ब्रिटिश तेल टैंकर विवाद के बीच ईरान का कहना है कि वह संयुक्त व्यापक कार्ययोजना (ईरान नाभिकीय समझौता) से जुड़े देशों के साथ बैठक करेगा। यह आकस्मिक बैठक 28 जुलाई को वियना में रखी गई है, जहां 2015 के इस समझौते को बचाने पर चर्चा होगी। ईरान के नाभिकीय कार्यक्रम को सीमित करने के लिए यह समझौता पिछले साल अमेरिका के पीछे हटने और ईरान पर कई प्रतिबंध लगाने के बाद से संकट में है।
इससे पहले सोमवार को राष्ट्रपति हसन रोहानी ने प्रधानमंत्री अदेनल अब्दे महदी के साथ बैठक में कहा था कि ईरान हमेशा खाड़ी में रक्षा व नौ-परिवहन को बनाए रखने वाली शक्ति रहा है। इस समय क्षेत्र में सुरक्षा और स्थायित्व की कमी है।
नाभिकीय समझौते में यूरोपीय यूनियन, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता रखने वाले पांचों देश और जर्मनी शामिल थे। अमेरिका के अलग होने के बाद समझौते का भविष्य संकट में माना जा रहा है। ईरान का दावा है कि इस बैठक में विभिन्न देशों के मंत्री व राजनीतिक अधिकारी शामिल होंगे।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बीते शुक्रवार अमेरिकी सहयोगी ब्रिटेन के तेल टैंकर स्टेना इंपेरो को बंदर अब्बास बंदरगाह से अपने अपने कब्जे में ले लिया था। ईरान का आरोप है कि टैंकर ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों को तोड़ा है।
ईरान द्वारा जारी वीडियो में इस टैंकर में 18 भारतीय, तीन रूसी ओर कुछ अन्य देशों के क्रू सदस्य नजर आए थे। इसे ईरान की बदले की कार्रवाई बताया जा रहा है। चार जुलाई को ब्रिंटेन ने ईरान के तेल टैंकर को सीरिया को तेल सप्लाई करने के आरोप में भूमध्य सागर से अपने कब्जे में ले लिया था।