Conflict: क्यों ईरान के भूमिगत परमाणु ठिकानों को छू नहीं सका इस्राइल, तबाही के लिए US से कौन सा हथियार मांगा?
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 19 Jun 2025 12:04 PM IST
सार
इस्राइल के हमले में ईरान के जिन दो प्रमुख परमाणु ठिकानों को नुकसान न पहुंचने की बात हो रही है, वह कौन से हैं? इस्राइल की एयरस्ट्राइक के बावजूद इनमें तबाही क्यों नहीं मची? खासकर फोरडाओ कितनी सुरक्षित है? इसके अलावा इस्राइल ने जो 'खास हथियार' अमेरिका से मांगा है, वह क्या है और कितना खतरनाक है? आइये जानते हैं...
इस्राइल और ईरान के बीच संघर्ष अब अपने चरम पर है। इस बीच दोनों देशों के बीच जंग छिड़ने के आसार नजर आने लगे हैं। दरअसल, इस्राइल ने ईरान में परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने के साथ उसके सैन्य अधिकारियों पर भी हमले किए हैं। इसमें ईरान के सेना प्रमुख और वायुसेना प्रमुख के साथ ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के प्रमुख की भी जान गई है। दूसरी तरफ ईरान ने भी इस्राइल पर ड्रोन्स और बैलिस्टिक मिसाइलों के जरिए जबरदस्त हमला बोला है और उसके कई अहम ठिकानों को तबाह किया है। इस पूरे संघर्ष में अब अमेरिका के जुड़ने के भी आसार लगाए जा रहे हैं। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनका प्रशासन अब संघर्षविराम के लिए नहीं, बल्कि अंत के लिए काम कर रहा है।
इस्राइल ने शुक्रवार (13 जून) को जब ईरान पर हमले शुरू किए थे, तब उसने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों- नतांज, फोरडाओ और इशाफान स्थित परमाणु परिसर को निशाना बनाने की कोशिश की थी। इनमें अब तक जो सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं, उनमें नतांज में जमीन से ऊपर बने कुछ ठिकानों को नुकसान की पुष्टि हुई है। हालांकि, अंडरग्राउंड ठिकाने सुरक्षित बताए गए हैं। वहीं, फोरडाओ में कोई नुकसान की खबर नहीं आई। इशफान को कुछ नुकसान की बात सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के मुताबिक, उसे फिलहाल ईरान में कहीं रेडिएशन फैलने के सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि, उसने निगरानी जारी रखी है।
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इस्राइल ने 13 जून को ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया था।
- फोटो : अमर उजाला
इस्राइल और ईरान के बीच संघर्ष अब अपने चरम पर है। इस बीच दोनों देशों के बीच जंग छिड़ने के आसार नजर आने लगे हैं। दरअसल, इस्राइल ने ईरान में परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने के साथ उसके सैन्य अधिकारियों पर भी हमले किए हैं। इसमें ईरान के सेना प्रमुख और वायुसेना प्रमुख के साथ ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के प्रमुख की भी जान गई है। दूसरी तरफ ईरान ने भी इस्राइल पर ड्रोन्स और बैलिस्टिक मिसाइलों के जरिए जबरदस्त हमला बोला है और उसके कई अहम ठिकानों को तबाह किया है। इस पूरे संघर्ष में अब अमेरिका के जुड़ने के भी आसार लगाए जा रहे हैं। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनका प्रशासन अब संघर्षविराम के लिए नहीं, बल्कि अंत के लिए काम कर रहा है।
इस्राइल ने शुक्रवार (13 जून) को जब ईरान पर हमले शुरू किए थे, तब उसने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों- नतांज, फोरडाओ और इशाफान स्थित परमाणु परिसर को निशाना बनाने की कोशिश की थी। इनमें अब तक जो सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं, उनमें नतांज में जमीन से ऊपर बने कुछ ठिकानों को नुकसान की पुष्टि हुई है। हालांकि, अंडरग्राउंड ठिकाने सुरक्षित बताए गए हैं। वहीं, फोरडाओ में कोई नुकसान की खबर नहीं आई। इशफान को कुछ नुकसान की बात सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के मुताबिक, उसे फिलहाल ईरान में कहीं रेडिएशन फैलने के सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि, उसने निगरानी जारी रखी है।
दूसरी तरफ ईरान के परमाणु ठिकानों, जिनमें फोरडाओ प्रमुख है, उसे नुकसान न पहुंचने की खबरों के बाद इस्राइल ने अमेरिका से मदद मांगी है। रिपोर्ट्स की मानें तो इस्राइल ने अमेरिका से एक खास हथियार- 'बंकर बस्टर बम' (Bunker Buster Bomb) भेजने की मांग की है। माना जा रहा है कि अमेरिका इस बम को सीधे तौर पर इस्राइल को देने की जगह ईरान पर खुद इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर इस्राइल के हमले में ईरान के जिन दो प्रमुख परमाणु ठिकानों को नुकसान न पहुंचने की बात हो रही है, वह कौन से हैं? इस्राइल की एयरस्ट्राइक के बावजूद इनमें तबाही क्यों नहीं मची? खासकर फोरडाओ कितनी सुरक्षित है? इसके अलावा इस्राइल ने जो 'खास हथियार' अमेरिका से मांगा है, वह क्या है और कितना खतरनाक है? आइये जानते हैं...
इस्राइल के हमले के बाद कितने सुरक्षित हैं ईरान के परमाणु ठिकाने?
1. नतांज परमाणु केंद्र
आईएईए के प्रमुख राफेल ग्रोसी के मुताबिक नतांज में ईरान अपने यूरेनियम के संवर्धन का मुख्य काम करता है। यहां इस्राइल के हमले में जमीन के ऊपर बनी इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, जमीन के नीचे बने परमाणु केंद्रों पर निशाना नहीं लगा है। ग्रोसी के मुताबिक, संवर्धन प्लांट के पास अंडरग्राउंड बने हॉल पर किसी तरह के हमले की बात भी सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि इस्राइल की सेना ने शुक्रवार को अपने हमले के बाद कहा था कि ईरान के जमीन के नीचे के ठिकानों को भी उसके बमों से नुकसान हुआ है। ईरान के नतांज परमाणु केंद्र को बिजली मुहैया कराने वाले कुछ सबस्टेशनों को जरूर नुकसान हुआ है।
बताया जाता है कि नतांज में दो परमाणु केंद्र हैं। इनमें मुख्य साइट पर संवर्धन प्लांट जमीन से 40 फीट तक नीचे है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि नतांज में इस केंद्र को तबाह करना आसान नहीं है और इस्राइल की सिर्फ 1.8 टन वाली रॉक्स मिसाइल और 1.6 टन वाली एयर लोरा मिसाइलों के एक के बाद एक कई वार ही नतांज को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
2. फोरडाओ परमाणु केंद्र
फोरडाओ ईरान का सबसे सुरक्षित परमाणु केंद्र है, जिसे पहाड़ों के बीच जमीन के कई मीटर अंदर बनाया गया है। अपनी लोकेशन की वजह से यह क्षेत्र काफी सुरक्षित है और इस पर सीधा हमला काफी मुश्किल और नुकसान न पहुंचाने वाला साबित हुआ है। आईएईए के ही मुताबिक, एक बड़े पहाड़ के 250 से 300 फीट नीचे मौजूद इस परमाणु केंद्र को बिल्कुल नुकसान नहीं दिख रहा। एजेंसी का कहना है कि ईरान इन्हीं दोनों परमाणु केंद्रों में 408.6 किलोग्राम यूरेनियम को 60 फीसदी तक संवर्धित कर चुका है और अगर संवर्धन जारी रहा तो उसके पास जल्द एक परमाणु बम होगा।
इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी के विशेषज्ञ डेविड एल्ब्राइट के मुताबिक, फोरडाओ ईरान का सबसे ज्यादा सुरक्षित परमाणु ठिकाना है और अगर यह अकेले भी काम करता रहा, तो यह अगले साल के पहले महीने तक ही हथियार बनाने लायक यूरेनियम संवर्धन को अंजाम दे सकता है। इससे नौ परमाणु बम तैयार हो सकते हैं। बताया जाता है कि फोरडाओ परमाणु केंद्र इतना सुरक्षित है कि इस्राइल के पास मौजूद कोई भी हथियार इसे भेद नहीं सकता। माना जाता है कि इसे सिर्फ अमेरिका के जीबीयू 57/बी बंकर बस्टर बमों के जरिए तबाह किया जा सकता है। यह बम इतने भारी हैं कि इन्हें ले जाने के लिए बी-2 बॉम्बर विमान लगाने पड़ते हैं।
क्या है बंकर बस्टर बम, जिसे अमेरिका से मांग रहा है इस्राइल?
फोरडओ के पारंपरिक हथियारों से सुरक्षित होने के चलते ही इस्राइल ने अमेरिका से उसका जीबीयू-57ए/बी ऑर्डनेंस पेनिट्रेटर मांगा है। इसे ही बंकर ब्लास्टर बम कहा जाता है। यह अमेरिकी वायुसेना का सबसे ताकतवर गैर-परमाणु ताकत वाला बम कहा जाता है। यह बम इतना बड़ा है कि इसे सिर्फ अमेरिका के बी-2 बॉम्बर विमान से ही लॉन्च किया जा सकता है। चूंकि यह बम जीपीएस के जरिए किसी भी ठिकाने तक खुद पहुंचकर उसे नष्ट कर सकता है, इसलिए इसे काफी खतरनाक माना जाता है। यह बम जमीन के कई फीट नीचे भी अहम ठिकानों को खत्म कर सकता है।
अमेरिका का यह बंकर बस्टर बम जमीन के कई फीट नीचे तक निशाने को तबाह करने में सक्षम है। हालांकि, इसका वजन ज्यादा होने की वजह से इसे सिर्फ बी-2 बॉम्बर विमान ही ले जा सकता है, जो कि अमेरिका के पास सिर्फ 19 ही बचे हैं। इस बम को इस्तेमाल करने में एक बड़ी समस्या यह है कि बी-2 बॉम्बर आधुनिक लड़ाकू विमानों के मुकाबले काफी बड़े और कम गति वाले हैं। ऐसे में इनकी पहचान कर इन्हें डॉगफाइट में धकेले जाने का खतरा भी पैदा हो सकता है।
इन बमों की कम आपूर्ति भी अमेरिका के लिए बड़ी समस्या है। दरअसल, इन्हें बनाना मुश्किल है और 2015 तक बोइंग ऐसे 20 बम ही अमेरिकी वायुसेना को डिलीवर कर पाया था। इस दिक्कत के चलते ही अमेरिकी अधिकारी बंकर ब्लास्टर बम का निर्माण नहीं बढ़ा सके हैं। हालांकि, रूस, चीन और ईरान की तरफ से जमीन के कई फीट नीचे बंकर बनाने की वजह से अब अमेरिका इन बमों का उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
ईरान ने भी की है बंकर बस्टर बमों को नाकाम करने की तैयारी?
2023 में एक रिपोर्ट में सामने आया था कि ईरान का नतांज परमाणु केंद्र पहले ही हमले के खतरों को भांपते हुए जमीन के नीचे कई बड़े बदलाव कर चुका है। इससे इस केंद्र के अब अमेरिका के बंकर बस्टर बमों की पहुंच से भी दूर होने की संभावना पैदा हो गई है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि इस्राइल अगर अमेरिका से इन बमों को पा भी जाता है तो वह ईरान को कितना नुकसान पहुंचा पाएगा।