यरुशलम में तनाव की वजह से इस्राइल और गाजा पट्टी के बीच शनिवार (24 अप्रैल) को हिंसा भड़क गई। इस दौरान फलस्तीनी उग्रवादियों ने कम से कम 30 रॉकेट दागे, जबकि इस्राइल ने गाजा के हमास द्वारा शासित ठिकानों को निशाना बनाया। बता दें कि यरुशलम में हाल के दिनों में झड़पों में बढ़ोतरी हुई है, जो इस्राइल-फलस्तीन में लंबे समय से टकराव का मुख्य केंद्र रहा है। गौरतलब है कि यहीं पर यहूदियों, ईसाइयों और मुस्लिमों के पवित्र स्थल भी हैं। यरुशलम के निवासियों ने हिंसा भड़कने की आशंका जाहिर की है। वहीं, अमेरिकी दूतावास ने शांति की अपील की है।
इस्राइल पुलिस ने शुक्रवार को बताया था कि यरुशलम में रात में हुई हिंसा के मामले में 44 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसमें 20 अधिकारी जख्मी हो गए। बता दें कि रमजान में पाबंदियां लगाने से नाराज फलस्तीनियों और अरब विरोधी मार्च निकालने वाले चरमपंथी यहूदियों के साथ यरुशलम में सुरक्षा बलों की झड़प हुई।
यरुशलम में हुई घटनाओं ने गाजा को भड़का दिया। हमास की सशस्त्र इकाई ने इज़राइल को चेताया कि वह उसके सब्र का इम्तिहान न ले। इसके बाद फलस्तीनी एनक्लेव से शुक्रवार देर रात दक्षिणी इस्राइल पर रॉकेट दागे गए। यह सिलसिला शनिवार सुबह तक जारी रहा।
इस्राइल की सेना ने कहा कि उसके विमानों और टैंकों ने भी रॉकेट दागे। हमास ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन वामपंथी पॉपुलर फ्रंट फॉर लिबरेशन ऑफ फलस्तीन से संबद्ध छोटी सैन्य इकाई ने कहा कि उसने कुछ मिसाइलें दागी हैं।
कोरोना वायरस महामारी को रोकने के लिए हमास द्वारा लगाए गए रात्रि कर्फ्यू को तोड़ते हुए भोर में सैड़कों लोग यरुशलम में अपने साथी फलस्तीनियों के समर्थन में सड़कों पर उतरे और टायर जलाए। अंदेशा था कि यरुशलम में स्थित मस्जिद ए अक्सा में शुक्रवार दोपहर की नमाज के बाद हिंसा भड़क सकती है, लेकिन मुस्लिम धार्मिक नेताओं की संयम की। इसके बाद लोग शांतिपूर्ण तरीके से लौट गए।