पश्चिम एशिया में हालात एक बार फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह की वार्ता के लिए अभी कोई तारीख तय नहीं की गई है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने तुर्किये के अंताल्या डिप्लोमेसी फोरम में कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए पहले एक साझा ढांचा तय करना जरूरी है, उसके बाद ही आगे बढ़ा जा सकता है।
समझौते से पहले फ्रेमवर्क जरूरी- ईरान
खतीबजादेह ने कहा कि जब तक बुनियादी समझ नहीं बनती, तब तक किसी नई तारीख पर सहमति संभव नहीं है। उन्होंने दावा किया कि बातचीत में प्रगति हुई है, लेकिन कुछ मुद्दों पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे पक्ष का कठोर रुख अंतरराष्ट्रीय कानून में ईरान को अलग करने की कोशिश करता है, जिसे ईरान स्वीकार नहीं करेगा। ईरानी अधिकारी ने कहा कि उनका देश एनपीटी (NPT) और IAEA का सदस्य है और अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों दोनों को मानता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव जारी
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। ईरान का कहना है कि कुछ पक्ष इस क्षेत्र में उसके अधिकारों को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने इस मुद्दे को और जटिल बनाने की कोशिश की है और क्षेत्रीय समझौतों का उल्लंघन किया गया है। ईरान ने पश्चिमी देशों की कूटनीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बातचीत को खत्म करने के बजाय उसे थकाने की कोशिश की जा रही है।
ईरान का हवाई क्षेत्र चार चरणों में खुलेगा
इसी बीच ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र को फिर से खोलने की योजना भी जारी की है। तसनीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह प्रक्रिया चार चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में ट्रांजिट फ्लाइट्स को अनुमति दी जाएगी। इसके बाद पूर्वी एयरपोर्ट्स से उड़ानें शुरू होंगी, फिर प्रमुख हवाई अड्डों जैसे मेहराबाद और इमाम खुमैनी एयरपोर्ट को खोला जाएगा। अंतिम चरण में पश्चिमी एयरपोर्ट्स को भी संचालन की अनुमति मिलेगी। हालांकि फिलहाल टिकटों की बिक्री पर रोक जारी है और यात्रियों को आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार करने को कहा गया है।
क्षेत्रीय संघर्षों के चलते 28 फरवरी के बाद से ईरान का हवाई क्षेत्र सामान्य वाणिज्यिक उड़ानों के लिए लगभग बंद रहा है। केवल सीमित और विशेष अनुमति वाली उड़ानों को ही संचालन की इजाजत है। इस स्थिति के चलते अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने सुरक्षा कारणों से अपने रूट बदल दिए हैं, जिससे वैश्विक विमानन व्यवस्था पर भी असर पड़ा है।