कच्चे तेल से लबालब होने के बावजूद इराक इन दिनों बड़े आर्थिक संकट की ओर फिसलता जा रहा है। आलम यह है कि सरकार पास कर्ज चुकाने से लेकर कर्मचारियों को तनख्वाह देने तक के पैसे नहीं बचे हैं।
करना पड़ा मुद्र अवमूल्यन
जानकारों का कहना है कि इराक को 90 फीसदी राजस्व तेल गैस की बिक्री से मिलता है। लेकिन कोरोना काल में कीमत गिरने से खजाने को भारी नुकसान हुआ है। हालत ऐसी हो गई है कि दशको बाद पिछले माह उसे अपनी मुद्रा दीनार का अवमूल्यन करना पड़ा। इसके बाद बाजार में करीब सभी वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ गईं।
खर्च पांच अरब डॉलर, कमाई साढ़े तीन अरब ही.... तनख्वाह व पेंशन में हर माह पांच अरब डॉलर खर्च होते हैं। जबकि पिछले कुछ माह से तेल से मिलने वाला राजस्व घटकर साढ़े तीन अरब डॉलर रह गया है। नुकसान की भरपाई सरकार खजाने से पैसा निकालकर रही है।