पश्चिम एशिया में अचानक सैन्य तनाव बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इस्राइल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह अभियान ईरान से पैदा हुए अस्तित्व के खतरे को खत्म करने के लिए शुरू किया गया है। इस कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध की आशंका को तेज कर दिया है।
ट्रंप की चेतावनी कितनी सख्त मानी जा रही है?
ट्रंप ने अपने संदेश में कहा कि ईरान की सेना, पुलिस और रिवोल्यूशनरी गार्ड यदि हथियार डाल देते हैं तो उन्हें पूरी सुरक्षा दी जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि यह ईरान की जनता के लिए अपने भविष्य का फैसला करने का समय हो सकता है। ट्रंप ने संकेत दिया कि सैन्य कार्रवाई व्यापक स्तर पर जारी रह सकती है।
ईरानी जनता से नेतन्याहू की अपील क्यों अहम है?
नेतन्याहू ने ईरान के अलग-अलग समुदायों जैसे फारसी, कुर्द, अज़ेरी, बलोच और अहवाजी लोगों से मौजूदा शासन के खिलाफ उठ खड़े होने की अपील की। उन्होंने कहा कि संयुक्त कार्रवाई का उद्देश्य ईरानी जनता को स्वतंत्र और शांतिपूर्ण भविष्य का रास्ता देना है। इस बयान को सैन्य के साथ राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।