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West Asia: 'ईरान-अमेरिका समझौते के करीब लेकिन अभी डील नहीं हुई है ', उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बड़ा बयान

Fri, 29 May 2026 08:38 AM IST
रिया दुबे मैरीलैंड (अमेरिका), एएनआई

सार

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर समझौते की बातचीत अंतिम चरण में है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि दोनों देश डील के काफी करीब हैं, लेकिन यूरेनियम संवर्धन समेत कुछ मुद्दों पर सहमति अभी बाकी है। आइए विस्तार से जानते हैं। 
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जेडी वेंस ने क्या बताया? - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने और दीर्घकालिक शांति स्थापित करने की दिशा में बातचीत अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही है। हालांकि, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच अभी भी कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है और यह कहना जल्दबाजी होगी कि अंतिम समझौता कब और क्या हो पाएगा।

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जेडी वेंस ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दोनों पक्ष कुछ बिंदुओं और विशेष रूप से यूरेनियम संवर्धन के मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम अभी वहां नहीं पहुंचे हैं, लेकिन काफी करीब हैं और बातचीत जारी रहेगी।
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वेंस ने दावा किया कि अगर समझौता हो जाता है तो इससे होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोला जा सकेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका पहले ही ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को काफी कमजोर कर चुका है और उसके परमाणु कार्यक्रम को लंबे समय तक पीछे धकेलने की स्थिति में है। उनके अनुसार यह अमेरिकी जनता के हित में होगा।

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युद्धविराम बढ़ाने का प्रस्ताव

रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में मौजूदा युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ाने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य पर औपचारिक वार्ता शुरू करने की योजना शामिल है। अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच एक रूपरेखा तैयार हो चुकी है, लेकिन उसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी नेतृत्व की मंजूरी मिलना अभी बाकी है।

हालांकि, ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा है कि किसी समझौते को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है और न ही इसकी पुष्टि हुई है।

परमाणु कार्यक्रम सबसे बड़ा मुद्दा

अमेरिका लंबे समय से ईरान से उच्च स्तर के संवर्धित यूरेनियम का उत्पादन बंद करने और मौजूदा भंडार को खत्म करने की मांग करता रहा है। वाशिंगटन का मानना है कि इस सामग्री का उपयोग परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है।

वेंस ने कहा कि अमेरिका को लगता है कि ईरान इस बार अच्छी नीयत के साथ बातचीत कर रहा है। हालांकि, अप्रैल में युद्धविराम लागू होने के बाद से राष्ट्रपति ट्रंप कई बार यह कह चुके हैं कि समझौता करीब है, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और प्रतिबंधों में राहत

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संभावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने का प्रावधान हो सकता है। इसके तहत ईरान को 30 दिनों के भीतर समुद्री मार्ग में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाना होगा।

इसके बदले अमेरिका अपनी समुद्री नाकेबंदी हटाने और ईरान को तेल निर्यात फिर से शुरू करने के लिए कुछ प्रतिबंधों में छूट देने पर विचार कर सकता है।

ट्रंप ने नहीं दी अंतिम मंजूरी

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप को प्रस्तावित समझौते की जानकारी दे दी गई है, लेकिन उन्होंने अभी तक इस पर अंतिम मंजूरी नहीं दी है। बताया जा रहा है कि वह आने वाले कुछ दिनों में इस पर फैसला ले सकते हैं।

इस बीच ईरान के सरकारी मीडिया में 14 बिंदुओं वाले एक कथित समझौता मसौदे की जानकारी सामने आई थी, जिसमें अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, ईरान के आसपास से अमेरिकी बलों की वापसी और होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य यातायात बहाल करने जैसे प्रावधान शामिल बताए गए थे। हालांकि व्हाइट हाउस ने इस दस्तावेज को पूरी तरह मनगढ़ंत बताया है।

युद्धविराम उल्लंघन के आरोप

समझौते की बातचीत के बीच दोनों देशों ने एक-दूसरे पर युद्धविराम उल्लंघन के आरोप भी लगाए हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने क्षेत्र में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाया। वहीं ईरानी मीडिया ने एक अमेरिकी विमान या ड्रोन को मार गिराने का दावा किया।

हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि कोई भी अमेरिकी विमान नहीं गिराया गया है और सभी हवाई संसाधन सुरक्षित हैं।

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) और तेल का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में तनाव और जलमार्ग के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर बड़ा प्रभाव पड़ा है।

ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को न केवल क्षेत्रीय शांति बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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