गाजा पट्टी में राहत कार्यक्रम चलाने वाले एक इस्राइल समर्थित अमेरिकी संगठन ने बुधवार को जानकारी दी कि एक वितरण स्थल के पास 20 फलस्तीनियों की मौत हो गई। अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक, इसी दौरान इस्राइल हमलों में 41 अन्य लोगों की जान चली गई, जिनमें 11 बच्चे भी शामिल हैं।
हमास के कारण भड़की हिंसा: जीएचएफ
गाजा ह्यूमैनिटेरियन फंड (जीएचएफ) ने बताया कि दक्षिण गाजा के खान यूनिस में एक वितरण केंद्र के पास 19 लोगों की मौत भगदड़ में कुचले जाने से हुई, जबकि एक व्यक्ति की मौत चाकू से हमला होने के कारण हुई। संगठन ने आरोप लगाया कि हमास द्वारा डर और भ्रम फैलाने के कारण हिंसा भड़की। हालांकि, उसने इस दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया। यह संगठन आमतौर पर अपने वितरण केंद्रो के पास हुई गड़बड़ी को नहीं मानता।
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मदद पाने की कोशिश में 850 लोगों की गई जान
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय और गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि मई से अब तक करीब 850 फलस्तीनियों की मौत सहायता पाने की कोशिश करते हुए हो चुकी है। इसमें जीएफएच के वितरण स्थलों सहित अन्य केंद्र भी शामिल हैं।
उत्तरी गाजा और खान यूनुस में 41 की मौत
वहीं, इस्राइली हमलों में उत्तरी गाजा में 22 लोगों की मौत हुई, जिनमें 11 बच्चे शामिल हैं। खान यूनुस शहर में 19 अन्य की जान गई। इस्राइली सेना ने कहा कि उसने बीते चौबीस घंटों में गाजा पट्टी में (हमास के) 120 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया है, जिसमें उसकी सुरंगें और हथियार भंडारण केंद्र शामिल हैं। इस्राइल का आरोप लगाता है कि हमास नागरिक इलाकों के बीच में अपने सैन्य ढांचे को छिपाता है।
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इस्राइल की दबाव बढ़ाने की रणनीति
गुरुवार को इस्राइली सेना ने एक चौथा गलियारा खोलने की घोषणा की, जो खान यूनुस के बीच से होकर जाता है। यहां इस्राइली सैनिकों ने जमीन पर कब्जा किया है। सेना का कहना है कि यह हमास पर दबाव बनाने की रणनीति है। पहले भी ऐसे संकरे जमीनी गलियारे संघर्षविराम वार्ताओं में बड़ी रुकावट बन चुके हैं, क्योंकि इस्राइल इन गलियारों पर अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखना चाहता है।
खौफनाक मानवीय संकट का सामना कर रहे फलस्तीनी
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि गाजा के 20 लाख से अधिक फलस्तीनी एक खौफनाक मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं। सात अक्तूबर 2023 को हमास ने इस्राइल पर हमला किया था, जिसके बाद से 21 महीने से युद्ध जारी है। इस्राइल ने गाजा पर बमबारी और नाकेबंदी की है, जिससे वहां के लोग भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।