स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास क्वेश्म द्वीप के करीब एक ईरानी वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाए जाने की खबर है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई और तीन घायल हुए। ब्रिटेन के समुद्री निगरानी संगठन ने भी जहाज पर प्रोजेक्टाइल से हमले की पुष्टि की, जबकि अमेरिकी सेना की ओर से तत्काल कोई बयान नहीं आया।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरान के एक वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाए जाने की खबर है। ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, रविवार तड़के क्वेश्म द्वीप के पास जहाज पर हमला हुआ, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। सरकारी मीडिया ने बताया कि घटना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नजदीक हुई। हालांकि, जहाज को किसने और किस हथियार से निशाना बनाया, इसकी तत्काल कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
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जहाज को प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट
ब्रिटेन के यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी अलग से बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे एक जहाज को प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया। हालांकि, निगरानी संस्था ने घटना को लेकर तत्काल विस्तृत जानकारी साझा नहीं की। घटना में प्रभावित जहाज की पहचान और हमले की परिस्थितियों को लेकर भी फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।
अमेरिकी सेना की ओर से तत्काल कोई बयान नहीं
इस घटना पर अमेरिकी सेना की ओर से तत्काल कोई बयान सामने नहीं आया है। इससे पहले अमेरिका ने ईरान के झंडे वाले जहाजों को निशाना बनाया था और ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखी थी।
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ईरान की अमेरिका को खुली चेतावनी
ईरान और अमेरिका के तनाव के बीच ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अमेरिकी नौसेना को होर्मुज स्ट्रेट के आसपास से दूर रहने की चेतावनी दी है।
ईरानी अधिकारी ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने इस अहम जलमार्ग पर अमेरिकी नियंत्रण की बात कही थी।
ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नेवी के डिप्टी पॉलिटिकल कमांडर ने अमेरिकी दावे को चुनौती देते हुए कहा कि अगर होर्मुज स्ट्रेट पर वाशिंगटन का नियंत्रण है तो वह अपने किसी युद्धपोत को इसके 100 किलोमीटर के दायरे में भेजकर दिखाए।
ईरानी अधिकारी ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना इस इलाके के जोखिम से अच्छी तरह वाकिफ है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के आसपास पहुंचने वाले किसी भी अमेरिकी जहाज को ईरानी सेना की ओर से जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।