6. ईरान के विदेश मंत्री की जेनेवा में यूरोपीय देशों से बातचीत
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर में यूरोप के तीन देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने यह जानकारी दी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह बैठक हमारे सबसे करीबी सहयोगी के साथ बातचीत जारी रखने" का अवसर होगी। माना जा रहा है कि इस बातचीत का मकसद ईरान और पश्चिमी देशों के बीच जारी तनाव को कम करना है।
7. ईरान के हमले में इस्राइल का बड़ा अस्पताल क्षतिग्रस्त
दक्षिण इस्राइल के शहर बीयर शेवा में स्थित सोरोका मेडिकल सेंटर, जो एक प्रमुख अस्पताल है, ईरान के मिसाइल हमलों में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस हमले के बाद इस्राइल के रक्षा मंत्री इसराइल कात्ज और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सेना को ईरान के अहम ठिकानों पर जवाबी हमले तेज करने के निर्देश दिए हैं। नेतन्याहू ने कहा कि इसका मकसद ईरान की सत्ता को अस्थिर करना और बाकी खतरों को खत्म करना है।
8. ईरान के अराक न्यूक्लियर प्लांट पर हमला
ईरान की एटॉमिक एनर्जी ऑर्गनाइजेशन ने पुष्टि की है कि अराक स्थित शहीद खोंदाब हैवी वॉटर कॉम्प्लेक्स और उसके रिसर्च रिएक्टर पर हमला हुआ है। संस्था ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया, जो परमाणु ठिकानों पर हमले को रोकते हैं। हालांकि संगठन ने स्पष्ट किया कि यह परमाणु सुविधा फिलहाल चालू नहीं थी, इसलिए रेडियोधर्मी असर की कोई आशंका नहीं है। ईरान ने इस हमले के लिए इस्राइल को जिम्मेदार ठहराया है।
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9. नेतन्याहू बोले- इस संघर्ष में अमेरिका दे रहा मदद
इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि अमेरिका, ईरान के खिलाफ चल रहे संघर्ष में इस्राइल की काफी मदद कर रहा है। बेयर शेवा के सोरोका मेडिकल सेंटर के दौरे के दौरान उन्होंने सीएनएन से कहा कि अमेरिका इस्राइल के शहरों और आसमान की रक्षा में भागीदार है और यह सहयोग बेहद सराहनीय है।
10. संघर्ष को लेकर बातचीत जारी, ईरान ने रखी शांति की शर्त
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची के बीच पिछले हफ्ते शुरू हुए संघर्ष के बाद से कई बार बातचीत हुई है। अराकची ने साफ कहा कि जब तक इज़राइल हमले नहीं रोकता, ईरान कोई बातचीत नहीं करेगा।
इसके साथ ही तेहरान से जुड़े एक राजनयिक ने बताया कि अराकची ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका इज़राइल पर युद्ध रोकने का दबाव बनाए, तो ईरान परमाणु मुद्दे पर लचीलापन दिखा सकता है। इससे संघर्ष को शांतिपूर्ण समाधान मिलने की उम्मीद बढ़ी है।