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Israeli Palestinian conflict: हमास ने क्यों किया इस्राइल पर हमला, कितना पुराना है फिलिस्तीन-इस्राइल संघर्ष?

सार

 Israel Palestine Conflict: फिलिस्तीन के सशस्त्र संगठन हमास ने इस्राइल के खिलाफ 'ऑपरेशन अल-अक्सा फ्लड' शुरू किया है। हमास का दावा है कि उसने पांच हजार से ज्यादा रॉकेट दागे हैं, वहीं इस्राइल ने इस बात की पुष्टि की है कि हमास के लड़ाके उसके कब्जे वाले इलाकों में घुस गए हैं।  
 
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Israel Map - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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इस्राइल और फिलिस्तीन संगठन हमास के बीच एक बार फिर टकराव बढ़ गया है। हमास के रॉकेट हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों लोगों के घायल होने की सूचना है। हमास के हमले के बाद इस्राइल ने भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है। इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतेन्याहू ने कहा है कि हम युद्ध में हैं। ये पहला मौका नहीं है जब इस्राइल और हमास आमने-सामने आए हैं। पहले भी कई मौकों पर दोनों के बीच टकराव होता रहा है। 
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ताजा संघर्ष की शुरुआत कहां से हुई? हमले कहां हुए हैं? अब तक इनसे कितना नुकसान हो चुका है? हमास के ताजा हमले की वजह क्या है? हमलों पर इस्राइली सरकार का क्या रुख है? दोनों के बीच संघर्ष का क्या इतिहास है? सात दशक पुराने इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष की वजह क्या है? आइये जानते हैं...

ताजा संघर्ष की शुरुआत कहां से हुई? 
फिलिस्तीन के सशस्त्र संगठन हमास ने इस्राइल के खिलाफ 'ऑपरेशन अल-अक्सा फ्लड' शुरू किया है। मई 2021 में दोनों के बीच 11 दिन चले युद्ध के बाद सबसे बड़ा टकराव है। हमास का दावा है कि उसने पांच हजार से ज्यादा रॉकेट दागे हैं, वहीं इस्राइल ने इस बात की पुष्टि की है कि हमास के लड़ाके उसके कब्जे वाले इलाकों में घुस गए हैं।  

इस्राइली सेना के प्रवक्ता डैनियल हगारी ने कहा है कि हमास ने जल, थल और हवाई तीनों तरह से हमले किए हैं। स्थानीय समय के मुताबिक सुबह करीब साढ़े छह बजे से हमास ने अचानक हमला शुरू किया। हमास के हमले के जवाब में इस्राइली सेना ने गाजा पट्टी में 'ऑपरेशन आइरन शॉर्ड्स' चलाया है। हमले की शुरुआत यहूदियों के एक पवित्र त्योहार सुकोट के बाद पड़ने वाले सिमचट टोरा के दिन हुई है। त्योहार के वक्त हुए हमले से इस्राइल और तिलमिला गया है। 

hamas israel 5000 rocket attacks - फोटो : social media
हमले कहां-कहां हुए हैं?
रिपोर्ट्स के मुताबिक रॉकेट हमले उत्तर में स्थिति तेल-अवीव में हुए हैं। इसके साथ ही हमास ने दक्षिण में भी अपने लड़ाके भेजे हैं। इस्राइली मीडिया के मुताबिक दक्षिणी शहर स्डैरड में हमास के बंदूकधारियों ने राहगीरों पर गोलियां चलाईं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में बंदूकधारी खुली जीप में ग्रामीण इलाकों में घूमते दिखाई दे रहे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हमास के लड़ाकों ने इस्राइल के कई रिहायशी इलाकों को अपने कब्जे में ले लिया है। 

इस्राइली सेना ने भी कहा है कि उनके दर्जनों लड़ाकू विमान हमास के ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं।  टाइम्स ऑफ इस्राइल के मुताबिक इस वक्त कफर अजा, स्डैरड, सूफा, नाहल ओज, मैगन, बैरी जैसे शहरों और रीम के सैन्य ठिकाने के आसपास लड़ाई जारी है।

इस्राइल-फिलिस्तीन संघर्ष - फोटो : AMAR UJALA
दोनों ओर अब तक कितने लोग जान गंवा चुके हैं?
इस्राइली मीडिया के मुताबिक अब तक कम से कम 22 इस्राइली नागरिकों की जान जा चुकी है। वहीं, 500 से ज्यादा इस्राइली लोग हमास के हमलों में घायल हुए हैं। अनादोलु न्यूज एजेंसी के मुताबिक गाजा पट्टी में इस्राइली सेना और हमास के बीच जारी संघर्ष के चलते कम से कम चार फिलिस्तीनी नागरिकों ने जान गंवाई है। वहीं, पांच फिलिस्तीनी नागरिकों के घायल होने की भी खबर है। 

Israel Attack - फोटो : Social Media
ताजा संघर्ष की वजह क्या है?
हमास के प्रवक्ता खालिद कादोमी ने समाचार वेबसाइट अल जजीरा को बताया है कि यह हमला उन सभी अत्याचारों का जवाब है जो फिलिस्तीनी नागरिक दशकों से सहते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय गाजा में अत्याचार रोके। फिलिस्तीनी लोगों पर अत्याचार बंद हो। अल-अक्सा जैसे हमारे पवित्र स्थल को अतिक्रमण से मुक्त किया जाए। टेलीग्राम पर किए एक पोस्ट में हमास ने अरब और इस्लामिक देशों से इस लड़ाई में साथ देने का अह्वान भी किया है। 

बेंजामिन नेतन्याहू (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
हमलों पर इस्राइल सरकार का क्या रुख है?
इस्राइल प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतेन्याहू ने इसे युद्ध करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह युद्ध है और हम इसे जीतेंगे। नेतेन्याहू ने कहा कि हमास ने जानलेवा हमला किया है। दुश्मनों को इसकी बड़ी कीमत चुकानी होगी। वहीं, इस्राइली रक्षा मंत्री ने कहा है कि हमास ने बहुत बड़ी गलती की है। उन्होंने हमारे खिलाफ युद्ध की शुरुआत की है। 

इस्राइली सेना ने गाजा पट्टी के आसपास रहने वाले वाले इस्राइली लोगों से घरों या शरणार्थी कैंपों में ही रहने की अपील की है। सेना ने कहा है कि हमास के आतंकियों ने रॉकेट से इस्राइली क्षेत्र में भीषण हमला किया है। कई इलाकों में आतंकी हमारी सरहद में घुस आए हैं। हमास के आतंकियों ने हमारी संप्रभुता पर हमला किया है। इस हमले के जिम्मेदार हमास इसके परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे। 

Israel Gaza Rocket Attack - फोटो : ANI
इसके पहले कब आमने-सामने आए थे इस्राइल और हमास?
इससे पहले अगस्त 2022 में दोनों देशों के बीच तीन दिन तक संघर्ष चला था। तीन दिन चले संघर्ष में कम से कम 44 लोगों की जान गई थी। मिस्र की मध्यस्थता के बाद दोनों पक्ष संघर्ष विराम को राजी हुए थे। उस वक्त इस्राइली सेना के गाजा पट्टी में स्थित एक फिलिस्तीनी कब्जे वाले इलाके में हमले के बाद संघर्ष शुरू हुआ था। उस वक्त इस्राइल ने कहा था कि यह हमला आतंकवादी संगठनों की धमकियों के जवाब में किया गया था। इस्राइल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद (पीआईजे) के एक वरिष्ठ सदस्य को गिरफ्तार करने के बाद कई दिनों तक तनाव रहा था। फिलिस्तीन के स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक इस संघर्ष में मारे गए 44 लोगों में 15 बच्चे थे। वहीं, 300 से ज्यादा फिलिस्तीनी लोगों के घायल होने का दावा भी स्थानीय सरकार ने किया था। 

अगस्त 2022 से पहले दोनों पक्षों में मई 2021 में भी 11 दिन तक संघर्ष चला था। इस संघर्ष में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। 

इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच लड़ाई - फोटो : अमर उजाला
इस्राइल फिलिस्तीन के बीच संघर्ष कितना पुराना है? 
इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच के मतभेद की शुरुआत ओटोमन साम्राज्य के खत्म होने के साथ होती है। 19वीं शताब्दी में यहूदियों की यह पवित्र भूमि फिलिस्तीन के नाम से जानी जाती थी। उस दौर में यहूदी लोग पूरे यूरोप में फैले थे। पहले विश्वयुद्ध में ब्रिटेन ने ओटोमन को जीत लिया। 1917 में ब्रिटेन ने एक घोषणा की जिसमें कहा गया कि ब्रिटेन फिलिस्तीन को यहूदियों की मातृभूमि बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसे बाल्फोर डिक्लेरेशन कहा जाता है। कई लोगों का मानना है कि बेलफोर डिक्लेरेशन ही वह प्रमुख वजह थी, जिसने इस्राइल और फिलिस्तीन मतभेद को जन्म दिया। 

इटली और जर्मनी जैसे देश राष्ट्रवाद के नाम पर एक हो रहे थे। इसी दौर में जियोनिष्ट आंदोलन की शुरुआत हुई। इसी बीच आए बाल्फोर डिक्लेरेशन ने यहूदियों का फिलिस्तीन में आकर बसना तेज हुआ। 1945 तक यह इलाका अंग्रेजों के कब्जे में रहा और पूरे यूरोप से यहूदी आकर यहां बसते रहे। इस दौरान फिलिस्तीनियों और यहूदियों में कई संघर्ष होते रहे। ब्रिटेन के ऊपर यहूदियों के पुनर्वास का दबाव बढ़ने लगा। दूसरे विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन ने ये मामला संयुक्त राष्ट्र को सौंप दिया। 

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिटलर ने यहूदियों का बड़े पैमाने पर नरसंहार कराया। करीब 42 लाख यहूदियों को गैस चैंबर में डालकर मार दिया गया। यूरोप में रह रहे यहूदियों को महसूस हुआ कि फिलिस्तीन के अलावा कहीं कोई दूसरी जगह नहीं, जहां यहूदी सुरक्षित रह सकें। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ अस्तित्व में आया। वहीं दूसरी तरफ यहूदी और अरब के लोगों के बीच का मतभेद काफी ज्यादा बढ़ गया था। ब्रिटेन इस मसले को हल करने में सक्षम नहीं था, इसलिए उसने यह मसला संयुक्त राष्ट्र संघ में भेज दिया। 

इस मसले पर संयुक्त राष्ट्र संघ में वोटिंग हुई और नतीजा निकला कि जहां यहूदियों की संख्या ज्यादा है ,उन्हें इस्राइल दिया जाएगा। वहीं जिस जगह पर अरब बहुसंख्यक हैं, उन्हें फिलिस्तीन दिया जाएगा। तीसरा था यरूशलम, इसे लेकर काफी मतभेद थे। यहां आधी आबादी यहूदी थी और आधी आबादी मुस्लिम। इसे लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपने फैसले में कहा कि इस क्षेत्र पर अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण लागू होगा।

क्या था बेलफोर डिक्लेरेशन?
1917 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जब ओटोमन हारने की कगार पर था। उस समय ब्रिटेन के विदेश मंत्री सर आर्थर बेलफोर ने एक डिक्लेरेशन जारी किया। इस डिक्लेरेशन में यह इंगित किया गया कि ब्रिटेन, यहूदियों को उनकी पवित्र भूमि फिलिस्तीन देगा और वहां उनका पुनर्वास करवाएगा। वहीं दूसरी ओर ब्रिटन ने चुपके से फ्रांस और रूस के साथ साइक्स-पिकॉट एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किया। इसके अंतर्गत उसने पूरे मध्य पूर्व को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया और तय किया कि प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद कौन सा देश किस के हिस्से में जाएगा। इसमें उसने फिलिस्तीन को अपने हिस्से में रखा। सीरिया और जॉर्डन फ्रांस को दिया गया। वहीं तुर्की का कुछ हिस्सा रूस के पास गया। एक तरफ ब्रिटेन ने सामूहिक तौर पर यह कहा कि फिलिस्तीन हम यहूदियों को देंगे। वहीं दूसरी ओर उसने गुपचुप तरीके से साइक्स-पीको एग्रीमेंट के तहत यह हिस्सा अपने पास रख लिया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
इस्राइल के गठन के बाद कैसे रहे दोनों देशों के रिश्ते?
1948-49 अरब इस्राइल युद्ध
संयुक्त राष्ट्र के फैसले के फौरन बाद नवनिर्मित इस्राइल के पड़ोसी देशों (मिस्र, सीरिया, इराक और जॉर्डन) ने उस पर हमला बोल दिया। इस युद्ध में इस्राइल ने अपना बचाव करते हुए इन चारों देशों को हरा दिया। इस लड़ाई के बाद जॉर्डन के पास फिलिस्तीन के पूरे वेस्ट बैंक का नियंत्रण आ गया। वहीं, गाजा पट्टी पर मिस्र का। वहीं, थोड़ी-बहुत जगह फिलिस्तीन की बची थी, उस पर इस्राइल ने कब्जा कर लिया। इस युद्ध के कारण फिलिस्तीन का अस्तित्व ना के बराबर हो गया। युद्ध में इस्राइल ने फिलिस्तीन के पचास फीसदी हिस्सों पर कब्जा कर लिया था। इस युद्ध के वजह से लगभग सात लाख अरब फिलिस्तीनियों को बतौर शरणार्थी अपना देश छोड़ना पड़ा।

1967 का युद्ध
अरब इस्राइल युद्ध के बाद मिस्र, सीरिया और जॉर्डन ने 1967 में फिर से इस्राइल पर हमला करने की योजना बनाई। उनके इस हमले से पहले ही इस्राइल ने इन तीनों देशों पर हमला बोल दिया। हमले में तीनों देशों को काफी नुकसान पहुंचा। इस युद्ध में इस्राइल ने सीरिया से गोलन हाइट, मिस्र से गाजा पट्टी और सिनाई पेनीसुला और जॉर्डन से वेस्ट बैंक छीन लिया। बाद में कुछ अंतरराष्ट्रीय समझौतों के कारण इस्राइल को सिनाई पेनीसुला मिस्र को वापस करना पड़ा। उधर दूसरी तरफ इस्राइल के पास पूरा फिलिस्तीन कब्जे में था। इस युद्ध को सिक्स-डे वॉर के नाम से जाना जाता है।

ओसलो एकोर्ड समझौता 1993
इस्त्राइल का फिलिस्तीन पर पूरा नियंत्रण हो चुका था। इसके बाद फिलिस्तिनी लोग वेस्ट बैंक पर बढ़ रहे इस्त्राइली सैन्यकरण, दमनकारी नीतियों के खिलाफ बोलना शुरू करते हैं। इसी कड़ी में यासिर अराफात ने एक संगठन की शुरुआत की, जिसका नाम फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन था। इस संगठन ने कई छुटमुट बमबारी करी, विदेशों में स्थापित इस्राइली एम्बेसी पर हमला किया। इस्राइल के कई विमान हाईजैक किए गए। इस दौरान इस देश में हिंसा बढ़ने लगी थी। तत्पश्चात एक बहुत बड़ा परिवर्तनकारी दौर आता है। दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिए 1993 में ओसलो एकोर्ड समझौता होता है। इसमें यह निर्णय लिया गया कि फिलिस्तीन, इस्त्राइल को एक अंतरराष्ट्रीय देश के रूप में स्वीकार करेगा। वहीं, दूसरी ओर इस्राइल ने पीएलओ को फिलिस्तीनी लोगों का प्रतिनिधि माना। इस समझौते में यह भी निर्णय लिया गया कि फिलिस्तीन सरकार वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी को लोकतांत्रिक ढंग से नियंत्रित करेगी। इस समझौते के लिए इस्राइल के यिट्ज स्टाक राबेन और फिलिस्तीन के यासिर अराफात को शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया था।

समझौता पांच साल के लिए किया गया था। इसके बाद दोबारा शांति समझौते के लिए कैम्प डेविड-II, 2000 में इस्राइल और फिलिस्तीन एक मंच पर आए। दोनों देशों के बीच इस समझौते में कोई खास सहमति नहीं बन पाई। इसके चलते यह शांति समझौता टूट गया। तब से लेकर आज तक दोनों देशों के बीच किसी मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई है। दोनों देशों के बीच दोबारा मतभेदों की शुरुआत तब होती है, जब कैंप डेविड समझौते के फौरन बाद इस्राइली राष्ट्रपति एहूद बराक फिलिस्तीनी सीमा में 1000 सैनिकों के साथ टेम्पल माउंट पर जाते हैं। इस कारण फिलिस्तीनी लोगों का गुस्सा फिर से फूट पड़ता है। नतीजतन दोबारा हिंसक झड़पों की शुरुआत होती है। यह हिंसक गतिविधियां पहले के मुकाबले ज्यादा उग्र थीं। इसमें 1000 यहूदियों की जानें गई, तो वहीं 3200 फिलिस्तीनियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। ये घटना क्रम सन 2000 से लेकर 2005 तक चलता रहा। इसके बाद 2005 में इस्राइल ने अपनी नीतियों में कई बड़े बदलाव किए। उसने गाजा से अपने 8000 हजार सैनिकों को हटा दिया।

वह दौर जब हमास चर्चा में आया
फिलिस्तीन में हमास (वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इसे आतंकवादी संगठन की संज्ञा दी जाती है) राजनीतिक पार्टी का गाजा में उद्भव होता है। वहीं, दूसरी ओर पीएलओ से जुड़ी पार्टी फतह, हमास को सरकार में लेने से मना कर देती है। इसके बाद 2007 में हमास का पूरी तरह गाजा पर नियंत्रण हो जाता है। इस कारण फतह को वहां से जाना पड़ता है। हमास के उत्थान से फिलिस्तीन की राजनीति में दोहरीकरण आता है। पहले केवल एक ही पार्टी (PLO) थी। फिलिस्तीन के इन दोनों पार्टियों की विचारधारा एक-दूसरे से पूरी तरह भिन्न है। इस कारण दोनों देशों के बीच के मतभेद और भी ज्यादा बढ़ गए हैं।

हमास गाजा पट्टी में दक्षिण पंथी विचारधारात्मक पार्टी है। उग्र राष्ट्रवाद के नशे में हमास गाजा पट्टी से इस्राइल पर खतरनाक रॉकेटों से हमले करता रहता है। इस हमले में अब तक इस्राइल के कई नागरिकों की जानें चली गई हैं। इस कारण इस्राइल ने गाजा को पूरी तरह से लॉक कर रखा है। इस्राइल का कहना है कि ईरान जैसे देश गाजा में इजिप्ट के रास्ते हथियारों की सप्लाई करते हैं, ताकि हमारे देश की अखंडता को तोड़ा जा सके। इस्राइल द्वारा गाजा पट्टी ब्लॉकेड को किए जाने से गाजा के हालात दिनों-दिन खराब होते जा रहें हैं।
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