ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए तीन शर्तें रखीं, जिसमें उसके अधिकारों की मान्यता, हर्जाना और भविष्य में हमले के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गारंटी शामिल हैं। इस कदम से पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक तेल बाजार पर असर बढ़ा है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका और इस्राइल के साथ जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए तीन अहम शर्तें रखीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल तभी संघर्ष खत्म हो सकता है जब ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता दी जाए, युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए और भविष्य में किसी भी हमले के खिलाफ ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए।
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पेजेशकियन ने यह बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दिया। उन्होंने लिखा, "रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत में मैंने क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए ईरान की प्रतिबद्धता दोबारा पक्की की। यह युद्ध, जो यहूदी शासन (इस्राइल) और अमेरिका की वजह से शुरू हुआ, केवल तब रोका जा सकता है जब ईरान के कानूनी अधिकारों को मान्यता मिले, हर्जाना दिया जाए और भविष्य में हमले से बचाव के लिए अंतरराष्ट्रीय गारंटी हो।"
युद्ध का असर और तेल बाजार पर दबाव
अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है।
तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
वैश्विक बाजारों में महंगाई की आशंका गहराई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और पाबंदियों के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है।
ईरान की कूटनीतिक पहल
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ईरान की यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय में सामने आई है जब युद्ध अपने दूसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है और फिलहाल तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्र में शांति चाहता है, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार देशों को जवाबदेह ठहराना आवश्यक है।
गौरतलब है कि यह संघर्ष 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ जब अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने भी इस्राइल के कई शहरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, साथ ही जॉर्डन, इराक और खाड़ी के देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। इन घटनाओं के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव तेजी से बढ़ गया और हालात और गंभीर होते जा रहे हैं।