अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उसने फिर से युद्ध शुरू करने की गलती की, तो उसे पहले से कहीं अधिक कड़ा जवाब झेलना पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं संघर्ष विराम के दौरान अपनी क्षमताओं को और मजबूत कर चुकी हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में पहले से ही तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।
डोनाल्ड ट्रंप अचानक व्हाइट हाउस लौटे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना वीकेंड गोल्फ कार्यक्रम अचानक रद्द कर दिया और वे तुरंत व्हाइट हाउस लौट आए। इसके साथ कई वरिष्ठ प्रशासनिक और सैन्य अधिकारियों ने अपने निर्धारित अवकाश और छुट्टियां रद्द कर दी हैं। इस फैसले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर कई तरह की अटकलें तेज हो गई हैं।
CBS न्यूज की रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ईरान के खिलाफ संभावित नए सैन्य हमलों पर विचार कर सकता है। अगर अंतिम समय में चल रही शांति वार्ताएं किसी समझौते तक नहीं पहुंचती हैं, तो अमेरिका नए सैन्य हमलों की योजना बना सकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप प्रशासन इस समय विभिन्न सैन्य विकल्पों की समीक्षा कर रहा है, हालांकि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
व्हाइट हाउस में हाई-लेवल बैठक
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप ने अपने वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों के साथ व्हाइट हाउस में एक अहम बैठक की, जिसमें ईरान के साथ जारी तनाव और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई। इस बैठक में उपराष्ट्रपति, रक्षा मंत्री, सीआईए निदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत लगातार चल रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है।
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
इसी बीच ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने बयान जारी करते हुए कहा है कि ईरानी सेना किसी भी आक्रामक कदम का कड़ा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रेजा तलई-निक ने भी तीखा बयान देते हुए कहा कि यदि अमेरिका ईरान के अधिकारों का सम्मान नहीं करता, तो उसे और भी बड़ी असफलता का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इस्राइल के लिए इस संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता ईरान की मांगों को स्वीकार करना है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि संघर्ष जारी रहने पर इसका असर केवल क्षेत्र ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिलेगा।
ट्रंप और कतर के अमीर की फोन पर बातचीत
कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर अहम बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की, जिसमें पाकिस्तान द्वारा की जा रही मध्यस्थता कोशिशें भी शामिल रहीं। कतर के विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, बातचीत का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करना और स्थिरता बनाए रखना था। खासतौर पर पाकिस्तान की उस भूमिका पर चर्चा हुई, जिसमें वह अमेरिका और ईरान के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य से 25 जहाजों की आवाजाही
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटों में होर्मुज जलडमरूमध्य से कम से कम 25 जहाज सुरक्षित रूप से गुजरे हैं। इनमें तेल टैंकर, कंटेनर जहाज और अन्य वाणिज्यिक पोत शामिल थे। आईआरजीसी के अनुसार, ये सभी जहाज उनकी नौसेना की अनुमति और सुरक्षा समन्वय के बाद इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरे। इससे पहले गुरुवार और शुक्रवार के बीच 35 जहाजों के यहां से गुजरने की बात आईआरजीसी ने कही थी।
फुटबॉल वीजा विवाद पर ईरान का इनकार
इसी बीच ईरान की फुटबॉल फेडरेशन ने उन खबरों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि तीन राष्ट्रीय खिलाड़ियों के अमेरिकी वीजा आवेदन खारिज कर दिए गए हैं। फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि डिफेंडर शोजा खलीलजादेह, एहसान हजसाफी और फॉरवर्ड मेहदी तारेमी से जुड़ी रिपोर्टें पूरी तरह गलत हैं। आधिकारिक बयान में कहा गया कि वीजा प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार पूरी की गई है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया था कि कैंप से अनुपस्थित खिलाड़ियों को संभावित विकल्प के रूप में तैयार रहने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन फेडरेशन ने इन दावों को भी निराधार बताया है।