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खामेनेई की आंखों से छलके आंसू नहीं 'अंगारे' थे, पश्चिम एशिया में तेज हुई युद्ध की संभावना!

Wed, 08 Jan 2020 12:15 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका से लिया सीधा पंगा
  • बड़ा सवाल,क्या ईराक बन जाएगा ईरान
  • ईरान ने बगदाद एयरबेस पर दागी मिसाइलें
  • ट्रंप ने कहा, ऑल इन वेल
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Iranian Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei - फोटो : Iran Press
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विस्तार
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ईरान ने अपने जनरल कासिम सुलेमानी पर अमेरिकी ड्रोन हमले और उनके मारे जाने के बाद बदला लेते हुए दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश से पंगा ले लिया है। ईरान ने इराक के अमेरिकी सैन्यबेस को टारगेट करके दर्जनभर मिसाइलें दागीं। ईरान की जवाबी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए एक पूर्व राजनयिक ने कहा कि इसकी पूरी संभावना थी। सूत्रों का कहना है कि जनरल सुलेमानी के मारे जाने के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह खामेनेई की आंखों से आंसू नहीं 'अंगारे' निकले थे।

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नाम न छापने की शर्त पर सूत्र ने कहा कि अगर दुनिया नहीं चेती, तो आगे की तस्वीर काफी चिंताजनक हो सकती है। ईरान भी ईराक बन सकता है या फिर दुनिया एक बड़ा युद्ध झेल सकती है। इसका सबसे बड़ा असर भारत जैसे विकासशील देशों पर भी बुरी तरह से पड़ने के आसार हैं।

आ सकती है युद्ध की नौबत

ईरान की इस प्रतिक्रिया पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सधी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, ऑल इज वेल यानी अभी सब ठीक है। राष्ट्रपति ट्रंप ने जल्द ही बयान जारी करने के लिए कहा है। समझा जा रहा है कि अमेरिका ईरान की प्रतिक्रिया से हुए नुकसान का आकलन करके प्रतिक्रिया दे सकता है। अमेरिका में भारत के राजदूत रहे ललित मान सिंह ने कहा कि ईरान गुस्से में था। उसका जनरल मारा गया है। ईरान ने इराक एयरबेस पर मिसाइल दागकर अपनी प्रतिक्रिया दे दी है। ईरानी विदेश मंत्री  जवाद जरीफ ने इसे आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया है, लेकिन इंतजार कीजिए।

अभी इतने भर से अमेरिका और ईरान में युद्ध भड़कने की स्थिति नहीं आने वाली है। ललित मान सिंह का कहना है कि अमेरिका की प्रतिक्रिया आने दीजिए। राष्ट्रपति ट्रंप का बयान जारी होने दीजिए। अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत का कहना है कि उन्हें नहीं लग रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच में युद्ध की नौबत आएगी, क्योंकि अमेरिका में युद्ध की अनुमति वहां की कांग्रेस देगी।

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सिंह के अनुसार जहां तक मैं सोचता हूं, यदि ईरान आगे और हमला करता है या अमेरिकी नागरिकों, प्रतिष्ठानों को निशाना बनाता है, तब कोई युद्ध जैसे हालात पैदा होंगे। उनका कहना है कि ईरान के इस मिसाइल से हमले के बाद दुनिया के देश इसे गंभीरता से लेंगे और अमन का प्रयास तेज होगा।

ग्लोबल अर्थव्यवस्था को लगेगा धक्का

ललित मान सिंह का कहना है कि अमेरिका और ईरान के टकराव को हल्के में मत लीजिए। यदि टकराव बढ़ा तो कच्चे ईधन तेल की कीमतों में भारी उछाल आएगा। इसका संकट भी खड़ा होगा। क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति काफी बाधित होगी। वैसे भी पिछले कुछ दिनों से कच्चे तेल के तेजी से दाम बढ़े हैं। भारत जैसे देश की अर्थव्यवस्था पर इसका विपरीत असर पड़ना तय माना जा रहा है। अकेले ईरान में हजारों भारतीय हैं। खाड़ी देशों में 40 लाख से अधिक भारतीय हैं।

यदि युद्ध जैसे हालात बनते हैं तो न केवल काम धंधे प्रभावित होंगे, बल्कि वहां से सुरक्षित लाना भी बड़े आर्थिक बोझ जैसा रहेगा। ललित मान सिंह का कहना है कि इसका भारत जैसे विकासशील देश पर काफी तेजी से असर पड़ेगा। पूर्व राजनयिक के अनुसार इस पूरे में मामले में शुरुआत अमेरिका ने की है। राष्ट्रपति ट्रंप ने जनरल सुलेमानी के काफिले पर हमले का आदेश दिया था। इसलिए ईरान ने पहली प्रतिक्रिया देकर अपना गुस्सा जाहिर कर दिया है। लेकिन अभी भी दोनों देश खुलकर सामने नहीं आए हैं।

खेमेबंदी चल रही है

अफगानिस्तान से हाल में लौटे एक भारतीय राजनयिक का कहना है कि खेमेबंदी चल रही है। अफगानिस्तान में तालिबान के नेताओं ने ईरान के राजनयिकों से भेट करके उन्हें साथ देने का भरोसा जताया है। कुछ और देशों से ईरान के राजनयिक संपर्क कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि अमेरिका भी स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। हालांकि दुनिया के देशों को अमेरिका और ईरान के टकराव के बाद पैदा होने वाले हालात का अंदाजा है। इसलिए उन्हें उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में युद्ध जैसी आशंका के बादल छंट जाएंगे।

क्या ईरान, इराक बन जाएगा?

पूर्व भारतीय राजनयिकों का कहना है कि स्थिति काफी तनावपूर्ण है। यदि टकराव की स्थिति आती है और यह अमेरिका और ईरान के बीच में बनी रहती है तो ईरान में काफी अधिक नुकसान होगा। अमेरिका ईरान से हजारों किमी दूर है। ईरान का अमेरिकी भू-भाग तक हमला कर पाना आसान नहीं होगा। जबकि अमेरिका के लिए ईरान पर हमला करना आसान है। ईरान अपने आस-पास के अमेरिकी सैन्य बेसों, तैनात युद्धपोतों को ही निशाना बना सकता है। हालांकि सभी का मानना है कि अभी इस तरह की स्थिति आने की संभावना काफी कम है।

 

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