मौलाना फजलुर रहमान की पार्टी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के समर्थक सुप्रीम कोर्ट के गेट पर चढ़ते हुए
- फोटो : Agency (File Photo)
पाकिस्तान में और तीखे हो रहे राजनीतिक टकराव के बीच यह अंदेशा गहरा गया है कि सेना नेतृत्व ने पर्दे के पीछे सत्ता अपने हाथ में केंद्रित करनी शुरू कर दी है। सत्ताधारी पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) की तरफ से सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ आयोजित विरोध-प्रदर्शन और धरने को इसी सिलसिले में देखा जा रहा है। समझा जाता है कि पिछले हफ्ते इमरान खान के समर्थकों ने जिस तरह सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, सेना नेतृत्व उसका बदला लेने की तैयारी में जुटा हुआ है।
इसे देखते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने आशंका जताई है कि उन्हें अपमानित करने के लिए अब उनकी पत्नी बुशरा बेगम को दोबारा जेल में डाला जा सकता है। रविवार देर रात एक ट्वीट थ्रेड में उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेतृत्व के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और आगे उनकी पार्टी पर उसी तरह प्रतिबंध लगाने की तैयारी है, जिस तरह 1971 में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में अवामी लीग पर पाबंदी लगा दी गई थी। इन लोगों को इमरान खान की पिछले हफ्ते गिरफ्तारी के बाद हुई हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था।
पीटीआई समर्थकों ने सोशल मीडिया पर ऐसे अनगिनत पोस्ट डाले हैं, जिनमें इमरान खान को भी पिछले हफ्ते हुई हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किया जा सकता है। इसका संकेत इमरान खान ने अपने ट्वीट में दिया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें उस हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जो तब हुई, जब वे पुलिस की हिरासत में थे।
सत्ताधारी गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ धरना देने के फैसले को लेकर देश में कौतूहल भी है। यह धरना इस्लामाबाद के उस इलाके में हो रहा है, जिसे रेड जोन कहा जाता है। यानी सुरक्षा के लिहाज से इसे बेहद संवेदनशील माना जाता है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट पर जिस तरह सत्ताधारी नेताओं ने जुबानी हमला बोल रखा है, उससे भी माहौल बिगड़ रहा है। इसे कोर्ट के खिलाफ लोगों को भड़काने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के इमरान खान की रिहाई का आदेश देने के तुरंत बाद शहबाज शरीफ सरकार में मंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी मरियम औरंगजेब ने यह आपत्तिजनक बयान दिया था कि अब चीफ जस्टिस उमर अता बंदियाल को पीटीआई में शामिल हो जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के बाहर धरने का नेतृत्व पीडीएम के चेयरमैन मौलाना फजलुर रहमान करेंगे। वे जमात-ए-उलेमा इस्लाम (जेयूआई) पार्टी के प्रमुख हैँ। रविवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में औरंगजेब और गृह मंत्री राना सनाउल्लाह ने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन दोनों से मौलाना फजलुर रहमान से मिलने को कहा है। प्रधानमंत्री ने यह कदम सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से ‘खतरे’ की सूचना मिलने के बाद उठाया है।
गृह मंत्री सनाउल्लाह ने कहा कि उन्हें प्रशासन ने आगाह किया है कि बड़ी भीड़ जुटने के बाद उसे काबू में रखना बेहद मुश्किल होगा। पर्यवेक्षकों ने गृह मंत्री के इस बयान को सरकार की छवि बचाने की कोशिश माना है। सोशल मीडिया पर पीटीआई समर्थकों ने कहा है कि जब सत्ताधारी गठबंधन के चेयरमैन ही प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं, तो सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती है।