ईरान के आईआरजीसी के नेता का बयान।
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समुद्र के नीचे बिछीं केबल्स कैसे ले जाती हैं इंटरनेट।
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ईरान ने होर्मुज में बिछीं अंडरसी केबल्स काटने की धमकी क्यों दी?
ईरान का पहला मकसद अमेरिका और इस्राइल को दोबारा सैन्य हमला करने से रोकना है। दरअसल, खाड़ी देशों, जैसे- संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब, आदि में अमेरिका की माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और गूगल जैसी प्रमुख टेक कंपनियों के साथ मिलकर एआई, डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश किया है। ईरान का मानना है कि ये खाड़ी देश और टेक कंपनियां अपने अरबों डॉलर के निवेश पर खतरे को देखते हुए अमेरिकी प्रशासन पर हमला न करने का दबाव बना सकती हैं।
फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्र तल पर कई प्रमुख केबल्स, जैसे- फैल्कन (FALCON), एएई-1 और गल्फ ब्रिज इंटरनेशनल बिछे हुए हैं। अमेरिका के हमले की स्थिति में ईरान इन्हीं सबसी केबल्स को निशाना बनाकर खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था, बैंकिंग और डिजिटल कनेक्टिविटी को लंबे समय के लिए प्रभावित करने की योजना बना रहा है।
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दुनिया के लिए कितनी जरूरी हैं अंडरसी केबल्स।
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- ईरान की योजना केवल केबल काटने की ही नहीं, बल्कि हमले के बाद उनके मरम्मत के काम को रोकने की भी है। युद्ध क्षेत्र के जोखिम, विशेष मरम्मत जहाजों की कमी, बीमा की उच्च लागत और समुद्री परमिट मिलने में देरी की वजह से केबल्स को ठीक करने में लंबा समय लग सकता है।
- नेटवर्क ऑपरेटर प्रभावित डेटा ट्रैफिक को जमीनी संपर्कों या अन्य वैकल्पिक समुद्री मार्गों पर डायवर्ट करने की कोशिश करेंगे। हालांकि, सैटेलाइट (उपग्रह) नेटवर्क इसका पूर्ण विकल्प नहीं बन सकता, क्योंकि यह काफी महंगा है और इसकी क्षमता बहुत सीमित होती है।
होर्मुज में अंडरसी केबल काटी गईं तो क्या भारत पर असर हो सकता है?
अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछी अंडरसी केबल्स को काटता है, तो भारत के समग्र इंटरनेट पर सीधा और बड़ा संकट नहीं आएगा, लेकिन खाड़ी देशों के साथ भारत के संपर्क और कुछ विशिष्ट सेवाओं पर आंशिक असर जरूर पड़ सकता है।