चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बुधवार को बीजिंग में अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से मुलाकात की। चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने इस बैठक की जानकारी दी। हालांकि, इसमें अधिक विवरण साझा नहीं किया गया।
अराघची की यह पहली चीन यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब पश्चिम एशिया में तनाव जारी है।
इस बीच, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने उम्मीद जताई कि चीन इस यात्रा के दौरान ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण कम करने की बात करेगा और क्षेत्र में तनाव घटाने की दिशा में संदेश देगा।
इससे पहले ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने जानकारी दी थी कि इस दौरे के दौरान अराघची अपने चीनी समकक्ष के साथ द्विपक्षीय संबंधों और पश्चिम एशिया में जारी संकट समेत क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
अपने चीन दौरे को लेकर अराघची ने क्या कहा था?
अपनी यात्रा के दौरान अराघची चीन के अपने समकक्ष वांग यी के साथ दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने और मौजूदा वैश्विक स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। चीन के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि अराघची की यह यात्रा वांग यी के निमंत्रण पर हो रही है और दोनों नेताओं के बीच बातचीत होगी। अराघची ने टेलीग्राम पर एक बयान में कहा कि यह यात्रा कई देशों के साथ जारी कूटनीतिक बातचीत का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस दौरान वह चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
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चीन से पहले तीन देशों का किया दौरा
कुछ दिनों पहले ही उन्होंने पाकिस्तान, ओमान और रूस का दौरा किया है। ये दौरे पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच बातचीत का हिस्सा हैं। पिछले महीने रूस दौरे के दौरान अराघची ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। पुतिन ने कहा था कि रूस पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए हरसंभव प्रयास करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के लोग अपनी संप्रभुता के लिए बहादुरी से लड़ रहे हैं।
इस मुलाकात में अराघची ने अमेरिका और इस्राइल से संघर्ष और हमलों पर भी विस्तार से चर्चा की। पुतिन ने कहा कि रूस ईरान के हितों का समर्थन करेगा और क्षेत्र में शांति बहाल करने में मदद करेगा।
पाकिस्तान दौरे के दौरान अराघची ने ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की संभावनाओं पर भी चर्चा की। इसके बाद ओमान की यात्रा में उन्होंने समुद्री सुरक्षा पर फोकस दिया। वहां होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चर्चा हुई, जो एक अहम समुद्री मार्ग है। अराघची ने कहा कि ईरान और ओमान दोनों इस जलडमरूमध्य के तटीय देश हैं, इसलिए आपसी बातचीत जरूरी है, खासकर जब यहां से सुरक्षित आवाजाही एक बड़ा वैश्विक मुद्दा बन गई है।