ईरान ने रविवार को अमेरिका के साथ होने वाली वार्ता को लेकर अपनी शर्ते साफ कर दी। इसके लिए ईरान की ओर से जारी बयान में बताया गया कि अगर अमेरिका के साथ वार्ता का उद्देश्य सिर्फ उसके परमाणु कार्यक्रम के सैन्यीकरण को लेकर चिंताओं को दूर करना है, तो वह इसे स्वीकार करने पर विचार करेगा। ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने एक बयान में कहा कि अगर बातचीत का मकसद सैन्यीकरण के बारे में चिंताओं को हल करना है, तो वो इसके लिए तैयार है। हालांकि ईरान ने ये भी कहा कि अगर अमेरिका इसे समाप्त करना चाहता है तो इस मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं होगी।
मामले में ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने कहा कि यदि वार्ता का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण रखने की चिंता को दूर करना है, तो वह इस पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, मिशन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई बातचीत ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के उद्देश्य से होगी और यह दावा करेगी कि जो काम ओबामा प्रशासन नहीं कर सका, वह अब हो चुका है, तो ऐसी बातचीत कभी नहीं होगी।
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अमेरिका-इस्राइल की ईरान को चेतावनी
गौरतलब है कि बढ़ते तनाव को देखते हुए अमेरिका और इस्राइल ने स्पष्ट रूप से ईरान को चेतावनी दी है कि वे ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने नहीं देंगे, क्योंकि ईरान के यूरेनियम को हथियार-स्तर तक समृद्ध करने की प्रक्रिया चल रही है। यह प्रक्रिया केवल उन देशों के लिए संभव है जो पहले से परमाणु हथियार रखते हैं। इस स्थिति को लेकर सैन्य टकराव की संभावना बढ़ गई है, यानी यदि ईरान परमाणु हथियार बनाने में सफल होता है तो यह दोनों देशों के साथ गंभीर संघर्ष का कारण बन सकता है। हालांकि ईरान लंबे समय से कहता आ रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, लेकिन अमेरिका और इस्राइल को इसकी नीतियों पर चिंता है।