बीते साल 20 जून को ईरान ने एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया था। इसके बाद अमेरिका ने ईरान को इसके नतीजे भुगतने की चेतावनी भी दी थी। माना जा रहा है कि इसके बाद अमेरिकी साइबर हैकर्स की टीम ने ईरान की मिसाइल प्रक्षेपण में इस्तेमाल होने वाले कम्प्यूटर्स पर हमला कर दिया था।
धीरे-धीरे यह खबर मीडिया के जरिये बाहर आने लग गई थी। अब एक सवाल यह है कि क्या अमेरिका भी ईरान के साइबर हमले से डरता है? हालांकि इस विषय पर अमेरिका के रक्षा अधिकारियों ने किसी भी समाचार पत्र की रिपोर्ट की पुष्टि नहीं की है।
अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट की एक खबर के मुताबिक, 'ईरान के हमले से ऐसे कंप्यूटरों को नुकसान पहुंचा है जिन्हें रॉकेट और मिसाइल प्रक्षेपण में इस्तेमाल किया जाता है। खबर में ये भी लिखा है कि अमेरिका के रक्षा अधिकारियों ने समाचार पत्र की रिपोर्ट की पुष्टि नहीं की है। अमेरिकी मीडिया ने खबरों के माध्यम से इस बात का दावा भी किया कि, अमेरिका ने ईरान में अपने निगरानी ड्रोन मार गिराये जाने के बाद ईरान की मिसाइल नियंत्रण प्रणाली और उनके एक जासूसी नेटवर्क पर साइबर हमले किये थे।
बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या ये कदम अमेरिका ने ईरान के डर से उठाया या फिर उसकी कोई सोची-समझी रणनीति है। इस खबर पर बीबीसी ने भी ट्वीट किया और लिखा "ईरान की मिसाइल नियंत्रण प्रणाली पर अमेरिका का साइबर अटैक" रॉकेट और मिसाइल लांचर चलाने वाले कम्प्यूटरों को निशाना बनाया गया।
'हमारे दैनिक जीवन में सूचना तंत्र और साइबरस्पेस के महत्व को देखते हुए, यह भी विचारणीय है कि अमेरिका - ईरान विवाद न सिर्फ भौतिक दुनिया की चीज रहेगी बल्कि यह साइबर हमलों का रूप भी ले सकती है। इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, खासकर जब ईरान ने पिछले दशक में, 2010 में, अपने यूरेनियम संवर्धन सुविधाओं पर अमेरिका द्वारा स्टक्सनेट वाइरस द्वारा किए गए आक्रमण के बाद अपनी साइबर क्षमताओं कि वृद्धि का प्रदर्शन किया था।' - हरीश चौधरी, साइबर एक्सपर्ट और इंटरनेट गवर्नेंस एक्सपर्ट
याहू ने दो पूर्व खुफिया अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर नजर रखने वाले एक जासूसी जहाज को निशाना बनाया। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने इसी जगह हाल में ही में दो बार उसके तेल टैंकरों पर हमले किये थे। ईरान के परमाणु सौदे से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद से दोनों देशों के बीच बढ़ा हुआ है।
ईरान का दावा है कि ड्रोन ने उसके हवाई क्षेत्र का जबर्दस्त उल्लंघन किया था। ड्रोन हमले के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर हमला करने के बात कही थी। बाद में बात पलट गई और उन्होंने हमले की सोच त्यागकर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अगले सप्ताह ईरान पर बड़े प्रतिबंध जरूर लगाएगा।
'अक्तूबर 2019 में अमेरिकी अधिकारी ने रायटर्स को कहा कि अमेरिका ने ईरान के इस प्रोपेगैंडा के खिलाफ कि ईरानी ड्रोन एवं मिसाइल ने अरेबियन तेल सुविधाओं पर हमला किया है, अमेरिका ने इसके खिलाफ एक गुप्त साइबर अभियान शुरू किया है। दूसरी तरफ, 2013 में यह पता लगा कि ईरानी हैकर्स, जो कथित रूप से ईरान सरकार के लिए काम करते थे, ने न्यूयॉर्क शहर के उत्तर के एक छोटे डैम के कम्प्युटर के नियंत्रण का भेदन कर दिया है। इन्हीं हैकर्स ने जेपी मॉर्गन चेज़, बैंक ऑफ अमेरिका, और जैसी दर्जनों वित्तीय संस्थाओं पर साइबर हमलों कि शुरुआत की और बड़ी मात्रा में इनकी सेवाओं को नकारते हुए ग्राहकों को उनकी ऑनलाइन अकाउंट तक पहुंच को बाधित कर दिया।'
हरीश चौधरी, साइबर एक्सपर्ट और इंटरनेट गवर्नेंस एक्सपर्ट
"होर्मुज जलडमरूमध्य" मात्र नाम नहीं एक चेतावनी है
होर्मुज जलडमरूमध्य
- फोटो : Amar Ujala
जब जब अमेरिका और ईरान में तनाव बढ़ा है तब तब इसका गंभीर परिणाम सामने निकलकर आया है और वो फारस की खाड़ी के रूप में विश्व के सामने निकला हैं, ईरान पहले से ही यह चेतावनी दे चुका है कि अगर अमेरिका के साथ सैन्य तनाव बढ़ा तो वो विश्व की सबसे महत्वपूर्ण तेल धमनी "होर्मुज जलडमरूमध्य" को बंद कर देगा। "होर्मुज जलडमरूमध्य" पर ईरान बार बार चेतावनी इसलिए देता है क्योंकि यह पूरी दुनिया के तेल व्यापार पर बहुत असर डालती है। अगर ईरान "होर्मुज जलडमरूमध्य" बंद करता है तो पूरी दुनिया में तेल को लेकर हाहाकार मच जायेगा । ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इराक, सऊदी अरब, कुवैत, कतर और यूएई के ज्यादातर तेल का निर्यात हॉर्मूज जलडमरूमध्य के द्वारा ही होता है।
- यहा से 15 मिलियन बैरल्स तेल की सप्लाई होती है।
- अगर ये तेल सप्लाई रूकती हैं तो यूएस और यूके समेत बहुत सारे देशों में तेल की किल्लत हो जाएगी।
- खाड़ी देशों में हालत बिगड़ेंगे और आपसी संघर्ष के हालत पैदा होंगे।
- तेल के दम बहुत बढ़ेंगे।
- भारत और चीन के लिए परेशानियां बहुत बढ़ जाएंगी।
- भारत ही नहीं चीन की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा
- अमेरिका द्वारा जो तेल के आयत पर छूट दी जा रही है उसके समाप्त होने से अभी भारत जूंझ रहा है और उसके आगे ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक और चुनौती सामने खड़ी है।
नहीं भूल सकते ''टैंकर वॉर''
1980 और 1988 में जब ईरान और इराक के बीच युद्ध हुआ था उस समय दोनों देशों ने एक दूसरे के तेल ठिकानो को निशाना बनाया था। उस समय भी हॉर्मूज जलडमरूमध्य से तेल व्यापार पर असर पड़ा था। इसके बाद अमेरिका ने बहरीन में यूएस फिफ्थ फ्लीड को व्यापारी जहाजों की सुरक्षा के लिए उतारा था, जिसकी जिम्मेदारी थी हॉर्मूज जलडमरूमध्य में तेल के व्यापार को सुचारू रूप से चलाया जा सके।
- इसके बाद ईरान ने न्यूक्लियर प्रोग्राम को शुरू किया मगर अंतरराष्ट्रीय दबाब के बाद रोक दिया गया।
- 2015 में अमेरिका ने ईरान के साथ किये गए परमाणु करारा से अलग कर लिया।
साइबर हमला और ईरान
ईरान बदला लेने के लिए अपना सबसे बड़ा दाव खेल सकता है, वो साइबर हमले को भी अपना हथियार बना सकता हैं। तेहरान के पास पश्चिमी देशों के साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचने की अपार क्षमता है और उसने एक साइबर आर्मी भी बना रखी है। जो इस्लामिक गणराज्य ईरान के लिए पूरी तरह से समर्पित और प्रतिबद्ध है ।
क्यूसिफ संगठन के प्रमुख लोइक गुएजो के मुताबिक " ईरान अपने साइबर हमले में प्रमुख औद्योगिक ढांचों पर हमला कर सकता है जैसे बांध, पावर स्टेशन। सबसे बड़ा खतरा यह है कि बिजली कटौती, गैस लीक्स, यातायात और बम्ब विस्फोट से आम जान जीवन अस्त व्यस्त हो सकता है "
( क्यूसिफ संगठन फ्रांस का एक ऐसा संगठन है जो फ्रांस की सुरक्षा मामलों से सम्बंधित जानकारिया एकत्र करता है )
इंटरनेशनल क्रिसिस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर हाइको वीमेन के मुताबिक ' ईरान सीधे युद्ध लड़ने के विकल्प को शयद ही अपनाये, सामान्य अनुमान यह है कि अमेरिका ईरान सीधा युद्ध लड़ने की जगह, एक दूसरे पर दबाब बनाने और एक दूसरे को नीचे दिखाने का प्रयास ज्यादा करेगा '
'अमेरिकी वित्तीय तंत्रों ईरानी साइबर हमलों में सबसे प्रसिद्ध हुआ ऑपरेशन अबाबिल, जिसने नैस्डैक स्टॉक एक्स्चेंज सहित देश के बड़े वित्तीय संस्थाओं को निशाना बनाया पर केवल सीमित मात्रा में ही ग्राहकों को उनके अकाउंट तक पहुंच को प्रभावित कर पाया। यहाँ तक कि ईरान का सबसे मजबूत साइबर हमला, शैमून हमला, जो विश्व की सबसे बड़ी तेल कंपनी - सऊदी अरामको पर किया गया था जिसने कंपनी के हजारों कम्प्युटरों से सूचनाओं को मिटा दिया था जिससे करोड़ों का नुकसान हुआ था।'
हरीश चौधरी, साइबर एक्सपर्ट और इंटरनेट गवर्नेंस एक्सपर्ट
विदेशी मीडिया में ईरान पर साइबर हमले की खबरों को कैसे लिया
विदेशी मीडिया में ईरान पर साइबर हमले की खबर
- फोटो : Amar Ujala
अल जजीरा, वाशिंगटन पोस्ट और दूसरे कई बड़े अमेरिकी अखबारों ने ईरान पर अमेरिका के साइबर हमले को प्रमुखता से अपनी खबर का हिस्सा बनाया, जमकर इस विषय पर लिखा और कार्यक्रम बनाए। अमेरिकी साइबर हमले की खबर को अमेरिकी मीडिया ने बहुत प्रमुखता से प्रकाशित किया है और अमेरीकी रिपोर्ट्स में जमकर यह दावा किया गया कि ईरान पर हवाई हमले नहीं करने के फैसले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर साइबर अटैक का फैसला लिया।
अरब देशों का बड़ा समाचार नेटवर्क अल जजीरा इस हमले पर लिखता है 'कि ईरानी हवाई क्षेत्र के पास अमेरिकी ड्रोन को गिराए जाने के बाद उस पर जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिका ने ईरान के मिसाइल कंट्रोल सिस्टम और जासूसी नेटवर्क पर साइबर हमले करना शुरू कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि साइबर अटैक से ईरान के मिसाइल और रॉकेट हमले करने वाली प्रणाली निष्क्रिय हो गई है।'
वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक ' अमेरिकी हमले में रॉकेट और मिसाइल सिस्टम को नियंत्रित करने वाली कंप्यूटर प्रणालियों को निशाना बनाया गया है, वहीं न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक तेल टैंकरों पर हमले और उसके बाद एक अमेरिकी ड्रोन को गिराए जाने के बाद अमरीका ने ईरान के खिलाफ ये कदम उठाया है और युद्ध का फैसला टालते हुए यह कदम उठाया'
'वर्तमान परिप्रेक्ष्य में, ईरान जनरल सुलेमानी कि हत्या का बदला लेने हेतु अपने साइबर हमले की क्षमताओं का प्रयोग कर सकता है। इसी तरह ईरान के वृहत साइबर हलों की क्षमता को देखते हुए कुछ साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का यह कहना हैै कि ईरान अपने साइबर हमलों से अमेरिकी जनसंख्या के बड़े भाग को प्रभावित कर सकता है।
हरीश चौधरी, साइबर एक्सपर्ट और इंटरनेट गवर्नेंस एक्सपर्ट
साइबर युद्ध काफी खतरनाक हो सकता है जो सैन्य लक्ष्य को प्रभावित करने जैसी गहन संसाधनों को अपने नियंत्रण में ले सकता है या नागरिकों को नुकसान पहुंचा सकता है। युद्ध कि प्रक्रिया में राज्यों और और उनकी सरकारों के साथ साथ सैन्य शक्तियाँ शामिल होती हैं।
कुछ साइबर हमलों को किसी खास सरकार का गुण बताना मुश्किल हो सकता है। अंतर्राष्ट्रीय नियमों के अनुसार अगर किसी देश पर सैन्य हमला होता है तो वह विधिसम्मत अपना बचाव कर सकता है जिसमें बराबरी रूप से साइबर हमला भी शामिल है। अमेरिका ने स्पष्ट रूप से साइबर हमलों का जवाब सैन्य शक्ति से देने का अधिकार सूरक्षित रखा है। जवाबी हमलों का स्पष्टीकरण हमेशा से मुश्किल रहा है जबकि साइबर हमलों को नकारा जा सकता है।'
हरीश चौधरी, साइबर एक्सपर्ट और इंटरनेट गवर्नेंस एक्सपर्ट
कंप्यूटर बंद हुआ और काम ठप हुआ
Cyber Attack 2018
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वो साइबर हमला जिसने दुनिया को हिलाकर रख दिया था,
डिजिटल दुनिया के इस दौर में हर काम ऑनलाइन होता है, हम ज्यादातर डिजिटल दुनिया पर निर्भर रहते है। सोचिए ऐसे में एक दिन अचानक ऐसा हो कि सारे कंप्यूटर बंद हो जाएं, तो क्या होगा ? ठीक वैसा ही होगा, जैसा जुलाई 2018 में अमरीका के अलास्का राज्य के एक शहर मटानुस्का-सुसित्ना में हुआ था। रैनसमवेयर के हमले की वजह से ऐसा हुआ था।इस हमले में दुनिया भर के 99 देशों में साइबर हमले से सनसनी फैल गई थी इस हमले की वजह से कई संस्थानों में कामकाम पूरी तरह से ठप हो गए थे।
आज के दौर में हम डिजिटल तरीके से काम निपटाने के इतने आदी हो चुके हैं कि यह समझ ही नहीं पाते कि अचानक डिजिटल दुनिया की रफ्तार ठहर जाए , तो होगा क्या ?
गंभीर मुद्दा है साइबर हमला
मटानुस्का-सुसित्ना शहर को मैट-सू के नाम से जाना जाता है,मैट-सू के कंप्यूटरों पर वायरस का हमला जुलाई 2018 में हुआ था अमरीका के उत्तरी राज्य अलास्का का ये शहर आज भी उस साइबर हमले को नहीं भूल पाया है।
आप को बताते हैं कि 23 जुलाई 2018 में आखिर हुआ क्या था
23 जुलाई 2018 को मैट-सू के छोटे से एक मुहल्ले पामर के कर्मचारी रोजाना की तरह काम के लिए अपने अपने दफ्तर पहुंच रहे थे, कुछ ही समय बाद वहां एंटी वायरस ने लोगों को अलर्ट करना शुरू कर दिया कि 'सिस्टम में कोई वायरस घुस आया है' लोगों ने इस बात को उतनी गंभीरता से नहीं लिया मगर इसका असर जब देखा तो कोई जवाब किसी के पास नहीं था, आईटी टीम ने इस मामले की पड़ताल के लिए कहा, वायरस से जुड़ी फाइल्स मिली और उन्हें डिलीट करने के आदेश दिए गए, साथ ही सबको अपना लोग इन और पॉसवर्ड बदलने की सलाह भी दी गई लेकिन, जैसे ही कंप्यूटर सिस्टम में ये साफ - सफाई की गई वैसे ही इसके विपरीत नतीजे सामने आने लगे।
हमलावर हैकरों ने सिस्टम से वायरस हटाने के लिए बड़ी फिरौती की मांग शुरू कर दी थी ,यह वायरस रैनसमवेयर था ,इस वायरस के माध्यम से लोगों के सिस्टम पर हमला किया जाता है और फिर उनके डेटा को रिस्टोर करने के लिए फिरौती की मांग की जाती है।
जानिए साइबर अटैक के बारे में सबकुछ
जानिए साइबर अटैक के बारें में सबकुछ
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क्या है रैंसमवेयर कंप्यूटर वायरस
जैसा नाम वैसा काम, यह एक तरह का वाइरस होता है जो दूसरे के सिस्टम तक भेजा जाता है, यह उसके डेटा को कब्जे मे लेता है और उसके बदले मे उससे रिश्वत मांगता है।
रैंसमवेयर एक ऐसा कंप्यूटर प्रोग्राम होता है, जो आपकी इजाजत के बिना ही आपके कंप्यूटर में प्रवेश कर जाता है
कंप्यूटर में जितनी भी जानकारी उपलब्ध होती है, वो उसको लॉक कर देता है और आपसे फिरौती की रकम मांगता है
फिरौती देने पर आपको एक्सेस देता हैं और आप अपना डाटा एक्सेस कर पाते हैं अगर आप फिरौती नहीं देते तो हमेशा के लिए वह डाटा आपके पास से चला जाता है
'साइबर सुरक्षा की परिभाषा के अनुसार, यह ऐसी तकनीकों, प्रसंस्करणों, और पद्धतियों का समूह है जो नेटवर्क, डिवाइस, प्रोग्राम,और डेटा को अनाधिकृत पहुंच से बचाने को विकसित किया जाता है। साधारण शब्दों में साइबर सुरक्षा एक ऐसा साधन है जो कम्प्युटर, नेटवर्क और डेटा को विद्वेषपूर्ण आक्रमणों से सुरक्षित रखता है। तकनीकी क्षमताओं एवं अमेरिकी निष्पादनों के उपलब्ध डेटा के आधार पर यदि अमेरिका और ईरान के बीच साइबर युद्ध होने कि स्थिति में ऐसा माना जा सकता है कि इस फ्रंट पर अमेरिका ईरान पर हमला करने कि मजबूत स्थिति में है। विगत कि घटनाओं के अनुसार सबसे यादगार साइबर हमलों में 2010 में स्टक्सनेट वाइरस के हमलों से ईरानी संवर्धन सुविधाओं को संक्रमित किए जाने को माना जा सकता है। यद्यपि किसी देश ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली फिर भी यह माना गया कि यह कार्य अमेरिका समर्थित एवं इजराइली विशेषज्ञों का है।'
हरीश चौधरी, साइबर एक्सपर्ट और इंटरनेट गवर्नेंस एक्सपर्ट
साइबर सुरक्षा के मुख्य तत्व
- एप्लिकेशन सुरक्षा
- इंफॉर्मेशन सुरक्षा
- नेटवर्क सुरक्षा
- ऑपरेशनल सुरक्षा
- एंड यूजर सुरक्षा
- डेटा सुरक्षा
- मोबाइल सुरक्षा
- क्लाउड सुरक्षा
ऐसे खतरनाक वायरस से बचने के लिए ये हैं कुछ टिप्स
ऐसे खतरनाक वायरस से बचने के लिए ये हैं कुछ टिप्स
- फोटो : Amar Ujala
- मजबूत और अनोखे पासवर्ड का इस्तेमाल करें।
- प्रत्येक खाते के लिए अलग अलग पासवर्ड का प्रयोग करें।
- समय समय पर अपने पासवर्ड को बदलते रहें।
- पासवर्ड प्रबंधक का प्रयोग करें।
- सुरक्षा कुंजी का प्रयोग करें।
- ऑनलाइन खातों के लिए दो-चरणीय सत्यापन सेटअप करें।
- अपने अकाउंट की सेटिंग्स की जांच करते रहें।
- अपने अकाउंट की जांच G.co/securitycheckup पर करते रहें।
- जब भी किसी और सिस्टम पर लॉग इन करें तो लॉग आउट जरूर करें।
- आप अपने डाटा का बैक -उप जरूर अपने पास रखें
- एक अच्छा और प्रामाणिक एंटी वायरस जरूर डालें
- ट्रांसिक्शन का काम यदि करें तो सिक्योर वेबसाइट पर करें और इसकी जाँच कर ले
इससे बचने के अन्य तरीके
- जब भी संभव हो पासवर्ड वाले नेटवर्क पर कनेक्ट करना चाहिए। इस तरह के नेटवर्क मे जानकारियाँ चोरी होने की संभावना कम होती है।
- सार्वजनिक नेटवर्क से खरीदारी करते समय ज्यादा सतर्क रहना चाहिए।
- जब भी ऐसा करना जरूरी हो तो इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि अपने खास डाटा और फ़ाइल को ट्रांसफर न किया जाए।
- अपनी ऑनलाइन पहचान के बारे में बहुत सावधानी बरतें।
- ओपन नेटवर्क और सिक्योर नेटवर्क की जांच पड़ताल कर लें।
- सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों, ई-मेल आदि पर प्राप्त लिंकों पर क्लिक करते समय सावधानी बरतें। यह एक खतरनाक लिंक हो सकता है।
- आपका बैंक अथवा इसके कर्मचारी आपके खाते के पासवर्ड, पिन, ओटीपी और सीवीवी विवरण आदि के लिए आपको अनुरोध स्वरूप कॉल अथवा ई-मेल नहीं करेंगे। यदि आपको ऐसी कॉल प्राप्त होती है तो इसकी सूचना तुरन्त अपने बैंक को दें और इसकी रिपोर्ट दर्ज करायें।
- अपने ब्राउजर से अनधिकृत थर्ड-पार्टी-एक्सटेंशन, प्लगइन और एड-आन के इस्तेमाल से बचना चाहिए। इनसे आपकी ऑनलाइन गतिविधि को गुप्त रूप से ट्रैक किया जा सकता है और आपका पर्सनल-डाटा चोरी करके उसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।
- सार्वजनिक कंप्यूटर और साइबर कैफे से नेट बैंकिंग सुविधा का प्रयोग करते समय बैंकों द्वारा प्रदान किए गए वर्चुअल की बोर्ड का ही हमेशा उपयोग करें। इन कंप्यूटरों में की बोर्ड लॉगर्स लगे हो सकते हैं जो आपका यूजर पासवर्ड को चुरा सकते हैं।
भारत और साइबर सुरक्षा
'भारत एक राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति बनाने की तरफ अग्रसर है। 2013 की साइबर सुरक्षा नीति खुली और तटस्थ तकनीकी प्रकार की है। आज की तकनीकी अर्थव्यवस्था भारत की कुल अर्थव्यवस्था का 14-15% है और 2024 तक इसके 20% तक पहुंचने का अनुमान है। भारत के पास 120 से अधिक डेटा सेंटर और क्लाउड्स हैं।'
हरीश चौधरी, साइबर एक्सपर्ट और इंटरनेट गवर्नेंस एक्सपर्ट
Bibliography and Refrences
*Cyber Expert Reax and Questionnaire Based.
(Its for International Media Reax.)
-AP sources: US struck Iranian military computers this week
https://apnews.com/f01492c3dbd14856bce41d776248921f
-Washington Post: Trump approved cyber-strikes against Iranian computer database used to plan attacks on oil tankers
https://www.washingtonpost.com/world/national-security/with-trumps-approval-pentagon-launched-cyber-strikes-against-iran/2019/06/22/250d3740-950d-11e9-b570-6416efdc0803
-New York Times: U.S. Carried Out Cyberattacks on Iran
https://www.nytimes.com/2019/06/22/us/politics/us-iran-cyber-attacks.html