ईरान में दो टन सोने के सिक्कों के साथ गिरफ्तार हुए वहीद मजलूमीन को बुधवार की सुबह फांसी दे दी गई। राजधानी तेहरान के अभियोजन कार्यालय ने बताया कि वहीद मजलूमीन और उनके साथी मोहम्मद इस्माइल गासेमी की मौत की सजा को ईरान की सबसे बड़ी अदालत की मंजूरी मिल गई थी।
वहीद मजलूमीन और मोहम्मद इस्माइल गासेमी को अदालत ने भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराध के मामले में कसूरवार ठहराया था। उन दोनों पर सोने के सिक्कों की जमाखोरी के जरिए मुद्रा बाजार के कामकाज में अनधिकृत रूप से दखल देने का आरोप लगाया गया था।
इस मामले में वहीद मजलूमीन के साथ और भी लोग गिरफ्तार किए गए थे। ईरान की मुद्रा रियाल पिछले साल की दर प्रति डॉलर 40,500 से बढ़कर 135,000 पर पहुंच गई है।
कौन हैं वहीद मजलूमीन?
जब इस साल जुलाई में तेहरान के पुलिस चीफ ने दो टन सोने की अशर्फियों के साथ एक शख्स की गिरफ्तारी की ख्बर दी और उसे 'सिक्कों के सुल्तान' के नाम से नवाजा तो ईरान के आम लोग वहीद मजलूमीन को नहीं के बराबर जानते थे।
उस समय तेहरान पुलिस ने बताया था कि "इस शख्स ने अपने लोगों को आदेश दिया था कि तेहरान के बाजार में तमाम सिक्कों को जिस भी कीमत पर हो, खरीद लो ताकि आने वाले दिनों में वे खुद सोने के सिक्कों की कीमत तय करें।"
फिर बाद में हालांकि ये भी घोषणा की गई कि मजलूमीन की दो टन सोने की अशर्फियां जब्त नहीं की गई हैं। लेकिन ये भी कहा गया कि "उन्होंने और उनके बेटे ने दो टन से ज्यादा सिक्के खरीदे हैं।"
तब से लेकर अब तक मजलूमीन का नाम ईरानी मीडिया में बार-बार लिया गया और उनके केस की फाइल फांसी की सजा के लिए आगे बढ़ा दी गई। लेकिन इस फाइल में 'सिक्कों का सुल्तान' एक मात्र शख्स नहीं है जिसे आर्थिक अपराध के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी।
सिक्कों की आपूर्ति में गिरावट
पिछले साल जून महीने के आखिर में नए तरह की सोने की कुल अशर्फियां 12 लाख तूमान से भी अधिक थीं लेकिन जैसे ही विनिमय दर में तेजी आई, मुद्रा की कीमत भी उसी अनुपात में बढ़ गई। फिर इस साल जुलाई में जब वहीद मजलूमीन की गिरफ्तारी की खबर आई तो सोने के सिक्कों की कीमत तीन मिलियन तूमान से भी ऊपर पहुंच गई।
न्याय विभाग के अधिकारियों का मानना है कि मजलूमीन और उनके सहयोगियों ने बाजार से सिक्कों का जखीरा इकट्ठा करके सिक्कों की आपूर्ति में गिरावट लाकर सिक्कों की कीमतें बढ़ा दी थीं।
56 साल के मजलूमीन को नजदीक से जानने वालों का कहना है कि वे 30 साल से भी ज्यादा समय से तेहरान के बाजार में सोने और सिक्कों के लेनदेन का काम करते आ रहे थे। तेहरान के वनक रोड की गली के दुकानदार मजलूमीन को वहीद के नाम से बुलाते थे। इसी गली में उनका दफ्तर भी था, जहां से उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
लोकल मीडिया में वहीद के पड़ोसी दुकानदारों के हवाले से ये कहा जा रहा है कि मजलूमीन एक मेहनती शख्स थे और वे अपनी अक्ल और हुनर के बल पर इस मकाम तक पहुंचे और उनपर लगे इल्जाम झूठे थे।
ईरान की अर्थव्यवस्था
इसी तरह तेहरान के सबजा मैदान बाजार में भी कुछ लोगों का कहना था कि कुछ साल पहले जब मजलूमीन को बंदी बनाया गया था तो रिहा होने के बाद उन्होंने विदेशी विनिमय का बिजनेस छोड़ दिया था। उन्होंने खुद को केवल सोने के कारोबार तक समेट लिया था।
वहीद मजलूमीन की कुछ साल पहले की गिरफ्तारी की बात से इन लोगों का आशय उस घटना से था जब अतीत में उन्हें ईरान की अर्थव्यवस्था ख्ासकर विदेशी मुद्रा के कारोबार में दखल डालने के आरोप में लगभग 6 महीने के लिए जेल की सजा हुई थी।
ईरान के न्याय विभाग का कहना है कि वहीद मजलूमीन और उनके बेटे मोहम्मद रजा की गिरफ्तारी अदालती आदेश के तहत हुई थी। लेकिन ईरान का केंद्रीय बैंक न्याय विभाग से सहमत नहीं लगता। उसकी राय में इन लोगों की गतिविधियां संदेह रहित और सद्भावपूर्ण थीं।
गिरफ्तारी के वक्त केंद्रीय बैंक की तरफ से ये बयान आया कि "हमने इन डॉलरों को उन्हीं लोगों के हवाले कर दिया है।" आखिरकार अदालत ने वहीद मजलूमीन और उनके बेटे को दोष मुक्त करते हुए ये फैसला दिया था कि इन लोगों ने कोई पाप नहीं किया है।