एक और ईरानी जहाज पर मंडरा रहा खतरा
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अमेरिका ने बुधवार को हिंद महासागर में श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास ईरान की नौसेना का फ्रिगेट आईआरआईएस डेना पर हमला किया था। इस बीच श्रीलंका के मंत्री ने संकेत दिया कि ईरान के एक और जहाज पर खतरा मंडरा रहा है।
मंत्री ने क्या बताया?
श्रीलंका ने गुरुवार को कहा कि वह उचित कदमों पर विचार कर रहा है, क्योंकि एक दूसरा ईरानी जहाज उसके क्षेत्रीय जलक्षेत्र में प्रवेश की अनुमति मांग रहा है। सरकार के प्रवक्ता और मंत्री नलिंदा जयथिसा ने संसद में विपक्ष के नेता सजित प्रेमदासा के सवाल के जवाब में कहा कि सरकार इस मामले से अवगत है और जहाज पर मौजूद लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदमों पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि हम क्षेत्रीय शांति बनाए रखने और जहाज पर सवार सभी लोगों की सुरक्षा के लिए इस मुद्दे को हल करने का प्रयास कर रहे हैं।
जयथिसा के अनुसार यह जहाज फिलहाल श्रीलंका के एक्सटेंडेड इकोनॉमिक जोन (EEZ) में इंतजार कर रहा है, लेकिन अभी वह देश के क्षेत्रीय जलक्षेत्र में प्रवेश नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक जहाज ने आपातकालीन सहायता की मांग की है।
ईरान ने अमेरिका को दी खुली चुनौती
इस हमले के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को खुली चुनौती दे दी है। अराघची ने अपने पोस्ट में लिखा कि अमेरिका ने ईरान के तट से 2,000 मील दूर समुद्र में एक जघन्य अपराध किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना के मेहमान, लगभग 130 नाविकों को ले जा रहे फ्रिगेट 'डेना' पर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिना किसी चेतावनी के हमला किया गया। उन्होंने आगे कहा कि मेरी बात याद रखना, अमेरिका को अपने इस कृत्य पर गहरा पछतावा होगा।
कब हुआ हमला?
हिंद महासागर में श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास ईरान की नौसेना का फ्रिगेट आईआरआईएस डेना 4 मार्च की तड़के डूब गया। यह घटना अमेरिका-इस्राइल-ईरान युद्ध के बीच गहरे समुद्री क्षेत्र में हुई पहली बड़ी नौसैनिक घटना मानी जा रही है। इससे संघर्ष के भारत के समुद्री क्षेत्र तक फैलने की आशंका बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार जहाज श्रीलंका के गाले शहर से करीब 40 नॉटिकल मील दक्षिण में डूबा। यह पोत हाल ही में विशाखापत्तनम में आयोजित बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास MILAN 2026 और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने के बाद अपने देश लौट रहा था।
श्रीलंका ने क्या जानकारी दी थी?
श्रीलंकाई नौसेना और रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक यह हमला पनडुब्बी से दागे गए टॉरपीडो के जरिए किया गया। स्थानीय समय के अनुसार सुबह 5:08 से 5:30 बजे के बीच जहाज से संकट संदेश मिला, जिसमें समुद्र के नीचे हुए बड़े विस्फोट से जहाज को भारी नुकसान और तेजी से पानी भरने की जानकारी दी गई। कुछ ही मिनटों में जहाज रडार से गायब हो गया और डूब गया।