एयर इंडिया की इस फ्लाइट के लिए सऊदी अरब ने 70 साल बाद अपना एयर स्पेस बैन हटाया है। इसराइल को सऊदी अरब मान्यता नहीं देता है और न ही वो उसे अपना एयर स्पेस इस्तेमाल करने की अनुमति देता है। इस तरह इसराइल के लिए जाने वाली कोई भी फ्लाइट सऊदी अरब के ऊपर से नहीं गुजरती है। इस वजह से इसराइल की एल-अल एयरलाइन को ईंधन के लिए ज्यादा खर्च उठाना पड़ता है और वक्त भी अधिक लगता है।
एल-अल एयरलाइन की दलील
एयरलाइन कंपनी ने एयर इंडिया की फ्लाइट को मंजूरी देने के लिए इसराइल सरकार को भी इस मामले में पार्टी बनाया है। कंपनी का कहना है कि इस पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण उन्हें भारी नुकसान हो सकता है। हालांकि कंपनी ने
कोर्ट में दी अपनी याचिका में एयर इंडिया की फ्लाइट पर रोक लगाने की मांग नहीं की है। लेकिन ये जरूर कहा है कि किसी नई फ्लाइट को ये रूट इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। एल-अल एयरलाइन के अधिकारियों का कहना है कि अगर कोर्ट इस मामले में कोई आदेश जारी करता है तो इसका असर एयर इंडिया पर भी होगा। इस मामले में अब इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन से भी टिप्पणी देने को कहा गया है।