लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम जल्द वॉशिंगटन दौरे पर जाएंगे, जहां इस्राइल के साथ संभावित सीधी बातचीत पर चर्चा हो सकती है। इस्राइल ने हिजबुल्ला के खिलाफ हमले तेज कर दिए हैं और लेबनान में 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका-ईरान संघर्षविराम के बावजूद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
लेबनान और इस्राइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। नवाफ सलाम आने वाले दिनों में वॉशिंगटन का दौरा करने वाले हैं। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब इस्राइल ने लेबनान से सीधे बातचीत की पहल की है। इससे क्षेत्र में शांति और टकराव दोनों की संभावनाएं एक साथ बढ़ गई हैं।
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बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला एक नाजुक संघर्षविराम के बीच सामने आया है, जो अमेरिका और ईरान के बीच हुआ है। हालांकि यह सीजफायर अभी भी बना हुआ है, लेकिन लेबनान में जारी हमलों को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। इस्राइल लगातार हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमले कर रहा है।
क्या इस्राइल-लेबनान के बीच सीधे बातचीत की तैयारी हो रही है?
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि लेबनान में कोई सीजफायर नहीं है। उन्होंने कहा कि हिजबुल्ला के खिलाफ पूरी ताकत से कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही उन्होंने अपनी कैबिनेट को लेबनान के साथ सीधे बातचीत शुरू करने का आदेश दिया है। उनका कहना है कि इस बातचीत का मकसद हिजबुल्ला को निरस्त्र करना और एक ऐतिहासिक शांति समझौता करना है।
क्या हमलों के बीच बढ़ रहा है तनाव और मौतों का आंकड़ा?
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्राइल ने हाल के दिनों में लेबनान में बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। इन हमलों में कम से कम 300 लोगों की मौत की खबर है। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है। लगातार हो रहे हमलों से यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह संघर्ष और बड़ा रूप ले सकता है।
क्या संघर्षविराम के दायरे में आता है लेबनान का मामला?
अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्षविराम को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ईरान का कहना है कि इस समझौते में लेबनान में इस्राइली कार्रवाई भी शामिल है और उसे रुकना चाहिए। वहीं इस्राइल इस बात को मानने को तैयार नहीं है और अपने सैन्य अभियान को जारी रखे हुए है।
क्या हिजबुल्ला को खत्म करने की दिशा में बढ़ रहा है इस्राइल?
इस्राइल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने भी साफ किया है कि उसने हिजबुल्ला के लॉन्च साइट्स पर नए हमले शुरू कर दिए हैं। इन हमलों का मकसद संगठन की सैन्य ताकत को कमजोर करना है। लगातार हो रहे हमलों और बातचीत की पहल के बीच यह साफ नहीं है कि आगे शांति होगी या संघर्ष और बढ़ेगा।