ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन अब दो हफ्तों के करीब पहुंच चुके हैं और हालात लगातार सख्त होते जा रहे हैं। इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद हैं, सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज है और सरकार ने खुले तौर पर कड़ा संदेश दे दिया है। इसके बावजूद राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। बढ़ती मौतों और गिरफ्तारियों के बीच सवाल यह है कि क्या यह आंदोलन दबेगा या और उग्र होगा।
सरकार ने देश को बाहरी दुनिया से लगभग काट दिया है।
गुरुवार से इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन सेवाएं बंद हैं।
विदेशी मीडिया की मौजूदगी न के बराबर है।
सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ही सीमित जानकारी बाहर भेज पा रहे हैं।
इसके बावजूद सत्यापित वीडियो सामने आए हैं। उत्तरी तेहरान के सादत आबाद इलाके में हजारों लोगों के जुटने और खामेनेई मुर्दाबाद के नारे लगने की पुष्टि हुई है। सरकारी दावे कि रात में शांति रही, इन वीडियो से मेल नहीं खाते।
सुरक्षा बलों और हिंसा की तस्वीर
सरकार का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने हिंसा फैलाई।अर्ध-सरकारी एजेंसियों के मुताबिक, इस्फहान में एक प्रदर्शनकारी ने सुरक्षा बलों पर गोली चलाई। आगजनी और पेट्रोल बम फेंकने की घटनाओं की फुटेज जारी की गई।बसीज बल के तीन सदस्यों समेत कई सुरक्षाकर्मियों की मौत का दावा किया गया। वहीं, मानवाधिकार संगठनों के अनुसार अब तक कम से कम 72 लोगों की मौत हुई है। 2,300 से ज्यादा लोग हिरासत में लिए गए हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि टकराव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर है।
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विदेशों से क्या प्रतिक्रिया आई?
अमेरिका ने खुलकर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान के बहादुर लोगों के साथ खड़ा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने चेताया कि राष्ट्रपति ट्रंप जो कहते हैं, उस पर अमल करते हैं। ईरान सरकार इन बयानों को विदेशी हस्तक्षेप बता रही है और इसी आधार पर सख्ती को जायज ठहरा रही है।