इस्राइल को लेकर क्या है जनता की राय?
इस बीच, अमेरिका में इस्राइल को लेकर भी जनमत बदलता दिख रहा है। हालिया सर्वेक्षणों में पहली बार इस सदी में ऐसे संकेत मिले कि अधिक अमेरिकी अपनी सहानुभूति फिलिस्तीनियों के साथ जता रहे हैं। ऐसे माहौल में ईरान युद्ध को इस्राइल की लड़ाई बताने वाली आवाजें भी तेज हुई हैं। दक्षिणपंथी कमेंटेटर टकर कार्लसन और कई प्रभावशाली रूढ़िवादी चेहरों ने भी इस युद्ध पर सवाल उठाए हैं।
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की आक्रामक बयानबाजी ने भी विवाद बढ़ाया है। नागरिक ठिकानों पर हमलों और सैन्य कार्रवाई के मानवीय असर को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उनकी टिप्पणियों की आलोचना हो रही है। इससे प्रशासन पर घरेलू दबाव और बढ़ा है।
अमेरिका युद्ध की आर्थिक कीमत के तैयार नहीं
विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप अभी अपने मुख्य समर्थक वर्ग को साथ रखने में सफल दिख रहे हैं, लेकिन उन्होंने देश को युद्ध की आर्थिक कीमत के लिए तैयार नहीं किया। ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखी जा रही है, जिसका असर ईंधन, यात्रा और खाद्य कीमतों तक पर पड़ सकता है। महंगाई से जूझ रहे अमेरिकी मतदाताओं के लिए यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप की सबसे बड़ी चुनौती अब सिर्फ युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि घरेलू राजनीति भी उतनी ही अहम हो गई है। कांग्रेस में भले ही रिपब्लिकन पार्टी के नेता खुलकर विरोध नहीं कर रहे हों, लेकिन मध्यावधि चुनावों के करीब आते ही पार्टी के भीतर बेचैनी बढ़ सकती है। माना जा रहा है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है और आर्थिक दबाव बढ़ता है, तो ट्रंप पर इसे जल्द खत्म करने का दबाव और तेज हो सकता है।