बांग्लादेश में सोमवार को इस्कॉन पुंडरीक धाम के अध्यक्ष चिन्मय कृष्ण दास को हिरासत में लिया गया। चिन्मय प्रभु के नाम से प्रसिद्ध धार्मिक अल्पसंख्यक नेता की हिरासत राजधानी ढाका से लगभग 300 किमी उत्तर में स्थित रंगपुर शहर से हुई है। इस्कॉन मंदिर ने बताया कि कथित तौर पर ढाका खुफिया पुलिस के अधिकारियों ने ढाका हवाई अड्डे से कृष्ण को हिरासत में लिया है। दरअसल, शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ वह लगातार आवाज उठा रहे थे। आइए जानते हैं वह कौन हैं।
क्या चल रहा बांग्लादेश में?
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय की संख्या कुल जनसंख्या का लगभग आठ फीसदी है। यह समुदाय लंबे समय से धार्मिक भेदभाव और हिंसा का शिकार हो रहा है। हिंदू समुदाय के सदस्य कथित तौर पर लक्षित हत्याओं और हमलों का सामना कर रहे हैं। कई बार इन हमलों में मंदिरों को भी नुकसान पहुंचाया गया है। इसी के विरोध में चिन्मय प्रभु लड़ाई लड़ रहे हैं।
चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी ने हमेशा हिंदू धर्म के संरक्षक के रूप में अपनी भूमिका निभाई है और बांग्लादेश के मंदिरों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी जताई है।
बांग्लादेश में मंदिरों की सुरक्षा को लेकर जताई थी चिंता
चिन्मय प्रभु विशेष रूप से चटगांव के तीन मंदिरों को खतरे में महसूस कर रहे थे, जिनकी सुरक्षा के लिए मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग हिंदू समुदाय के साथ मिलकर काम कर रहे थे। एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, 'चटगांव में तीन मंदिर खतरे में हैं, लेकिन हिंदू समुदाय ने मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों के साथ मिलकर अब तक उन्हें बचाया है।'
उन्होंने दावा किया था कि हिंदू समुदाय चटगांव में पुलिस और रैपिड एक्शन बटालियन से मदद के लिए अनुरोध कर रहा है, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिल रहा। उन्होंने यह भी कहा था, 'कई हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के रास्ते भारत भाग रहे हैं।'
हिरासत ी के बाद हालात बिगड़े
बांग्लादेश के चटगांव इस्कॉन पुंडरीक धाम के अध्यक्ष चिन्मय कृष्णन दास की हिरासत ी के बाद हालात बिगड़ते जा रहे हैं। चिन्मय प्रभु की हिरासत ी के विरोध में हिंदू समाज के लोग सड़कों पर उतर आए, इस दौरान उन पर बीएनपी और जमात के कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया। इस हमले में 50 हिंदू घायल हो गए। वहीं देर रात हजारों हिंदूओं ने जय सिया राम और हर हर महादेव के जयनारे के साथ मौलवी बाजार में मशाल रैली निकाली।
इन जगहों पर किया गया हमला
चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की हिरासत ी के बाद बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों ने हर जिले में शांतिपूर्ण सभाएं आयोजित कीं। हालांकि इन शांतिपूर्ण सभाओं पर चरमपंथी समूहों द्वारा क्रूर हमले किए गए। इस्लामिक समूहों ने चटगांव में हिंदू समुदाय के सदस्यों पर हमला किया। ढाका के शाहबाग में एक शांतिपूर्ण सभा के दौरान हिंदू समुदाय के लोगों और चटगांव विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कुशाल बरन पर हमला किया गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। चरमपंथी समूहों द्वारा किए गए हमले में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इसलिए किया गया हिरासत
बांग्लादेश की स्थानीय मीडिया ने बताया कि चिन्मय प्रभु को एक रैली में बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने के आरोप में हिरासत किया गया है। मीडिया के अनुसार, उन्होंने यह रैली अक्तूबर में संबोधित की थी। अपनी रैलियों में चिन्मय प्रभु ने हिंदुओं से एकजुट होने की अपील की और हिंदू समुदाय पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ निरंतर विरोध जताया था। साथ ही, उन्होंने अल्पसंख्यकों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
इस्कॉन ने क्या कुछ कहा?
इस्कॉन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, 'हमें परेशान करने वाली खबरें मिली हैं कि इस्कॉन बांग्लादेश के प्रमुख नेताओं में से एक चिन्मय कृष्ण दास को ढाका पुलिस ने हिरासत में लिया है। यह निराधार आरोप लगाना अपमानजनक है कि इस्कॉन का दुनिया में कहीं भी आतंकवाद से कोई लेना-देना है। इस्कॉन इंक भारत सरकार से आग्रह करता है कि वह तत्काल कदम उठाए और बांग्लादेश सरकार से बात करे। साथ ही यह बताए कि हम एक शांतिप्रिय भक्त हैं। हम चाहते हैं कि बांग्लादेश सरकार चिन्मय कृष्ण दास को तत्काल रिहा करे। इन भक्तों की सुरक्षा के लिए भगवान कृष्ण से हमारी प्रार्थना है।'