इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू
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इस्राइल में चुनाव के बाद रोचक समीकरण सामने आ रहे हैं। स्थानीय मीडिया की खबरों के मुताबिक मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दल- 'लिकुड' को सर्वाधिक वोट मिले हैं। हालांकि, सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद लिकुड स्पष्ट बहुमत के आंकड़े से दूर है। इस चुनाव में किसी को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। अरब देशों के समर्थन वाले खेमे को किंगमेकर की तरह देखा जा रहा है।
इस्राइल के राजनीतिक चौसर पर कैसे दांव-पेंच?
पश्चिम एशिया में ईरान और अन्य देशों के साथ टकराव के अलावा गाजा पट्टी में अक्तूबर 2023 से ही जारी संघर्ष के बीच इस्राइल में उभरे नए राजनीतिक समीकरण में कौन किसका समर्थन करेगा? नेतन्याहू क्या प्रधानमंत्री पद पर बरकरार रहने में सफल रहेंगे? इस्राइल की संसद में कैसे दांव-पेंच देखने को मिल सकते हैं? इस्राइल की स्थानीय मीडिया में आई सूचनाओं के आधार पर भावी सरकार को लेकर कैसे अनुमान सामने आए हैं? पढ़ें ऐसे सवालों के जवाब तलाशती ये रिपोर्ट
इस्राइल चुनाव: नेतन्याहू का गुट बहुमत से चूका, आगे क्या?
दरअसल, इस्राइल में साल 2026 के संसदीय चुनाव में दो दशक से अधिक समय से सत्तारूढ़ नेतन्याहू के सामने पूर्व सैन्य अधिकारी बड़े चैलेंजर बनकर उभरे। मतों की अंतिम गिनती के बाद इस बात की पुष्टि हुई कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गुट को 53 सीटें मिली हैं। ये संख्या सरकार बनाने के लिए आवश्यक 61 सीटों के बहुमत से यह कम है। इस्राइल अखबार द यरुशलम पोस्ट के मुताबिक केंद्रीय चुनाव समिति की तरफ से गुरुवार देर रात (भारतीय समय) आधिकारिक आंकड़े जारी किए गए। इसके अनुसार, विपक्षी गुट को 48 सीटें मिलीं हैं। अब चूंकि दोनों गुट 61 सीटों का पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर पाए हैं ऐसे में 19 सीटें जीतने वाली अरब पार्टियां किंगमेकर बनकर उभरी हैं।
क्या अब नए प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण की तैयारी?
मौजूदा प्रधानमंत्री नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 27 सीटें मिलने की उम्मीद है। इस तरह यह इस्राइली संसद (नेसेट) में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी। हालांकि, संसद में शक्ति परीक्षण के दौरान अगर नेतन्याहू विश्वास मत हासिल करने में विफल रहने के कारण पद गंवा देते हैं, तो उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। उन्हें लंबे समय से चले आ रहे भ्रष्टाचार के आरोपों के लिए जवाबदेही का सामना करना होगा। इसके अलावा, 7 अक्तूबर, 2023 को हुए हमास के नेतृत्व वाले हमले से जुड़ी सुरक्षा चूक की औपचारिक जांच भी शुरू होने की संभावना है। ऐसे में सबकी नजरें इस सवाल पर भी टिकी हैं कि क्या आने वाले कुछ दिनों में इस्राइल से नए प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण की खबर आएगी, या नेतन्याहू अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहेंगे।
क्या अरब पार्टियां बदलेंगी इस्राइल की राजनीति?
रिपोर्ट्स के मुताबिक गठबंधन में भूमिका के बिना भी, अरब-नेतृत्व वाली पार्टियां अपनी बढ़ती शक्ति का प्रदर्शन कर सकती हैं। वे अगले संसद में नेतन्याहू के अन्य विरोधियों का समर्थन कर सकती हैं। इसमें एक नया अध्यक्ष चुनना शामिल हो सकता है। इससे उन्हें कार्यसूची पर नियंत्रण मिलेगा। यह उन्हें नई सरकार बनने से पहले कानून को आगे बढ़ाने और पारित करने की अनुमति दे सकता है।
क्या नेतन्याहू के प्रतिद्वंद्वी करेंगे अरब पार्टियों से गठबंधन?
नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी, पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट ने संकेत दिया है कि वह शर्तों के साथ अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों के साथ जुड़ने के लिए तैयार हैं। अरब-नेतृत्व वाली जॉइंट लिस्ट में दूसरे स्थान पर रहे अहमद तिबी ने आर्मी रेडियो को बताया। उन्होंने कहा कि विपक्षी गुट ने नेसेट अध्यक्ष को बदलने पर चर्चा के लिए उनसे संपर्क किया था। तिबी ने बताया कि उनकी पार्टी गुट के उम्मीदवार का समर्थन करेगी। हालांकि, यदि नई सरकार नहीं बनती है, तो इस्राइल को अगले साल की शुरुआत में एक और चुनाव का सामना करना पड़ेगा।
क्या चुनाव परिणामों पर उठे सवाल?
नेतन्याहू की पार्टी ने बृहस्पतिवार को निराधार आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों ने चुनाव "चुराया" है। इसमें संभावित रूप से विदेशी सहायता भी शामिल थी। अंतिम परिणाम नेतन्याहू के गुट के संसद में बहुमत खोने की पुष्टि करने वाले थे। विपक्षी दलों ने नेतन्याहू पर अरब आबादी को बदनाम करने का आरोप लगाया। यह आरोप अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों के ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद लगा। यह चुनाव के उभरते परिणामों को अवैध ठहराने का प्रयास था।