ओमान सागर में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच टकराव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि अमेरिका ने उसके मालवाहक जहाज तोस्का (TOUSKA) पर हमला कर उसे अपने कब्जे में ले लिया है। तेहरान ने इस कार्रवाई को समुद्री डकैती करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया देने की चेतावनी दी है।
ईरान के सैन्य मुख्यालय हजरत खतम अल-अंबिया की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अमेरिकी सेना ने ओमान सागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरानी जहाज पर हमला किया। बयान के अनुसार, अमेरिकी मरीन ने जहाज पर चढ़कर उसके नेविगेशन सिस्टम को निष्क्रिय कर दिया और उसे जब्त कर लिया।
अमेरिका का क्या कहना है?
वहीं, अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने इस कार्रवाई को सही ठहराया है। अमेरिका का दावा है कि मालवाहक जहाज अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहा था। सेंटकॉम के अनुसार, गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर USS स्प्रुअंस (DDG 111) ने जहाज को रोका और कई बार चेतावनी दी। लेकिन जब जहाज के क्रू ने आदेशों का पालन नहीं किया, तो अमेरिकी जहाज ने फायरिंग कर उसके इंजन को निष्क्रिय कर दिया। इसके बाद अमेरिकी मरीन ने जहाज पर चढ़कर उसे अपने कब्जे में ले लिया। अमेरिका ने इस पूरी कार्रवाई को पेशेवर और संतुलित बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि जहाज पर अमेरिकी मरीन तैनात हैं और वे अंदर की जांच कर रहे हैं कि उसमें क्या सामग्री मौजूद है। इस जहाज का नाम 'तोस्का' बताया जा रहा है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्या दावा किया?
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि इस जहाज को अमेरिकी नौसेना के गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर ने ओमान की खाड़ी में रोका। इसे रुकने की चेतावनी दी गई लेकिन उसने आदेश नहीं माना और इसके बाद नौसेना ने 'सीधा हमला कर इंजन कक्ष में छेद कर दिया' और जहाज को रोक दिया।
वार्ता से पहले तनावपूर्ण स्थिति
यह घटना उस समय सामने आई, जब ट्रंप ने पहले घोषणा की थी कि अमेरिकी वार्ताकार सोमवार को पाकिस्तान जाकर ईरान के साथ दूसरे दौर की बातचीत करेंगे। इससे दो हफ्ते के अस्थायी युद्धविराम को आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही थी। व्हाइट हाउस के अनुसार, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे और उनके साथ स्टीव विटकॉफ तथा जेरेड कुशनर भी शामिल होंगे, जिन्होंने पहले दौर की लंबी वार्ता में भी भाग लिया था।