डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : Amar Ujala
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अगर अमेरिका इस समय अपनी कार्रवाई रोक देता है, तो ईरान को दोबारा खड़ा होने में करीब 20 साल लग सकते हैं। ट्रंप ने इस दावे के साथ संकेत दिया कि अमेरिकी दबाव और सैन्य रणनीति ने ईरान की क्षमताओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
अमेरिका की कार्रवाई निर्णायक स्थिति पर पहुंच चुकी है
फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि मौजूदा हालात में अमेरिका की कार्रवाई निर्णायक स्थिति में पहुंच चुकी है। उनका कहना था कि यह दबाव ही है जिसने ईरान को कमजोर किया है और अगर इसे अभी जारी रखा गया तो संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है।
ट्रंप ने यह भी दोहराया कि उनकी प्राथमिकता ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने समय पर हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो ईरान अब तक परमाणु शक्ति बन चुका होता, जिससे वैश्विक संतुलन पर गंभीर असर पड़ता।
होर्मुज को लेकर क्या दावा?
इस बीच, यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि अमेरिका ने अपनी नाकेबंदी के पहले 24 घंटों में ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों से आने-जाने वाले सभी समुद्री ट्रैफिक को रोक दिया है। अमेरिका के अनुसार, यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हुई
संघर्ष के बीच, इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई। हालांकि, ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अगले दो दिनों में बातचीत का दूसरा दौर हो सकता है। उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसमि मुनीर की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनकी कोशिशों से वार्ता को आगे बढ़ने की संभावना बनी है।
ईरान को लेकर क्या बोले?
ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी ऐसे समझौते के पक्ष में नहीं हैं, जिससे ईरान को जीत का एहसास हो। उनका कहना है कि अमेरिका की रणनीति स्पष्ट है, ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना और उसे रणनीतिक रूप से कमजोर बनाए रखना।