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US कर रहा कानून का उल्लंघन?: ट्रंप की 'नार्को-टेररिस्ट' नीति पर सवाल, 207 लोगों की मौतों के बाद बढ़ी आलोचना

Thu, 04 Jun 2026 08:19 AM IST
रिया दुबे वाशिंगटन, पीटीआई

सार

अमेरिकी सेना ने कथित ड्रग तस्करों की एक नाव पर हमला किया, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई। ट्रंप प्रशासन के नार्को-टेररिस्ट अभियान में अब तक 207 लोग मारे जा चुके हैं। हालांकि, इन हमलों की वैधता और मारे गए लोगों के खिलाफ सबूतों को लेकर अमेरिका में आलोचना और कानूनी सवाल बढ़ रहे हैं।
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नार्को-टेररिस्ट के नाम पर हमले - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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अमेरिकी सेना ने पूर्वी प्रशांत महासागर में कथित तौर पर ड्रग्स की तस्करी कर रही एक नाव पर हमला किया, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन लैटिन अमेरिका में कथित ड्रग तस्करों के खिलाफ कई महीनों से अभियान चला रहा है।

कहां किया गया हमला?

अमेरिकी दक्षिणी कमान के अनुसार, यह हमला उन समुद्री मार्गों पर किया गया जिन्हें ड्रग तस्करी के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि सेना ने यह साबित करने के लिए कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया कि नाव वास्तव में मादक पदार्थ ले जा रही थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो में नाव को तेज रफ्तार से जाते हुए और फिर विस्फोट के साथ आग की लपटों में घिरते देखा गया।

अब तक कितनों की हो चुकी है मौत?

रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर की शुरुआत से अमेरिका जिन लोगों को नार्को-टेररिस्ट बता रहा है, उनके खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों में अब तक कम से कम 207 लोगों की मौत हो चुकी है।

राष्ट्रपति ट्रंप का इन अभियानों को लेकर क्या कहना है?

राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि अमेरिका लैटिन अमेरिकी ड्रग कार्टेल के साथ सशस्त्र संघर्ष की स्थिति में है और ये हमले अमेरिका में ड्रग्स की तस्करी तथा ओवरडोज से होने वाली मौतों को रोकने के लिए जरूरी हैं। हालांकि प्रशासन पर यह आरोप लग रहा है कि उसने मारे गए लोगों के नार्को-टेररिस्ट होने के पर्याप्त प्रमाण सार्वजनिक नहीं किए हैं।

सैन्य कार्रवाईयों की वैधता पर उठ रहे सवाल

इन सैन्य कार्रवाइयों की वैधता और प्रभावशीलता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि अमेरिका में ओवरडोज का बड़ा कारण बनने वाला फेंटेनिल आमतौर पर मैक्सिको के रास्ते जमीन के जरिए पहुंचता है, जबकि उसका उत्पादन चीन और भारत से आने वाले रसायनों की मदद से किया जाता है।

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इस अभियान को लेकर कुछ डेमोक्रेट सांसदों और सैन्य कानून विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है। विशेष रूप से सितंबर में हुए पहले हमले को लेकर काफी विवाद हुआ था। उस हमले में नौ लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दो लोग बच गए थे और नाव के मलबे का सहारा लेकर समुद्र में तैर रहे थे। बाद में नाव पर दोबारा हमला किया गया, जिसमें उन दोनों की भी मौत हो गई।

व्हाइट हाउस ने क्या सफाई दी?

व्हाइट हाउस ने दूसरी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि यह आत्मरक्षा के तहत की गई थी ताकि नाव पूरी तरह नष्ट हो सके और यह सशस्त्र संघर्ष के कानूनों के अनुरूप थी। हालांकि कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हमले के समय लोग जीवित थे, तो उन पर दोबारा हमला करना किसी भी परिस्थिति में अवैध माना जा सकता है।

इस बीच, पेंटागन के इंस्पेक्टर जनरल कार्यालय ने मई में घोषणा की थी कि वह जांच करेगा कि इन अभियानों के दौरान अमेरिकी सेना ने निर्धारित लक्ष्य-चयन प्रक्रिया का पालन किया था या नहीं। हालांकि यह जांच हमलों की कानूनी वैधता पर नहीं, बल्कि सैन्य प्रक्रियाओं के अनुपालन पर केंद्रित होगी।

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