार्मिक परंपरा में सत्ता का पिता से पुत्र को हस्तांतरण आम तौर पर स्वीकार्य नहीं माना जाता, जिससे यह फैसला और अधिक चर्चा का विषय बन गया है।

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