इस्राइल में पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को चुनौती दे रहे हैं। उनका चुनाव प्रचार बड़े भाषणों के बजाय सीधे मुद्दों और लोगों से संवाद पर केंद्रित है। आइजेनकोट ने नेतन्याहू पर लंबे समय तक युद्ध जारी रखने, देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाने और सामाजिक विभाजन बढ़ाने के आरोप लगाए हैं।
इस्राइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को चुनौती दे रहे पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट का अंदाज उनसे बिल्कुल अलग है। आइजेनकोट (66) चुनावी सभाओं में बड़े-बड़े वादे या जोशीले भाषण देने के बजाय सीधे मुद्दों पर बात करते हैं। वह खुद को ऐसा नेता बताते हैं, जो संकट के समय जिम्मेदारी लेने से पीछे नहीं हटेगा।
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आइजेनकोट चुनाव में नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरे हैं। हालांकि, उनकी बढ़त अब थोड़ी घटी है। शांत ढंग से प्रचार का उनका अंदाज समर्थकों की चिंता बन रहा है। है। उन्हें डर है कि कहीं कम आक्रामक प्रचार के कारण चुनाव में उनकी बढ़त कम न हो जाए। आइजेनकोट का कहना है कि नेतन्याहू ने इस्राइल को अंतहीन युद्धों में उलझाया, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी छवि को नुकसान पहुंचाया और अमेरिका में उसका समर्थन कमजोर किया। उनका आरोप है कि नेतन्याहू के नेतृत्व में सत्तावाद बढ़ा है और समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच तनाव गहरा हुआ है।
सैनिक से नेता तक का सफर
आइजेनकोट अगर प्रधानमंत्री बने तो वह इस पद पर पहुंचने वाले पहले मिजराही यहूदी होंगे। उन्हें सेना में लंबे समय तक सेवा की और 2015 में इस्राइली सेना के प्रमुख बने। 7 अक्तूबर 2023 के हमले के पांच दिन बाद आइजेनकोट नेतन्याहू सरकार में शामिल हुए थे। लेकिन मतभेद बढ़े तो जून 2024 में सरकार छोड़ दी। अगले साल याशर नाम से नई पार्टी बनाई। हिब्रू में इसका अर्थ है-ईमानदार। उन्होंने सत्ता में आने पर 7 अक्तूबर के सुरक्षा चूक की जांच के लिए राज्य आयोग बनाएंगे।