इस्राइल में चुनाव से पहले अरब-इस्लामी नेता मंसूर अब्बास ने यहूदी नेता योआव सेगालोवित्ज को साथ लेकर नई सियासी चाल चली है। पहली बार किसी मुख्यधारा की इस्लामी पार्टी और यहूदी नेता ने मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। नेतन्याहू के खिलाफ बना यह गठबंधन कितना असर दिखा पाएगा? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
इस्राइल में इन दिनों एक ऐसे गठबंधन की चर्चा जोरों पर है, जिसने देशभर में सियासी हलचल मचा दी है। 27 अक्तूबर को होने जा रहे आम चुनावों से ठीक पहले एक अरब-इस्लामी नेता और एक यहूदी पूर्व-पुलिस कमांडर ने हाथ मिलाकर बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यह चाल मंसूर अब्बास ने चली है जो पेशे से डेंटिस्ट रहे हैं और अब अरब पार्टी राअम के प्रमुख हैं। अब्बास ने 2021 में इस्राइल की नफ्ताली बेनेट सरकार में शामिल हो नेतन्याहू को सत्ता से बेदखल करने में मुख्य भूमिका निभाई थी।
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यहूदी सांसद को बढ़ाया आगे: अब्बास ने इस बार वाम-मध्यमार्गी यहूदी सांसद योआव सेगालोवित्ज को अपनी पार्टी की उम्मीदवार सूची में दूसरे नंबर पर जगह दी है। इस्राइल में यह पहला मौका है, जब किसी मुख्यधारा की इस्लामी पार्टी और यहूदी नेता ने एक साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
लेकिन रास्ता चुनौतियों भरा
नए गठबंधन की राह इतनी आसान भी नहीं है। सेगालोवित्ज अरबी नहीं जानते और अब्बास जहां सामाजिक रूप से रूढ़िवादी हैं, वहीं सेगालोवित्ज उदारवादी विचारों के हैं।
सरकार के निशाने पर आए
चुनावी अभियान में अब्बास मुख्य निशाना बने हुए हैं। नेतन्याहू यहूदी मतदाताओं को आगाह कर रहे हैं कि अगर वह हारे, तो सरकार की असली कमान अब्बास के हाथ होगी।