सीरिया में अमेरिका समर्थित विद्रोही गुटों ने पूर्वी सीरिया के बागुज गांव में इस्लामिक स्टेट के कब्जे वाले आखिरी इलाके को मुक्त कराने के साथ ही आईएस पर जीत की घोषणा कर दी है। आईएस के आखिरी गढ़ के खात्मेे से आईएस के स्वघोषित खलीफा शासन का भी अंत हो गया है। रविवार को दर्जनों आईएसआईएस के लड़ाके अमेरिका समर्थित सेना के सामने आत्मसमर्पण करने के लिए सुरंगों से बाहर निकले।
चलिए जानते हैं कि कब इस आतंकी समूह ने इन देशों पर कब्जा किया और कैसे ये अंत की कगार पर पहुंचा।
साल 2015: अपने आतंक के सहारे इस्लामिक स्टेट ने 88 हजार वर्ग किमी में करीब 80 लाख लोगों पर शासन किया। यानी सीरिया और इराक दोनों के एक तिहाई हिस्से में इसने आतंक फैलाया। इसने तेल, जबरन वसूली, डकैती और अपहरण कर अरबों डॉलर जुटाए।
मार्च, 2016: सीरिया की सरकार ने प्राचीन शहर पालमायरा को पुन: प्राप्त कर लिया। लेकिन बाद में दिसंबर माह में इसे दोबारा खो दिया। यूनेस्को के इस विश्व धरोहर स्थल को आखिरकार मार्च, 2017 में दोबारा प्राप्त कर लिया गया।
जुलाई, 2017: इराकी बलों ने अक्तूबर में मोसुल को आजाद कराया। सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (एसडीएफ) की कार्रवाई के बाद आईएस ने रक्का से भी नियंत्रण खो दिया। दिसंबर, 2017 में इराकी सरकार ने आईएस पर जीत की घोषणा की।
दिसंबर, 2018: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीरिया से 2 हजार अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने का आदेश दिया। उन्होंने दावा किया कि वह आईएस को हरा चुके हैं। इस फैसले का गठबंधन के सदस्यों ने विरोध भी किया। माना जाता है कि ट्रंप के इसी फैसले के कारण अमेरिका के रक्षा सचिव जिम मैटिस ने इस्तीफा दिया था।
मार्च, 2019: आईएस का इराक और सीरिया क्षेत्र पर कोई नियंत्रण नहीं रहा, लेकिन दोनों ही देशों में ये आतंकी संगठन हमले कर रहा है। अभी भी इसके सहयोगी मिस्र के सिनाई प्रायद्वीप, अफगानिस्तान, नाइजीरिया, यमन और फिलीपींस में मौजूद हैं।
70 बड़े हमले किए
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आईएस ने दुनियाभर में काफी तबाही मचाई है। आईएस ने 20 देशों में 70 बड़े हमले किए हैं। जिनमें करीब 4.7 लाख लोगों की मौत हुई। आईएस की वजह से करीब 5 लाख लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा। जबकि एक लाख लोग लापता हुए। यह 17 देशों में सक्रिय रहा है। इनमें इराक, सीरिया, अफगानिस्तान, लीबिया, फिलीपींस, नाइजीरिया और सोमालिया शामिल हैं।
सफाए में लगे पांच साल
अमेरिकी गठबंधन सेना ने इराक, सीरिया में आईएस ठिकानों पर 30 हजार हवाई हमले किए। इस काम में अमेरिका का साथ 73 देशों ने दिया है। इनमें ब्रिटेन, सऊदी अरब, तुर्की, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, डेनमार्क और नीदरलैंड शामिल हैं। रूस इस गठबंधन में शामिल नहीं था, लेकिन उसने भी सीरिया की मदद के लिए आईएस ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आईएस के इराक और सीरिया में सफाए के लिए अमेरिका ने 5 साल में 1.77 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। आईएस का सालाना खर्च 14,200 करोड़ रुपये था। इस संगठन ने इराक और सीरिया के तेल कुओं पर कब्जा किया था। इसी से उसकी आय होती थी। इसके अलावा इस संगठन के आतंकी अमीरों से भी लूटपाट करते थे।
कितने विदेशी हुए शामिल?
आतंकी संगठन आईएस में 20 साल में 41,990 विदेशी शामिल हुए थे। जिनमें 13 फीसदी महिलाएं और 12 फीसदी बच्चे थे। इनमें पुरुष 32,089 (75 फीसदी), महिला 4761 (13 फीसदी) और बच्चे 4640 (12 फीसदी) हैं। आईएस से 7366 लोगों की वापसी हुई है। इनमें पुरुष 5930 (79 फीसदी), महिला 256 (4 फीसदी) और बच्चे 1180 (17 फीसदी) हैं।
इनमें ब्रिटेन, जर्मनी, उज्बेकिस्तान, तुर्की, मोरक्को, फ्रांस, ट्यूनीशिया, जॉर्डन, सऊदी अरब और रूस ऐसे देश थे, जिनके 500 से अधिक नागरिक आईएस में शामिल हुए थे।
आईएस का प्रमुख अबु बकर बगदादी
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आईएस का प्रमुख अबु बकर बगदादी आज भी अमेरिकी विशेषज्ञों के लिए रहस्य बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि बगदादी अभी जिंदा है और इराक में कहीं छिपा हुआ है। हालांकि यह माना जाता है कि वह हवाई हमले में मारा गया था। हजारों आईएस के लड़ाके और समर्थक मारे गए हैं और हजारों को पकड़ा गया है।
सीरिया के कुर्दों ने चेतावनी दी है कि बेशक इस आतंकी संगठन का अंत हो गया है। लेकिन जो हजारों विदेशी जिहादी हिरासत में हैं, वह टाइम बम की तरह हैं, जिन्हें डिफ्यूज करने की जरूरत है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि "हम तब तक सतर्क रहेंगे जब तक ये पूरी तरह से पराजित ना हो जाए, जहां भी ये संचालित होता है।"
अबदेल करीम ओमर का कहना है, "कई हजारों लड़ाके हैं, जिनमें 54 देशों के महिला और बच्चे भी शामिल हैं। जो हमारे लिए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक गंभीर बोझ और खतरा हैं।"