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होर्मुज का चक्रव्यूह: तेल की सप्लाई पर कुंडी मारकर बैठा ईरान, क्या वैश्विक अर्थव्यवस्था को बना लिया है बंधक?

Fri, 27 Mar 2026 06:08 PM IST
राकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तेहरान

सार

पश्चिम एशिया की धरती और समुद्र के पानी में खौफ का साया अब पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा रहा है। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के ईरान प्रोजेक्ट डायरेक्टर अली वाएज ने एक ऐसी सच्चाई बयां की है, जो आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार की कमर तोड़ सकती है। वाएज के अनुसार, ईरान का मानना है कि होर्मुज पर उसका नियंत्रण उसे इस युद्ध में बढ़त दिला रहा है। 
 
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अली वाएज, इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप - फोटो : @ANI
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विस्तार
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पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अपनी ढाल बना लिया है। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के अली वाएज का मानना है कि ईरान वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाकर खुद को सुरक्षित रखने की रणनीति पर चल रहा है। फरवरी में हुए हमलों के बाद अब यह संकट युद्ध और आर्थिक तबाही के मुहाने पर खड़ा है।
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होर्मुज पर पाबंदी
व्यापार के लिहाज से होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। ईरान ने अपनी रणनीति के तहत यहां 'सिलेक्टिव क्लोजर' यानी एक हद तक पाबंदी लगा दी है। वह केवल अपने मित्र देशों के जहाजों को रास्ता दे रहा है, जबकि अमेरिका और इस्राइल से जुड़े जहाजों के लिए रास्ता पूरी तरह बंद है। 

अली वाएज का कहना है कि यह केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि 'इकोनॉमिक टेरर' की तरह है। अगर तनाव और बढ़ा, तो ईरान लाल सागर में हूतियों के जरिए 'बाब अल-मंदाब' को भी ब्लॉक कर सकता है। इसका नजीता यह होगा कि पूरी दुनिया की सप्लाई चेन ठप हो जाएगी।
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ट्रंप के लिए सिरदर्द बना ईरान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस वक्त दोराहे पर खड़े हैं। एक तरफ ईरान के ऊर्जा ग्रिड को तबाह करने की चेतावनी है, तो दूसरी तरफ तेल की आसमान छूती कीमतें। आंकड़ों के मुताबिक, कतर की नेचुरल गैस क्षमता का करीब 17% हिस्सा पहले ही प्रभावित हो चुका है, जिसे ठीक करने में 3 से 5 साल लग सकते हैं। ट्रंप के सामने चुनौती यह है कि जब तक समुद्री रास्ता नहीं खुलता, तब तक वैश्विक महंगाई पर काबू पाना नामुमकिन है। रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान खतरनाक रुख अपना चुका है। कूटनीति की मेज खाली है और बंदूकों की भाषा बोली जा रही है। 


 
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