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आर-पार की लड़ाई के मूड में ईरानी जनता: दो हफ्ते बाद भी नहीं थमी बगावत? खामेनेई की चेतावनी के बावजूद विरोध जारी

Sun, 11 Jan 2026 01:33 AM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान

सार

Iran protests 2026: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन के दो हफ्ते हो चुके हैं। अब तक 70 से ज्यादा मौतें और हजारों गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। ऐसे में जानेंगे कि आखिर इंटरनेट बंद और खामेनेई की चेतावनियों के बावजूद लोग सड़कों पर क्यों हैं। 
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ईरान में विरोध प्रदर्शन के बाद भारी तनाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन अब दो हफ्तों के करीब पहुंच चुके हैं और हालात लगातार सख्त होते जा रहे हैं। इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद हैं, सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज है और सरकार ने खुले तौर पर कड़ा संदेश दे दिया है। इसके बावजूद राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। बढ़ती मौतों और गिरफ्तारियों के बीच सवाल यह है कि क्या यह आंदोलन दबेगा या और उग्र होगा।

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ईरान में यह विरोध दिसंबर के अंत में शुरू हुआ। शुरुआत आर्थिक संकट से हुई, लेकिन अब यह सीधे सत्ता को चुनौती दे रहा है। ईरानी रियाल की कीमत ऐतिहासिक गिरावट के साथ एक डॉलर के मुकाबले 14 लाख तक पहुंच गई। महंगाई, बेरोजगारी और प्रतिबंधों से त्रस्त लोग सड़कों पर उतरे। धीरे-धीरे नारों का रुख आर्थिक मांगों से हटकर राजनीतिक बदलाव की ओर हो गया। सरकार मान रही है कि प्रदर्शन जारी हैं, लेकिन उसे विदेशी साजिश बताकर कार्रवाई को सही ठहरा रही है।

सरकार का सख्त संदेश क्या है?
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के संकेतों के बाद सरकार ने खुली चेतावनी दी है। अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने प्रदर्शनकारियों को खुदा का दुश्मन बताया। इस आरोप में मौत की सजा तक का प्रावधान है। सरकारी टीवी पर कहा गया कि कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।अभियोजकों को तेजी से आरोप पत्र दाखिल करने के आदेश दिए गए हैं। यह संदेश बताता है कि सरकार किसी भी कीमत पर नियंत्रण बनाए रखना चाहती है।
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इंटरनेट बंद के बीच प्रदर्शन कैसे दिखे?

  • सरकार ने देश को बाहरी दुनिया से लगभग काट दिया है।

  • गुरुवार से इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन सेवाएं बंद हैं।

  • विदेशी मीडिया की मौजूदगी न के बराबर है।

  • सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ही सीमित जानकारी बाहर भेज पा रहे हैं।


इसके बावजूद सत्यापित वीडियो सामने आए हैं। उत्तरी तेहरान के सादत आबाद इलाके में हजारों लोगों के जुटने और खामेनेई मुर्दाबाद के नारे लगने की पुष्टि हुई है। सरकारी दावे कि रात में शांति रही, इन वीडियो से मेल नहीं खाते।

सुरक्षा बलों और हिंसा की तस्वीर
सरकार का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने हिंसा फैलाई।अर्ध-सरकारी एजेंसियों के मुताबिक, इस्फहान में एक प्रदर्शनकारी ने सुरक्षा बलों पर गोली चलाई। आगजनी और पेट्रोल बम फेंकने की घटनाओं की फुटेज जारी की गई।बसीज बल के तीन सदस्यों समेत कई सुरक्षाकर्मियों की मौत का दावा किया गया। वहीं, मानवाधिकार संगठनों के अनुसार अब तक कम से कम 72 लोगों की मौत हुई है। 2,300 से ज्यादा लोग हिरासत में लिए गए हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि टकराव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर है।

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विदेशों से क्या प्रतिक्रिया आई?
अमेरिका ने खुलकर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान के बहादुर लोगों के साथ खड़ा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने चेताया कि राष्ट्रपति ट्रंप जो कहते हैं, उस पर अमल करते हैं। ईरान सरकार इन बयानों को विदेशी हस्तक्षेप बता रही है और इसी आधार पर सख्ती को जायज ठहरा रही है।

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रेजा पहलवी ने फिर की ये अपील
निर्वासित युवराज रेजा पहलवी ने लोगों से फिर सड़कों पर उतरने की अपील की है। उन्होंने शेर-सूरज वाले पुराने झंडे के साथ सार्वजनिक स्थानों पर कब्जा करने को कहा। कुछ जगहों पर शाह के समर्थन में नारे भी सुनाई दिए हैं। उधर, इंटरनेट बंदी को लेकर चिंता बढ़ रही है।

2019 के प्रदर्शनों में सैकड़ों लोग मारे गए थे। नोबेल पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी के बेटे अली रहमानी ने आशंका जताई कि इस बार भी खूनखराबा हो सकता है। एयरलाइंस ने उड़ानें रद्द करनी शुरू कर दी हैं, जिससे हालात की गंभीरता और साफ होती है।

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