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शीर्ष नेतृत्व में फूट की अटकलों को ईरान ने किया खारिज: उपराष्ट्रपति बोले- सीजफायर प्रस्ताव को लेकर मतभेद नहींं

Sun, 07 Jun 2026 04:05 PM IST
Rahul Kumar आईएएनएस, तेहरान
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उपराष्ट्रपति मोहम्मद रेजा आरेफ - फोटो : आईएएनएस
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हाल ही में अमेरिकी मीडिया ने दावा किया कि ईरान की सेना और शीर्ष नेतृत्व में सीजफायर मसौदे को लेकर भारी मतभेद है। अब देश के उप राष्ट्रपति मोहम्मद रेजा आरेफ ने इसे सिरे से नकारा है। उन्होंने इसे अफवाह करार दिया है। ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रेजा आरेफ ने इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) बातचीत में कहा कि देश के सभी वरिष्ठ अधिकारी वार्ता प्रस्तावों को लेकर पूरी तरह एकजुट हैं और बातचीत के मसौदे या प्रस्तावों पर किसी भी तरह के मतभेद की संभावना को खारिज किया है।

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'प्रस्तावों को लेकर अधिकारियों के बीच "कोई मतभेद नहीं'
आईआरएनए के अनुसार, ईरानी सीमा शुल्क प्रशासन के दौरे के दौरान आरिफ ने कहा कि अमेरिका के साथ वार्ताओं में तेहरान ने एक स्पष्ट और समन्वित रणनीति अपनाई है। उन्होंने कहा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने वार्ताओं में एक निश्चित रणनीति अपनाई है और सभी अधिकारियों ने पूर्ण समन्वय के साथ उसका पालन किया है। आरिफ ने आगे कहा कि वार्ता के पाठ और प्रस्तावों को लेकर अधिकारियों के बीच "कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान युद्ध और पिछले वर्ष 12-दिवसीय संघर्ष से ईरान ने संकट प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुभव और सबक हासिल किए हैं।

आरिफ के अनुसार, इन अनुभवों ने देश की निर्णय-प्रक्रिया और राष्ट्रीय रणनीतियों को और अधिक मजबूत बनाने में मदद की है। आरिफ का यह बयान ईरान और अमेरिका के बीच चल रही अप्रत्यक्ष वार्ताओं के संदर्भ में आया है, जिनका उद्देश्य देश के खिलाफ अमेरिका-इजरायल द्वारा छेड़े गए युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करना है। संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हवाई हमले से शुरू हुआ था। आरिफ ने "दो थोपे गए युद्धों" के प्रबंधन में ईरान के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने संकट प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सबक सीखे हैं।
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उन्होंने कहा कि युद्धकाल के दौरान कई नौकरशाही प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया और सरकारी अधिकारों का उपयोग कर आयात, माल की उतराई तथा सीमा शुल्क निकासी की प्रक्रिया को तेज किया गया। इसके परिणामस्वरूप सीमा शुल्क विभाग नई व्यवस्थाओं के माध्यम से प्रभावी ढंग से काम करने में सफल रहा।

उपराष्ट्रपति ने देशभर के सभी सीमा शुल्क कार्यालयों और बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। साथ ही उन्होंने उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम परिवहन गलियारों को शीघ्र पूरा करने का आह्वान किया। आरिफ ने दावा किया कि पड़ोसी देशों के साथ संबंध मजबूत करने की ईरान की रणनीति को रमजान के बाद और अधिक गति मिली है। उन्होंने राष्ट्रीय विकास योजनाओं में क्षेत्रीय अवसरों तथा उन देशों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई, जो ईरान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा माने जाते हैं।

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