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Khamenei: महिलाओं के विरोध के बीच ईरानी नेता खामेनेई के बदले सुर; कहा- महिला एक नाजुक फूल, घरेलू नौकरानी नहीं

Thu, 19 Dec 2024 10:55 AM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान

सार

खोमेनेई का यह बयान उस वक्त आया है जब ईरान में महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर सड़कों पर उतरकर आवाज बुलंद कर रही हैं। सख्त हिजाब कानून को लेकर महिलाएं ईरानी शासन के खिलाफ विरोध में हैं। खामेनेई ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि महिला को घर में फूल की तरह माना जाना चाहिए। 
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अयातुल्ला अली खामेनेई - फोटो : ANI
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विस्तार
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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने कहा कि महिला एक नाजुक फूल है, वह कोई घरेलू नौकरानी नहीं है। महिला को घर में एक फूल की तरह माना जाना चाहिए। फूल की देखभाल की जानी चाहिए। खोमेनेई का यह बयान उस वक्त आया है जब ईरान में महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर सड़कों पर उतरकर आवाज बुलंद कर रही हैं। सख्त हिजाब कानून को लेकर महिलाएं ईरानी शासन के खिलाफ विरोध में हैं। 

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खामेनेई ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि महिला एक नाजुक फूल है, कोई नौकरानी नहीं। महिला को घर में फूल की तरह माना जाना चाहिए। फूल की देखभाल की जानी चाहिए। इसकी ताजगी और मीठी खुशबू का लाभ उठाया जाना चाहिए और हवा को सुगंधित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

खामेनेई ने लिखा कि महिला और पुरुष एक-दूसरे के लिए बनाए गए हैं। कुरान में लिखा गया है कि अल्लाह ने तुम्हारे लिए तुम्हीं में से जोड़े बनाए हैं। पुरुष और महिलाएं अच्छे और शुद्ध जीवन की तलाश में समान हैं, जो कि मानव जाति के निर्माण का उद्देश्य है और कोई भी दूसरे से श्रेष्ठ नहीं है। कुरान में कहा गया है कि जो कोई भी नेक काम करता है, चाहे वह पुरुष हो या महिला और वह आस्तिक है, हम उसे एक अच्छा और शुद्ध जीवन देंगे। 
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पुरुष और महिलाओं की लैंगिक भूमिका को लेकर खामेनेई ने कहा कि परिवार में महिलाओं और पुरुषों की भूमिकाएं अलग-अलग होती हैं। पुरुष परिवार के खर्चों के लिए ज़िम्मेदार होता है, जबकि महिला बच्चे पैदा करने के लिए जिम्मेदार होती है। इसका मतलब यह नहीं है कि वे श्रेष्ठ हैं। वे अलग-अलग गुण हैं। पुरुषों और महिलाओं के अधिकारों की गणना इनके आधार पर नहीं की जाती है। हालांकि बौद्धिक और आध्यात्मिक क्षमताओं के मामले में दोनों में असीम संभावनाएं होती हैं और इस मामले में वे एक दूसरे से अलग नहीं हैं।

पश्चिमी देशों पर साधा निशाना
खामेनेई ने कहा कि दुनिया के पूंजीपति महिलाओं के मुद्दे पर हस्तक्षेप करते हैं। उनका लक्ष्य मानवतावाद की भावना को बढ़ावा देना या नागरिक कर्तव्य को पूरा करना नहीं है। बल्कि हस्तक्षेप करना और अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करना है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को वित्तीय स्वतंत्रता और आजादी मिलनी चाहिए। यह विचार सतह पर तो अच्छा लगता था, लेकिन इसकी वास्तविकता अलग थी। पूंजीपतियों को कारखानों को श्रमिकों की जरूरत थी। वे महिलाओं को मजदूर के तौर पर काम पर रखना चाहते थे और उन्हें पुरुषों से कम वेतन देना चाहते थे।

खामेनेई ने कहा कि आज पश्चिम में जो अनैतिकता है, वह हाल ही में पनपी है। 18वीं और 19वीं सदी की किताबों में यूरोपीय महिलाओं के बारे में वर्णन है कि उस समय कई सामाजिक मानदंड थे। जैसे शालीन कपड़े पहनना। यह आज पश्चिम में मौजूद नहीं हैं। आज कुछ लोग मातृत्व को नकारात्मक रूप में पेश करते हैं। अगर कोई कहता है कि परिवारों के लिए बच्चे पैदा करना ज़रूरी है, तो उनका मज़ाक उड़ाया जाता है और कहा जाता है कि आप सिर्फ़ बच्चे पैदा करने के लिए महिलाओं को चाहते हैं। जबकि मातृत्व एक सम्मान है।

इसलिए हो रहा विरोध
ईरान में महिलाएं शासन के खिलाफ विरोध में हैं। खामेनेई शासन ने यहां पर शरिया कानून को सख्त बना दिया है। इसके मुताबिक अनिवार्य हिजाब कानून बन गया और महिलाओं का सार्वजनिक स्थानों पर खुद को ढकना जरूरी हो गया। इसे लेकर खामेनेई का कहना है कि उनके शासन के खिलाफ महिलाओं के विरोध प्रदर्शन के लिए दुश्मन जिम्मेदार हैं। 

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