ताजा हमलों में यूरोप में अमेरिकी ठिकानों पर भी निशाना बनाया गया है। विशेषज्ञों का दावा है कि हमले करने वाला संगठन मुखौटा भी हो सकता है। गौरतलब है कि ये हमले ऐसे समय किए गए हैं, जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम को लेकर बातचीत हो रही है।
यूरोप के कई देशों में यहूदी समुदायों और अमेरिकी हितों को निशाना बनाकर किए गए हमलों की जिम्मेदारी एक रहस्यमयी समूह ने ली है, जिसे लेकर संदेह है कि यह ईरान समर्थित हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह संगठन वास्तव में एक मुखौटा भी हो सकता है। सीएनएन के अनुसार, सोशल मीडिया पर सक्रिय इस समूह की गतिविधियों और दावों ने यूरोपीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
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बातचीत के बीच हमले बढ़ा सकते हैं तनाव
सीएनएन के अनुसार इस समूह ने जिन घटनाओं की जिम्मेदारी ली है, उनमें यूनाइटेड किंगडम में यहूदी समुदाय द्वारा संचालित एंबुलेंसों पर आगजनी, बेल्जियम में एक सिनेगॉग यानी यहूदी उपासना स्थल के बाहर विस्फोटक उपकरण का धमाका और फ्रांस में बैंक ऑफ अमेरिका के कार्यालय पर विफल हमले की साजिश शामिल है। इन घटनाओं से जुड़े वीडियो और संदेश ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए साझा किए गए, जो प्रॉ-ईरानी मिलिशिया से जुड़े माने जाते हैं।द हेग स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर काउंटर-टेररिज्म (आईसीसीटी) के निदेशक थॉमस रेनार्ड ने सीएनएन से कहा कि इस समूह की डिजिटल गतिविधियां प्रॉ-ईरानी दिखाई देती हैं।
ईरान की भूमिका पर संदेह
थॉमस रेनार्ड के अनुसार अभी यह मामला अटकलों के दायरे में है, लेकिन मजबूत संकेत हैं कि इसमें विदेशी मदद हो सकती है। ईरान पर सर्वाधिक संदेह है। गिरफ्तार संदिग्धों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच से और स्पष्ट जानकारी मिलने की संभावना है।