अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में ईरान के उस ताजा प्रस्ताव पर चर्चा हुई जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की बात कही गई है। हालांकि ईरान ने इसके बदले में उस पर लगी आर्थिक पाबंदियां हटानी की शर्त रखी है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया है। हालांकि ट्रंप इसे मानने के मूड में नहीं दिख रहे है।
व्हाइट हाउस ने क्या कहा?
इस बीच व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने मीडिया वार्ता में बताया कि ट्रंप इस प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने बैठक के नतीजे पर पहले से कुछ भी कहने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति खुद जल्द ही इस विषय पर जानकारी देंगे।
मार्को रुबियो ने क्या कहा?
इससे पहले, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने फॉक्स न्यूज को बताया कि ईरानी वार्ताकार अमेरिका के साथ समझौता करने को लेकर गंभीर दिख रहे हैं। वे खुद को मौजूदा मुश्किलों से बाहर निकालना चाहते हैं। हालांकि, वे इसके जरिए सिर्फ और समय हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। रुबियो ने ईरान की आंतरिक स्थिति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि ईरान का शासन कट्टरपंथी शिया मौलवियों के हाथ में है, जो शांति वार्ता में एक बड़ी बाधा है।
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रुबियो के अनुसार, ईरान के भीतर दो गुट हैं। एक गुट राजनीतिक वर्ग का है जो देश और अर्थव्यवस्था चलाना चाहता है। दूसरा गुट पूरी तरह धार्मिक विचारधारा से प्रेरित है, जिसमें रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) और सर्वोच्च नेता शामिल हैं। रुबियो के अनुसार, अमेरिकी वार्ताकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ईरानी प्रतिनिधियों को पहले अपने ही देश के दूसरे गुटों से बात करनी पड़ती है। वे आपस में ही बंटे हुए हैं कि क्या प्रस्ताव देना है और किससे मिलना है।
ईरान के प्रस्ताव पर क्या बोले रुबियो?
वहीं ईरान के प्रस्ताव भेजा था। इसमें कहा गया कि अगर अमेरिका मुख्य बंदरगाहों से नाकाबंदी हटा ले, तो ईरान और अधिक नियंत्रण के लिए तैयार है। परमाणु मुद्दे पर वह बाद के चरणों में बात करना चाहता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते में परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह रोकना जरूरी है। उन्हें शक है कि ईरान केवल समय हासिल करना चाहता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस प्रस्ताव से खुश नहीं हैं। वे पहले परमाणु मुद्दा सुलझाना चाहते हैं।
इस बीच, अमेरिकी प्रशासन ईरान की बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी के असर को सकारात्मक मान रहा है। सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने समझौते के लिए जो नई शर्तें रखी हैं, वे अभी भी अमेरिका की तय सीमाओं (रेड लाइन्स) से काफी दूर हैं।
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