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मुश्किल में इस्राइली पीएम!: न्यायपालिका में विवादित बदलाव को लेकर राष्ट्रपति भी नेतन्याहू के खिलाफ, की ये अपील

Mon, 27 Mar 2023 02:13 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, येरुशलम

सार

राष्ट्रपति की यह अपील ऐसे समय में आई है, जब एक दिन पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस योजना का विरोध करने पर अपने रक्षा मंत्री योआव गैलेंट को बर्खास्त कर दिया था। 
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इस्राइल में प्रदर्शन जारी। - फोटो : Social Media
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विस्तार
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इस्राइल में न्यायपालिका में आमूल-चूल बदलावों की नेतन्याहू सरकार की योजना पर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। हाल ही में इस इस योजना के खिलाफ बयान देने वाले रक्षा मंत्री को पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने बर्खास्त कर दिया था। हालांकि, अब इस्राइल के राष्ट्रपति इसाक हरजोग ने इस्राइली पीएम से इस विवादित योजना को तत्काल रोकने की अपील की है। हर्जोग ने चेतावनी दी कि इस योजना की वजह से देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और समाज भी खतरे में पड़ चुके हैं।
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राष्ट्रपति की यह अपील ऐसे समय में आई है, जब एक दिन पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस योजना का विरोध करने पर अपने रक्षा मंत्री योआव गैलेंट को बर्खास्त कर दिया था। 
गैलेंट ने नेतन्याहू के न्यायपालिका में बदलाव की योजना को देश की सुरक्षा के लिए खतरा करार दिया था। 

हालांकि, नेतन्याहू के रक्षा मंत्री को बर्खास्त करने के फैसले के खिलाफ इस्राइल की सड़कों पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी उतर आए। इसी के मद्देनजर हर्जोग ने सरकार से देश के लिए राजनीतिक मतभेदों को दूर रखने की भी अपील की। उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘पिछली रात हमने बहुत मुश्किल हालात देखे। मैं प्रधानमंत्री, सरकार के सदस्यों और गठबंधन के सदस्यों से अपील करता हूं कि कुछ भावनाएं आहत हुई हैं। पूरा देश गहरी चिंता में डूबा हुआ है। हमारी सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, समाज- सभी खतरे में हैं। इस्राइल के सभी लोग उम्मीद भरी निगाहों से आपको देख रहे हैं। सभी यहूदी लोग आपसे उम्मीद लगाए बैठे हैं। पूरी दुनिया को आपसे उम्मीद है।’’
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राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘इस्राइल के लोगों की एकता, जरूरी जिम्मेदारी के लिए, मैं आपसे विधायी प्रक्रिया तत्काल रोकने की अपील करता हूं।’’ उन्होंने सत्ता में बैठे सभी नेताओं से देश के नागरिकों को सर्वोपरि रखने का आग्रह किया।

दुनियाभर में यहूदी समुदाय कर रहा विवादित योजना का विरोध
न्यायपालिका में बदलाव की सरकार की योजना का न केवल इस्राइल में विरोध हो रहा है, बल्कि नेतन्याहू की इटली, जर्मनी और ब्रिटेन की यात्रा के दौरान भी यहूदी प्रवासी समुदाय के हजारों लोगों ने इसका विरोध किया था। इन प्रदर्शनों ने कारोबारी नेताओं, पूर्व सुरक्षा प्रमुखों तथा इस्राइल के करीबी सहयोगी अमेरिका को भी चिंतित कर दिया है।

क्या हैं बदलाव जिन पर जारी है विवाद?
दरअसल, नेतन्याहू की सरकार इस सप्ताह ऐसे विधेयक पर संसद में मतदान कराने की योजना बना रही है जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन को न्यायिक नियुक्तियों पर अंतिम मुहर लगाने की शक्ति मिल जाएगी। इसमें ऐसे कानून पारित करने का भी प्रावधान है जिससे संसद को आम बहुमत के साथ उच्चतम न्यायालय के फैसलों को पलटने तथा कानूनों की न्यायिक समीक्षा सीमित करने का अधिकार मिल जाएगा।

नेतन्याहू तथा उनके सहयोगियों का तर्क है कि इस योजना से न्यायिक तथा कार्यकारी शाखाओं के बीच संतुलन बहाल होगा। लेकिन आलोचकों का कहना है कि ये कानून इजराइल की लोकतांत्रिक व्यवस्था में संतुलन बिगाड़ देगा और सत्तारूढ़ गठबंधन के हाथ में शक्तियां सौंप देगा। उनका यह भी कहना है कि ये कानून भ्रष्टाचार के मुकदमे का सामना कर रहे नेतन्याहू के लिए हितों का टकराव भी है।
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