पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान ने दावा किया है कि उसकी नौसेना ने ‘ओशन कोई’ नामक एक तेल टैंकर को जब्त किया है, जो कथित तौर पर ईरान के तेल निर्यात को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था।
ईरानी सेना के अनुसार, यह कार्रवाई ओमान की खाड़ी में की गई और जहाज को ईरान के दक्षिणी तट की ओर ले जाकर न्यायिक अधिकारियों को सौंप दिया गया।
अमेरिकी युद्धपोतों पर जवाबी कार्रवाई का दावा
ईरानी सेना ने एक अन्य बयान में कहा कि उसकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी विध्वंसक जहाजों को निशाना बनाते हुए क्रूज मिसाइल, रॉकेट और ड्रोन का इस्तेमाल किया। ईरान का दावा है कि यह कार्रवाई उसके तेल टैंकरों पर हुए अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई। ईरानी सेना के मुताबिक, जवाबी कार्रवाई के बाद अमेरिकी युद्धपोतों ने अपना रास्ता बदल लिया और क्षेत्र छोड़ दिया।
अमेरिका ने दो जहाजों को निष्क्रिय करने का किया दावा
वहीं यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि अमेरिकी बलों ने ‘एम/टी सी स्टार III’ और ‘एम/टी सेवदा’ नामक दो जहाजों को निष्क्रिय कर दिया। अमेरिका के अनुसार, ये जहाज अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए ईरानी बंदरगाह की ओर बढ़ रहे थे। अमेरिकी नौसेना के एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान ने दोनों जहाजों के धुएं वाले हिस्से को निशाना बनाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
युद्धविराम उल्लंघन का आरोप
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कार्रवाई को 8 अप्रैल के युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बताया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जब कूटनीतिक समाधान मौजूद है, तब अमेरिका ने लापरवाह सैन्य रास्ता चुना है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की मिसाइल क्षमता पहले से अधिक मजबूत हो चुकी है और देश दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
अमेरिका ने तनाव बढ़ाने से किया इनकार
ईरान के आरोपों के बाद अमेरिका ने कहा कि उसका उद्देश्य तनाव बढ़ाना नहीं है और 8 अप्रैल का युद्धविराम अभी भी प्रभावी है। हालांकि, दोनों देशों के बयानों के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती सैन्य गतिविधियां वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर असर डाल सकती हैं।
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