ईरान अपने सुप्रीम नेता खामेनेई की मौत के बाद तिलमिलाया हुआ है। इस्राइल के अलावा खाड़ी देशों में स्थिति अमेरिकी बेस पर ईरान के लगातार हमले जारी है। शुरुआती 30 घंटे में ईरान पर 2 हजार से ज्यादा बम गिराए गए। इसी के साथ एक हजार से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया। वहीं ईरान में मरने वालों का आंकड़ा 742 हो गया। इस बीच इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर बड़ा एलान किया है।
युद्ध को लेकर नेतन्याहू का बड़ा एलान
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई त्वरित और निर्णायक होगी और इसे वर्षों तक चलने वाले युद्ध में बदलने का इरादा नहीं है। उन्होंने यह बयान फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में दिया। नेतन्याहू ने कहा कि मौजूदा सैन्य टकराव को इस्राइल अंतहीन संघर्ष में बदलना नहीं चाहता। उनका कहना था कि यह अभियान क्षेत्रीय स्थिरता और शांति की दिशा में एक रास्ता खोल सकता है।
नेतन्याहू के अनुसार यह कोई अंतहीन युद्ध नहीं है, बल्कि क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में एक कदम है। नेतन्याहू ने फॉक्स न्यूज को बताया कि मौजूदा संघर्ष इस क्षेत्र के देशों के साथ इस्राइल के संबंधों को सामान्य बनाने वाले और अधिक समझौतों का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
नेतन्याहू ने और क्या कहा?
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस्राइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला इसलिए किया क्योंकि तेहरान का परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम कुछ महीनों में अजेय हो जाता। उनका दावा है कि अगर अभी कार्रवाई नहीं की जाती तो भविष्य में कोई कदम उठाना संभव नहीं रहता।
नेतन्याहू ने कहा कि पिछले साल जून में 12 दिन की जंग के दौरान ईरान के परमाणु और मिसाइल ठिकानों पर हमला किया गया था। इसके बाद ईरान ने नए भूमिगत बंकर और ठिकाने बनाना शुरू कर दिया। उनके मुताबिक ये ऐसे सुरक्षित अड्डे थे जो जल्द ही किसी भी हमले से सुरक्षित हो जाते। इसलिए इस्राइल और अमेरिका ने तत्काल संयुक्त कार्रवाई की।
हमला क्यों बताया गया जरूरी
नेतन्याहू ने कहा कि ईरान तेजी से अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा था। उनका आरोप है कि तेहरान भूमिगत ठिकानों में मिसाइल और परमाणु क्षमता को छिपा रहा था। उन्होंने कहा कि अगर अभी कदम नहीं उठाया जाता तो आगे चलकर ईरान को रोकना असंभव हो जाता।
अनंत युद्ध से किया इनकार
इस्राइली प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि यह कोई अंतहीन युद्ध नहीं होगा। उनका कहना है कि ईरान की मौजूदा सरकार अपनी स्थापना के बाद से सबसे कमजोर स्थिति में है। उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई तेज और निर्णायक होगी।
नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका-इस्राइल की संयुक्त कार्रवाई ईरान में शासन परिवर्तन की स्थिति पैदा कर सकती है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम एशिया की 95 प्रतिशत समस्याएं ईरान से जुड़ी हैं। उनके अनुसार अगर मौजूदा शासन गिरता है तो इस्राइल और अरब देशों के बीच नए शांति समझौते हो सकते हैं।
ट्रंप पर टिप्पणी
नेतन्याहू ने इस आरोप को खारिज किया कि इस्राइल ने अमेरिका को युद्ध में घसीटा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप दुनिया के मजबूत नेता हैं और वही करते हैं जो उन्हें अमेरिका के हित में सही लगता है। नेतन्याहू का दावा है कि ट्रंप ईरान से जुड़े खतरे को समझते हैं और इसी वजह से कार्रवाई हुई।
ईरान पर इस्राइल का रुख
इस्राइल प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि इस्राइल ईरान के साथ लंबे युद्ध में उलझना नहीं चाहता। उन्होंने दोहराया कि सत्ता परिवर्तन की अंतिम जिम्मेदारी ईरान की जनता की है, लेकिन अमेरिका और इस्राइल मिलकर ऐसी परिस्थितियां बना रहे हैं, जिससे वहां के लोग अपने भविष्य को लेकर निर्णय ले सकें। इस्राइल का दावा है कि मौजूदा सैन्य अभियान सीमित समय तक चलेगा और इसे लंबी अवधि की प्रक्रिया में बदलने की योजना नहीं है।
ये भी पढ़ें: US-Israel-Iran War: रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला, ट्रंप बोले- जल्द देंगे जवाब; पढ़ें जंग के अपडेट्स
ईरान जंग पर जेडी वेंस का बयान
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उन आरोपों को खारिज किया है, जिनमें कहा जा रहा था कि ट्रंप अपने 'अंतहीन युद्धों से बचने' के वादे से पीछे हट रहे हैं। फॉक्स न्यूज से बातचीत में वेंस ने कहा कि ईरान पर कार्रवाई इराक और अफगानिस्तान के युद्धों से अलग है, क्योंकि इसका उद्देश्य स्पष्ट रूप से तय किया गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिका को बिना किसी लक्ष्य के वर्षों तक चलने वाले संघर्ष में नहीं झोंकेंगे। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
अन्य वीडियो