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ईरान : संसदीय चुनाव से पहले हजारों उम्मीदवार अयोग्य ठहराए गए, आज होगा मतदान

Fri, 21 Feb 2020 03:22 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, तेहरान

सार

एटमी संधि से हटने के बाद अमेरिका व पश्चिमी देशों से लगातार हो रहे विवाद और इराक में ड्रोन हमले के दौरान मारे गए कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी के बाद ईरान के मौजूदा चुनाव बेहद ही अहम हैं। 
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विस्तार
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साल 2016 के चार साल बाद ईरान में राजनीतिक और सुरक्षा उथल-पुथल के बीच शुक्रवार को संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं। इससे ठीक पहले ईरान में हजारों उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराए जाने को लेकर उठ रहे सवालों पर सफाई देते हुए चुनाव निगरानी संस्था गार्जियन काउंसिल ने कहा है कि उन्हें कानून के अनुसार ही अयोग्य घोषित किया गया है।

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इस बीच देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामनेई ने मतदान को धार्मिक कर्तव्य बताया है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक तादाद में मताधिकार का उपयोग करने की अपील की है। बता दें कि एटमी संधि से हटने के बाद अमेरिका व पश्चिमी देशों से लगातार हो रहे विवाद और इराक में ड्रोन हमले के दौरान मारे गए कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी के बाद ईरान के मौजूदा चुनाव बेहद ही अहम हैं। 

खासतौर पर देश में सत्तापक्ष के प्रति लोगों में जबरदस्त गुस्सा भी है। ऐसे में हजारों उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराने से लोगों में निराशा है। चुनाव की निगरानी करने वाली संस्था गार्जियन काउंसिल ने अपना बचाव करते हुए उम्मीद जताई कि शुक्रवार को कम से कम 50 फीसदी मतदान होगा। काउंसिल के प्रवक्ता अब्बास अली कदखुदाई ने कहा, हमारी संस्था सियासी दलों के साथ निष्पक्ष बर्ताव करती है।

उम्मीद छोड़ चुके हैं लोग

विरोधियों का कहना है कि ईरान में सुधारवादी और मध्यमार्गी नेताओं को चुनाव लड़ने से रोका गया है। ऐसे में जो विकल्प है वह सिर्फ रूढ़िवादी और अति-रूढ़िवादी में से किसी एक का चुनाव है। आलोचकों का मानना है कि ईरान के लोग उम्मीद छोड़ चुके हैं खासकर ईंधन की कीमतों को लेकर पिछले वर्ष हुए प्रदर्शनों के बाद जिस तरह की कार्रवाई हुई, उसे देखते हुए।

हिजाब विरोधी कार्यकर्ता ने किया मतदान का बहिष्कार

जेनेवा में हिजाब विरोधी कार्यकर्ता शापारक शाजारीजादेह ने ईरान में शुक्रवार को होने जा रहे संसदीय चुनाव के बहिष्कार करने की अपील की है। एक समय देश में बदलाव लाने का सामर्थ्य रखने वाली शाजारीजादेह की अपील से उनकी निराशा झलकती है। महिला अधिकारों के लिए प्रदर्शन करने के दौरान शाजारीजादेह ने सार्वजनिक तौर पर कई बार हिजाब हटाया और उसे परचम बनाकर लहराया, जिसके चलते उनकी गिरफ्तारी भी हुई। 

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मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के एक सालाना सम्मेलन के दौरान जिनेवा में 44 वर्षीय शाजारीजादेह ने कहा, ‘ईरान के लोगों की उम्मीद टूट चुकी है। मैं उन लोगों में से थी जिन्होंने कुछ उम्मीद बांध रखी थी। लेकिन अब तो यह खराब और बेहद खराब में से किसी एक को चुनने जैसा है।’

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